पंचांग
भारत का राष्ट्रीय पंचांग: आज की शक तारीख और महीने
प्रकाशित 2026-10-29 | Live Pandit Ji
भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर में गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026 की तारीख 7 कार्तिक 1948 है: शक संवत 1948 के कार्तिक मास का 7वाँ दिन। विकिपीडिया के “Indian national calendar” लेख के अनुसार यही कैलेंडर भारत के राजपत्र (गज़ट) में ग्रेगोरियन तारीख के साथ छपता है, और आकाशवाणी तथा भारत सरकार की विज्ञप्तियों में प्रयोग होता है। यह स्थिर महीनों वाला सौर कैलेंडर है, इसलिए हर शक तारीख हर साल उसी ग्रेगोरियन तारीख पर पड़ती है; अपवाद केवल ग्रेगोरियन अधिवर्ष के आसपास के दिन हैं: 10 फाल्गुन से चैत्र के अन्त तक की तारीखें तब एक दिन पहले पड़ती हैं।
पंचांग वाला शक संवत इससे अलग चीज़ है। दोनों एक ही युग से गिने जाते हैं, पर पंचांग का वर्ष चान्द्र-सौर है और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बदलता है, जबकि राष्ट्रीय कैलेंडर 22 मार्च को बदलता है। इसके महीनों के नाम, चैत्र से फाल्गुन तक, पंचांग से लिए गए हैं, पर ये चन्द्रमा के साथ नहीं चलते; इसलिए सरकारी कार्तिक और चान्द्र कार्तिक प्रायः एक ही दिनों में नहीं पड़ते। यह पृष्ठ कैलेंडर बनाने वाली समिति के नियम, किसी भी तारीख को बदलने का हाथ से किया जाने वाला तरीका, और शक 1948 से 1950 तक का हर महीना सूर्य और चन्द्रमा के सामने रखकर देता है।
बारह महीने और हर महीने की शुरुआत
नियम Report of the Calendar Reform Committee (पंचांग सुधार समिति की रिपोर्ट) में हैं, जिसे वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), नई दिल्ली ने 1955 में प्रकाशित किया। सिविल कैलेंडर के लिए उसकी सिफ़ारिशें ये हैं: शक संवत का प्रयोग हो; वर्ष वसन्त विषुव के अगले दिन से शुरू हो; चैत्र 30 दिन का हो, अधिवर्ष में 31 का; उसके बाद के पाँच महीने, वैशाख से भाद्र तक, 31-31 दिन के हों; और अन्तिम छह, आश्विन से फाल्गुन तक, 30-30 दिन के। इन लम्बाइयों से ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ जो “स्थायी मेल” बनता है, उसे रिपोर्ट इस तरह छापती है:
| क्रम | महीना | दिन | पहला दिन | अन्तिम दिन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | चैत्र | 30 (अधिवर्ष में 31) | 22 मार्च (अधिवर्ष में 21 मार्च) | 20 अप्रैल |
| 2 | वैशाख | 31 | 21 अप्रैल | 21 मई |
| 3 | ज्येष्ठ | 31 | 22 मई | 21 जून |
| 4 | आषाढ़ | 31 | 22 जून | 22 जुलाई |
| 5 | श्रावण | 31 | 23 जुलाई | 22 अगस्त |
| 6 | भाद्र | 31 | 23 अगस्त | 22 सितम्बर |
| 7 | आश्विन | 30 | 23 सितम्बर | 22 अक्तूबर |
| 8 | कार्तिक | 30 | 23 अक्तूबर | 21 नवम्बर |
| 9 | अग्रहायण | 30 | 22 नवम्बर | 21 दिसम्बर |
| 10 | पौष | 30 | 22 दिसम्बर | 20 जनवरी |
| 11 | माघ | 30 | 21 जनवरी | 19 फ़रवरी |
| 12 | फाल्गुन | 30 | 20 फ़रवरी | 21 मार्च (अधिवर्ष से पहले 20 मार्च) |
