नक्षत्र
गंडमूल नक्षत्र कब है: नवम्बर 2026 से दिसम्बर 2027 तक
प्रकाशित 26 अक्तूबर 2026 | Live Pandit Ji
गंडमूल 27 नक्षत्रों में से 6 नक्षत्रों का नाम है: वे 3 जोड़े, जो उन बिन्दुओं के दोनों ओर हैं जहाँ कोई जल राशि समाप्त होती है और अग्नि राशि आरंभ होती है। चन्द्रमा हर जोड़े को लगभग 2 दिनों में पार करता है, और लगभग हर 9 दिनों में इन 3 जोड़ों में से किसी एक पर पहुँचता है। तालिका की पहली अवधि रेवती–अश्विनी की है: चन्द्रमा 24 अक्तूबर से उसमें था और सोमवार, 26 अक्तूबर 2026 को 17:41 पर निकला। अगली अवधि सोमवार, 2 नवम्बर 2026 को 04:30 पर आरंभ होती है, जब चन्द्रमा आश्लेषा में प्रवेश करता है। नीचे की तालिका 26–28 दिसम्बर 2027 की ज्येष्ठा–मूल अवधि तक जाती है।
6 नक्षत्र और 3 सन्धियाँ
साइट की नक्षत्र तालिका के अनुसार हर जोड़े का पहला नक्षत्र किसी जल राशि के 30°00′ पर समाप्त होता है, और दूसरा उसके बाद की अग्नि राशि के 0°00′ से आरंभ होता है:
- आश्लेषा, कर्क 16°40′ – 30°00′, फिर मघा, सिंह 0°00′ – 13°20′
- ज्येष्ठा, वृश्चिक 16°40′ – 30°00′, फिर मूल, धनु 0°00′ – 13°20′
- रेवती, मीन 16°40′ – 30°00′, फिर अश्विनी, मेष 0°00′ – 13°20′
तीनों सन्धियों पर स्वामी एक ही ढंग से बँटते हैं: जल राशि वाले हर नक्षत्र का स्वामी बुध है और अग्नि राशि वाले हर नक्षत्र का केतु। पूरी स्वामित्व-व्यवस्था में इसका क्या अर्थ है, यह कुंडली वाला पृष्ठ बताता है। कुछ ग्रन्थ इस सन्धि को और संकरा करते हैं, जल राशि वाले नक्षत्र के अंतिम चरण और अग्नि राशि वाले नक्षत्र के पहले चरण तक, यानी दोनों ओर 3°20′, और इस संकरी पट्टी को गण्डान्त कहते हैं। यह पृष्ठ पूरी दो-नक्षत्र अवधियाँ देता है, जिनमें वे सभी नक्षत्र आ जाते हैं जिन्हें गंडमूल नाम में गिना जाता है।
गंडमूल की तारीखें और समय, 26 अक्तूबर 2026 से दिसम्बर 2027 तक
| जोड़ा | चन्द्रमा का प्रवेश (भारतीय समय) | सन्धि पार | चन्द्रमा का निकास | अवधि | भीतर के सूर्योदय (नई दिल्ली) |
|---|---|---|---|---|---|
| रेवती–अश्विनी | शनिवार, 24 अक्तूबर 2026, 20:32 | 25 अक्तूबर 2026, 19:22 | सोमवार, 26 अक्तूबर 2026, 17:41 | 45 घण्टे 09 मिनट | 25 अक्तूबर 2026 और 26 अक्तूबर 2026 |
| आश्लेषा–मघा | सोमवार, 2 नवम्बर 2026, 04:30 | 3 नवम्बर 2026, 03:46 | बुधवार, 4 नवम्बर 2026, 03:26 | 46 घण्टे 56 मिनट | 2 नवम्बर 2026 और 3 नवम्बर 2026 |
| ज्येष्ठा–मूल | बुधवार, 11 नवम्बर 2026, 11:38 | 12 नवम्बर 2026, 14:18 | शुक्रवार, 13 नवम्बर 2026, 17:17 | 53 घण्टे 39 मिनट | 12 नवम्बर 2026 और 13 नवम्बर 2026 |
| रेवती–अश्विनी | शनिवार, 21 नवम्बर 2026, 06:50 | 22 नवम्बर 2026, 05:54 | सोमवार, 23 नवम्बर 2026, 04:15 | 45 घण्टे 25 मिनट | 22 नवम्बर 2026 |
| आश्लेषा–मघा | रविवार, 29 नवम्बर 2026, 10:59 | 30 नवम्बर 2026, 09:42 | मंगलवार, 1 दिसम्बर 2026, 09:00 | 46 घण्टे 01 मिनट | 30 नवम्बर 2026 और 1 दिसम्बर 2026 |
| ज्येष्ठा–मूल | मंगलवार, 8 दिसम्बर 2026, 18:16 | 9 दिसम्बर 2026, 21:00 | गुरुवार, 10 दिसम्बर 2026, 23:58 | 53 घण्टे 42 मिनट | 9 दिसम्बर 2026 और 10 दिसम्बर 2026 |
| रेवती–अश्विनी | शुक्रवार, 18 दिसम्बर 2026, 16:10 | 19 दिसम्बर 2026, 15:57 | रविवार, 20 दिसम्बर 2026, 14:55 | 46 घण्टे 45 मिनट | 19 दिसम्बर 2026 और 20 दिसम्बर 2026 |
| आश्लेषा–मघा | शनिवार, 26 दिसम्बर 2026, 20:12 | 27 दिसम्बर 2026, 18:04 | सोमवार, 28 दिसम्बर 2026, 16:32 | 44 घण्टे 20 मिनट | 27 दिसम्बर 2026 और 28 दिसम्बर 2026 |
| ज्येष्ठा–मूल | मंगलवार, 5 जनवरी, 00:14 | 6 जनवरी, 03:06 | गुरुवार, 7 जनवरी, 06:08 | 53 घण्टे 54 मिनट | 5 जनवरी और 6 जनवरी |
| रेवती–अश्विनी | गुरुवार, 14 जनवरी, 23:18 | 15 जनवरी, 23:50 | शनिवार, 16 जनवरी, 23:38 | 48 घण्टे 20 मिनट | 15 जनवरी और 16 जनवरी |
| आश्लेषा–मघा | शनिवार, 23 जनवरी, 07:31 | 24 जनवरी, 04:53 | सोमवार, 25 जनवरी, 02:40 | 43 घण्टे 09 मिनट | 24 जनवरी |
| ज्येष्ठा–मूल | सोमवार, 1 फ़रवरी, 06:27 | 2 फ़रवरी, 09:21 | बुधवार, 3 फ़रवरी, 12:25 | 53 घण्टे 58 मिनट | 1 फ़रवरी, 2 फ़रवरी और 3 फ़रवरी |
| रेवती–अश्विनी | गुरुवार, 11 फ़रवरी, 04:55 | 12 फ़रवरी, 05:41 | शनिवार, 13 फ़रवरी, 05:55 | 49 घण्टे 00 मिनट | 11 फ़रवरी और 12 फ़रवरी |
| आश्लेषा–मघा | शुक्रवार, 19 फ़रवरी, 18:35 | 20 फ़रवरी, 16:07 | रविवार, 21 फ़रवरी, 13:50 | 43 घण्टे 15 मिनट | 20 फ़रवरी और 21 फ़रवरी |
| ज्येष्ठा–मूल | रविवार, 28 फ़रवरी, 13:47 | 1 मार्च, 16:26 | मंगलवार, 2 मार्च, 19:27 | 53 घण्टे 40 मिनट | 1 मार्च और 2 मार्च |
| रेवती–अश्विनी | बुधवार, 10 मार्च, 10:52 | 11 मार्च, 11:19 | शुक्रवार, 12 मार्च, 11:22 | 48 घण्टे 30 मिनट | 11 मार्च और 12 मार्च |
| आश्लेषा–मघा | शुक्रवार, 19 मार्च, 03:20 | 20 मार्च, 01:31 | शनिवार, 20 मार्च, 23:44 | 44 घण्टे 24 मिनट | 19 मार्च और 20 मार्च |
| ज्येष्ठा–मूल | शनिवार, 27 मार्च, 22:14 | 29 मार्च, 00:31 | मंगलवार, 30 मार्च, 03:18 | 53 घण्टे 04 मिनट | 28 मार्च और 29 मार्च |
| रेवती–अश्विनी | मंगलवार, 6 अप्रैल, 18:23 | 7 अप्रैल, 18:25 | गुरुवार, 8 अप्रैल, 17:59 | 47 घण्टे 36 मिनट | 7 अप्रैल और 8 अप्रैल |
| आश्लेषा–मघा | गुरुवार, 15 अप्रैल, 09:33 | 16 अप्रैल, 08:18 | शनिवार, 17 अप्रैल, 07:08 | 45 घण्टे 35 मिनट | 16 अप्रैल और 17 अप्रैल |
| ज्येष्ठा–मूल | शनिवार, 24 अप्रैल, 06:56 | 25 अप्रैल, 08:57 | सोमवार, 26 अप्रैल, 11:29 | 52 घण्टे 33 मिनट | 25 अप्रैल और 26 अप्रैल |
| रेवती–अश्विनी | मंगलवार, 4 मई, 03:19 | 5 मई, 03:14 | गुरुवार, 6 मई, 02:31 | 47 घण्टे 12 मिनट | 4 मई और 5 मई |
| आश्लेषा–मघा | बुधवार, 12 मई, 14:55 | 13 मई, 13:40 | शुक्रवार, 14 मई, 12:42 | 45 घण्टे 47 मिनट | 13 मई और 14 मई |
| ज्येष्ठा–मूल | शुक्रवार, 21 मई, 14:50 | 22 मई, 16:50 | रविवार, 23 मई, 19:17 | 52 घण्टे 27 मिनट | 22 मई और 23 मई |
| रेवती–अश्विनी | सोमवार, 31 मई, 12:35 | 1 जून, 12:49 | बुधवार, 2 जून, 12:16 | 47 घण्टे 41 मिनट | 1 जून और 2 जून |
| आश्लेषा–मघा | मंगलवार, 8 जून, 21:36 | 9 जून, 19:47 | गुरुवार, 10 जून, 18:23 | 44 घण्टे 47 मिनट | 9 जून और 10 जून |
| ज्येष्ठा–मूल | गुरुवार, 17 जून, 21:30 | 18 जून, 23:40 | रविवार, 20 जून, 02:12 | 52 घण्टे 42 मिनट | 18 जून और 19 जून |
| रेवती–अश्विनी | रविवार, 27 जून, 20:58 | 28 जून, 21:48 | मंगलवार, 29 जून, 21:48 | 48 घण्टे 50 मिनट | 28 जून और 29 जून |
| आश्लेषा–मघा | मंगलवार, 6 जुलाई, 06:33 | 7 जुलाई, 04:03 | गुरुवार, 8 जुलाई, 01:55 | 43 घण्टे 22 मिनट | 7 जुलाई |
| ज्येष्ठा–मूल | गुरुवार, 15 जुलाई, 03:17 | 16 जुलाई, 05:39 | शनिवार, 17 जुलाई, 08:21 | 53 घण्टे 04 मिनट | 15 जुलाई, 16 जुलाई और 17 जुलाई |
| रेवती–अश्विनी | रविवार, 25 जुलाई, 03:52 | 26 जुलाई, 05:13 | मंगलवार, 27 जुलाई, 05:52 | 50 घण्टे 00 मिनट | 25 जुलाई, 26 जुलाई और 27 जुलाई |
| आश्लेषा–मघा | सोमवार, 2 अगस्त, 17:09 | 3 अगस्त, 14:16 | बुधवार, 4 अगस्त, 11:36 | 42 घण्टे 27 मिनट | 3 अगस्त और 4 अगस्त |
| ज्येष्ठा–मूल | बुधवार, 11 अगस्त, 09:13 | 12 अगस्त, 11:33 | शुक्रवार, 13 अगस्त, 14:19 | 53 घण्टे 06 मिनट | 12 अगस्त और 13 अगस्त |
| रेवती–अश्विनी | शनिवार, 21 अगस्त, 09:38 | 22 अगस्त, 11:10 | सोमवार, 23 अगस्त, 12:11 | 50 घण्टे 33 मिनट | 22 अगस्त और 23 अगस्त |
| आश्लेषा–मघा | सोमवार, 30 अगस्त, 03:44 | 31 अगस्त, 01:02 | मंगलवार, 31 अगस्त, 22:20 | 42 घण्टे 36 मिनट | 30 अगस्त और 31 अगस्त |
| ज्येष्ठा–मूल | मंगलवार, 7 सितम्बर, 16:16 | 8 सितम्बर, 18:16 | गुरुवार, 9 सितम्बर, 20:51 | 52 घण्टे 35 मिनट | 8 सितम्बर और 9 सितम्बर |
| रेवती–अश्विनी | शुक्रवार, 17 सितम्बर, 15:28 | 18 सितम्बर, 16:47 | रविवार, 19 सितम्बर, 17:40 | 50 घण्टे 12 मिनट | 18 सितम्बर और 19 सितम्बर |
| आश्लेषा–मघा | रविवार, 26 सितम्बर, 12:37 | 27 सितम्बर, 10:33 | मंगलवार, 28 सितम्बर, 08:20 | 43 घण्टे 43 मिनट | 27 सितम्बर और 28 सितम्बर |
| ज्येष्ठा–मूल | मंगलवार, 5 अक्तूबर, 00:43 | 6 अक्तूबर, 02:14 | गुरुवार, 7 अक्तूबर, 04:28 | 51 घण्टे 45 मिनट | 5 अक्तूबर और 6 अक्तूबर |
| रेवती–अश्विनी | गुरुवार, 14 अक्तूबर, 22:30 | 15 अक्तूबर, 23:29 | शनिवार, 16 अक्तूबर, 23:58 | 49 घण्टे 28 मिनट | 15 अक्तूबर और 16 अक्तूबर |
| आश्लेषा–मघा | शनिवार, 23 अक्तूबर, 19:07 | 24 अक्तूबर, 17:41 | सोमवार, 25 अक्तूबर, 16:09 | 45 घण्टे 02 मिनट | 24 अक्तूबर और 25 अक्तूबर |
| ज्येष्ठा–मूल | सोमवार, 1 नवम्बर, 09:57 | 2 नवम्बर, 11:06 | बुधवार, 3 नवम्बर, 12:57 | 51 घण्टे 00 मिनट | 2 नवम्बर और 3 नवम्बर |
| रेवती–अश्विनी | गुरुवार, 11 नवम्बर, 07:01 | 12 नवम्बर, 07:55 | शनिवार, 13 नवम्बर, 08:10 | 49 घण्टे 09 मिनट | 12 नवम्बर और 13 नवम्बर |
| आश्लेषा–मघा | शनिवार, 20 नवम्बर, 00:27 | 20 नवम्बर, 23:06 | रविवार, 21 नवम्बर, 21:51 | 45 घण्टे 24 मिनट | 20 नवम्बर और 21 नवम्बर |
| ज्येष्ठा–मूल | रविवार, 28 नवम्बर, 18:39 | 29 नवम्बर, 19:47 | मंगलवार, 30 नवम्बर, 21:29 | 50 घण्टे 50 मिनट | 29 नवम्बर और 30 नवम्बर |
| रेवती–अश्विनी | बुधवार, 8 दिसम्बर, 16:12 | 9 दिसम्बर, 17:26 | शुक्रवार, 10 दिसम्बर, 17:54 | 49 घण्टे 42 मिनट | 9 दिसम्बर और 10 दिसम्बर |
| आश्लेषा–मघा | शुक्रवार, 17 दिसम्बर, 07:07 | 18 दिसम्बर, 05:11 | रविवार, 19 दिसम्बर, 03:29 | 44 घण्टे 22 मिनट | 18 दिसम्बर; 17 दिसम्बर अनिर्णीत (नीचे देखें) |
| ज्येष्ठा–मूल | रविवार, 26 दिसम्बर, 01:49 | 27 दिसम्बर, 03:14 | मंगलवार, 28 दिसम्बर, 05:06 | 51 घण्टे 17 मिनट | 26 दिसम्बर और 27 दिसम्बर |
ये समय भारतीय मानक समय में हैं और पूरे देश के लिए एक ही हैं, क्योंकि चन्द्रमा किसी नक्षत्र-सीमा पर हर जगह एक ही क्षण पहुँचता है। बीच वाला स्तम्भ वह क्षण है जब चन्द्रमा जल राशि से अग्नि राशि में जाता है: आश्लेषा से मघा में, ज्येष्ठा से मूल में और रेवती से अश्विनी में। हर क्षण की गणना NASA JPL की DE421 सारणी से, लाहिरी अयनांश लेकर, की गई है और उसे मिनट तक काटा गया है। इसके बाद सूची को साइट के दैनिक पंचांग से दोनों दिशाओं में मिलाया गया: 24 अक्तूबर 2026 से 31 दिसम्बर 2027 तक नई दिल्ली के 433 सूर्योदयों में से जो 95 किसी अवधि के भीतर पड़ते हैं, उन सब पर दैनिक तालिका इन 6 में से कोई नक्षत्र दिखाती है, और किसी अवधि के बाहर वाले किसी भी सूर्योदय पर ऐसा नहीं है। एक सूर्योदय इस गिनती से बाहर रखा गया: 17 दिसम्बर 2027 को नई दिल्ली का सूर्योदय और चन्द्रमा का आश्लेषा में प्रवेश एक ही मिनट, 07:07, में पड़ते हैं, और मिनट तक कटे मान यह नहीं बता सकते कि पहले कौन आता है, इसलिए तालिका उस सुबह को अनिर्णीत दिखाती है।
गंडमूल, महीने-दर-महीने
जो अवधि किसी महीने के अंत को पार करती है, वह दोनों महीनों में दी गई है। 8 महीनों में 4 अवधियाँ पड़ती हैं: नवम्बर 2026, दिसम्बर 2026, फ़रवरी 2027, मार्च 2027, मई 2027, जून 2027, अगस्त 2027 और नवम्बर 2027।
- अक्तूबर 2026: 24–26 अक्तूबर (रेवती–अश्विनी)
- नवम्बर 2026: 2–4 नवम्बर (आश्लेषा–मघा); 11–13 नवम्बर (ज्येष्ठा–मूल); 21–23 नवम्बर (रेवती–अश्विनी); 29 नवम्बर – 1 दिसम्बर (आश्लेषा–मघा)
- दिसम्बर 2026: 29 नवम्बर – 1 दिसम्बर (आश्लेषा–मघा); 8–10 दिसम्बर (ज्येष्ठा–मूल); 18–20 दिसम्बर (रेवती–अश्विनी); 26–28 दिसम्बर (आश्लेषा–मघा)
- जनवरी 2027: 5–7 जनवरी (ज्येष्ठा–मूल); 14–16 जनवरी (रेवती–अश्विनी); 23–25 जनवरी (आश्लेषा–मघा)
- फ़रवरी 2027: 1–3 फ़रवरी (ज्येष्ठा–मूल); 11–13 फ़रवरी (रेवती–अश्विनी); 19–21 फ़रवरी (आश्लेषा–मघा); 28 फ़रवरी – 2 मार्च (ज्येष्ठा–मूल)
- मार्च 2027: 28 फ़रवरी – 2 मार्च (ज्येष्ठा–मूल); 10–12 मार्च (रेवती–अश्विनी); 19–20 मार्च (आश्लेषा–मघा); 27–30 मार्च (ज्येष्ठा–मूल)
- अप्रैल 2027: 6–8 अप्रैल (रेवती–अश्विनी); 15–17 अप्रैल (आश्लेषा–मघा); 24–26 अप्रैल (ज्येष्ठा–मूल)
- मई 2027: 4–6 मई (रेवती–अश्विनी); 12–14 मई (आश्लेषा–मघा); 21–23 मई (ज्येष्ठा–मूल); 31 मई – 2 जून (रेवती–अश्विनी)
- जून 2027: 31 मई – 2 जून (रेवती–अश्विनी); 8–10 जून (आश्लेषा–मघा); 17–20 जून (ज्येष्ठा–मूल); 27–29 जून (रेवती–अश्विनी)
- जुलाई 2027: 6–8 जुलाई (आश्लेषा–मघा); 15–17 जुलाई (ज्येष्ठा–मूल); 25–27 जुलाई (रेवती–अश्विनी)
- अगस्त 2027: 2–4 अगस्त (आश्लेषा–मघा); 11–13 अगस्त (ज्येष्ठा–मूल); 21–23 अगस्त (रेवती–अश्विनी); 30–31 अगस्त (आश्लेषा–मघा)
- सितम्बर 2027: 7–9 सितम्बर (ज्येष्ठा–मूल); 17–19 सितम्बर (रेवती–अश्विनी); 26–28 सितम्बर (आश्लेषा–मघा)
- अक्तूबर 2027: 5–7 अक्तूबर (ज्येष्ठा–मूल); 14–16 अक्तूबर (रेवती–अश्विनी); 23–25 अक्तूबर (आश्लेषा–मघा)
- नवम्बर 2027: 1–3 नवम्बर (ज्येष्ठा–मूल); 11–13 नवम्बर (रेवती–अश्विनी); 20–21 नवम्बर (आश्लेषा–मघा); 28–30 नवम्बर (ज्येष्ठा–मूल)
- दिसम्बर 2027: 8–10 दिसम्बर (रेवती–अश्विनी); 17–19 दिसम्बर (आश्लेषा–मघा); 26–28 दिसम्बर (ज्येष्ठा–मूल)
जन्म का क्षण, पंचांग की तारीख नहीं
साइट की नक्षत्र तालिका जिस परम्परा को दर्ज करती है, उसके अनुसार गंडमूल शान्ति का प्रश्न उसी जन्म के लिए उठता है जो चन्द्रमा के इन 6 नक्षत्रों में से किसी एक में रहते हुआ हो। इसलिए देखने की बात जन्म का मिनट है, तारीख नहीं। दीवार पर टँगा पंचांग हर दिन के आगे वही नक्षत्र लिखता है जो सूर्योदय पर चल रहा हो, और कोई अवधि शायद ही कभी सूर्योदयों के साथ मेल खाती है। आगे आने वाली 46 अवधियों में से 34, दिसम्बर 2027 की अनिर्णीत सुबह को छोड़कर, अपनी पहली तारीख पर सूर्योदय के बाद आरंभ होती हैं, इसलिए उस तारीख का पंचांग पिछला नक्षत्र छापता है, भले ही उस दिन बाद में हुआ जन्म अवधि के भीतर आता हो।
जुलाई 2027 की आश्लेषा–मघा अवधि यह अंतर सबसे साफ़ दिखाती है। यह 6 जुलाई को, उस दिन के सूर्योदय के बाद, 06:33 पर आरंभ होती है और 8 जुलाई को, अगले सूर्योदय से पहले, 01:55 पर समाप्त होती है; इस तरह यह 3 तारीखों को छूती है, पर नई दिल्ली का पंचांग इसे केवल 7 जुलाई पर दर्ज करता है। केवल एक सूर्योदय वाली ऐसी अवधियाँ 3 हैं: 21–23 नवम्बर 2026, 23–25 जनवरी 2027 और 6–8 जुलाई 2027। दूसरे छोर पर 3 अवधियाँ किसी सूर्योदय से पहले आरंभ होकर उसके बाद के दूसरे सूर्योदय के भी बाद समाप्त होती हैं, और इसलिए उनमें 3 सूर्योदय आते हैं: 1–3 फ़रवरी 2027, 15–17 जुलाई 2027 और 25–27 जुलाई 2027।
किसी अवधि के सिरों के पास कुछ ही मिनट बात तय करते हैं। ऊपर के क्षण मिनट तक काटे गए हैं और एक ही अयनांश पर आधारित हैं; थोड़े भिन्न अयनांश वाला पंचांग इनमें से हर क्षण को कुछ मिनट खिसका देगा। इन समयों में से किसी के पास हुए जन्म के लिए भरोसे का उत्तर दर्ज समय और स्थान पर बनी कुंडली है, जो निःशुल्क कुंडली (अंग्रेज़ी में) और नक्षत्र खोजक (अंग्रेज़ी में) दोनों देते हैं।
वृश्चिक–धनु सन्धि सबसे लंबी क्यों है
हर अवधि एक ही चाप पार करती है, 13°20′ के दो नक्षत्र, इसलिए उसकी लंबाई केवल इस पर निर्भर है कि उस समय चन्द्रमा कितनी तेज़ी से चल रहा है, और राशिचक्र में चन्द्रमा की गति स्थिर नहीं रहती। इन महीनों में यह अंतर एक जैसा बना रहता है। सभी 16 ज्येष्ठा–मूल अवधियाँ कम से कम 50 घण्टे 50 मिनट और अधिक से अधिक 53 घण्टे 58 मिनट की हैं, यानी बाकी हर अवधि से लंबी। आश्लेषा–मघा की अवधियाँ 42 घण्टे 27 मिनट से 46 घण्टे 56 मिनट तक की हैं, और रेवती–अश्विनी की 45 घण्टे 09 मिनट से 50 घण्टे 33 मिनट तक की। तो इस तालिका के कालखण्ड में चन्द्रमा वृश्चिक से धनु में जाते समय सबसे धीमा रहता है।
किसी अवधि के भीतर सन्धि लगभग बीच में पड़ती है: किसी भी पंक्ति में जल राशि वाले और अग्नि राशि वाले आधे भागों का अंतर 50 मिनट से अधिक नहीं है। एक अवधि और अगली अवधि के बीच चन्द्रमा को हमेशा 7 दूसरे नक्षत्र पार करने होते हैं, जिसमें कम से कम 6 दिन 5 घण्टे और अधिक से अधिक 7 दिन 19 घण्टे लगते हैं।
उसी जोड़े पर चन्द्रमा की वापसी
चन्द्रमा हर नाक्षत्र मास में एक बार किसी भी नक्षत्र पर लौटता है। इस तालिका में एक ही जोड़े की दो लगातार सन्धि-पारियों के बीच कम से कम 27 दिन 5 घण्टे 22 मिनट और अधिक से अधिक 27 दिन 11 घण्टे 14 मिनट का अंतर है, इसलिए उसी जोड़े की अगली पंक्ति, जो 3 पंक्तियाँ नीचे है, बताती है कि चन्द्रमा किसी जन्म के नक्षत्र में फिर कब होगा। जो परिवार शान्ति को इसी वापसी के समय पर रखते हैं, वे तारीखें वहीं से पढ़ सकते हैं; कौन-सा अनुष्ठान किया जाए और किस दिन, यह परिवार के अपने पुरोहित से पूछने का प्रश्न है। यह पृष्ठ केवल तारीखें देता है और इन अवधियों में से किसी में हुए जन्म पर कोई व्याख्या नहीं जोड़ता।
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इन 6 में से 4 नक्षत्रों पर साइट के अलग लेख हैं: अश्विनी (अंग्रेज़ी में), मघा, मूल और रेवती। सभी 27 नक्षत्रों का परिचय एक साथ 27 नक्षत्रों वाले लेख (अंग्रेज़ी में) में है, और हर नक्षत्र का सूर्योदय-दर-सूर्योदय ब्योरा पंचांग के नक्षत्र पृष्ठों पर है। इसी गणना से निकली चन्द्रमा की दूसरी मासिक यात्राएँ पंचक की सूची (अंग्रेज़ी में) और गुरु पुष्य और रवि पुष्य की तारीखों में हैं।
यही लेख अंग्रेज़ी में: Gandmool Nakshatra Dates, November 2026 to December 2027।
किसी जन्म का नक्षत्र जाँचें
तालिका अवधियाँ देती है; जन्म कुंडली किसी एक दर्ज मिनट पर चन्द्रमा का नक्षत्र देती है। जन्म कुंडली रिपोर्ट इसे जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकालती है, और साथ में लग्न, हर ग्रह की राशि और भाव, तथा दशा-क्रम भी। यह कुंडली है, उसकी व्याख्या नहीं।
जन्म कुंडली रिपोर्ट लें (अंग्रेज़ी में)