केवल चैत्र का पहला दिन खिसकता है। अधिवर्ष में वह एक दिन पहले, 21 मार्च को, शुरू होता है और 31 दिन का होता है, ताकि वैशाख फिर भी 21 अप्रैल से ही शुरू हो। बाकी हर महीने का पहला दिन हर साल एक ही रहता है। ग्रेगोरियन अधिवर्ष की 29 फ़रवरी उस शक वर्ष के फाल्गुन में पड़ता है जिसके बाद अधिवर्ष आता है; 2028 में वह 10 फाल्गुन 1949 है। विकिपीडिया के अनुसार यह कैलेंडर 1 चैत्र 1879 से प्रयोग में आया, जो 22 मार्च 1957 था।
शक तारीख कैसे निकालें
किसी भी ग्रेगोरियन तारीख की शक तारीख दो कदमों में निकलती है।
- वर्ष: 22 मार्च (अधिवर्ष में 21 मार्च) से 31 दिसम्बर तक ग्रेगोरियन वर्ष में से 78 घटाएँ। 1 जनवरी से 1 चैत्र के एक दिन पहले तक 79 घटाएँ।
- महीना और दिन: ऊपर की तालिका में वह महीना देखें जिसका पहला दिन उस तारीख पर या उससे पहले पड़ता है, और गिनें। पहले दिन से जितने दिन बीते हों, तारीख उससे एक अधिक होती है।
जैसे 26 जनवरी 2027 उस महीने में है जो पाँच दिन पहले, 21 जनवरी को, शुरू हुआ था, इसलिए यह 6 माघ है; यह 1 चैत्र से पहले है, इसलिए वर्ष 2027 − 79 = 1948 है। उल्टी दिशा में, शक से ग्रेगोरियन के लिए, महीने के पहले दिन में तारीख से एक कम दिन जोड़ें, और वर्ष में 78 जोड़ें; 11 पौष से फाल्गुन के अन्त तक के दिन अगले ग्रेगोरियन वर्ष में पड़ते हैं, इसलिए उनके लिए 79 जोड़ें। नीचे की हर पंक्ति इसी नियम से निकाली गई है।
| दिन | ग्रेगोरियन | राष्ट्रीय कैलेंडर (शक) |
|---|---|---|
| आज, इस पृष्ठ के प्रकाशन का दिन | गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026 | 7 कार्तिक 1948 |
| दिवाली 2026 (साइट की पर्व-तालिका) | रविवार, 8 नवम्बर 2026 | 17 कार्तिक 1948 |
| गणतंत्र दिवस 2027 | मंगलवार, 26 जनवरी 2027 | 6 माघ 1948 |
| होली 2027 (साइट की पर्व-तालिका) | सोमवार, 22 मार्च 2027 | 1 चैत्र 1949 |
| स्वतंत्रता दिवस 2027 | रविवार, 15 अगस्त 2027 | 24 श्रावण 1949 |
| गांधी जयंती 2027 | शनिवार, 2 अक्तूबर 2027 | 10 आश्विन 1949 |
अधिवर्ष का नियम
रिपोर्ट का अधिवर्ष-नियम ग्रेगोरियन नियम ही है, युग के अन्तर से खिसकाया हुआ: शक वर्ष में 78 जोड़ें, और यदि योग ग्रेगोरियन अधिवर्ष हो (4 से विभाज्य, और शताब्दी वर्ष केवल तब जब 400 से विभाज्य हो), तो शक वर्ष 366 दिन का होगा। रिपोर्ट के अपने उदाहरणों में 1878, 1882 और 1922 शक अधिवर्ष हैं, अन्तिम इसलिए कि 2000 अधिवर्ष था, और 2022 शक साधारण वर्ष है क्योंकि 2100 अधिवर्ष नहीं है। इस पृष्ठ के तीन वर्षों में केवल 1950 अधिवर्ष है: वह 21 मार्च 2028 को शुरू होता है और उसका चैत्र 31 दिन का है।
शक 1948 से 1950 तक हर महीना
तीसरे स्तम्भ में वह तारीख है जब सूर्य ने मेल खाती सायन राशि में प्रवेश किया, चैत्र के लिए मेष से फाल्गुन के लिए मीन तक, भारतीय समय में; यह साइट की DE421 पर बनी, राशियों के 10-10 अंश वाले खंडों (डेकन) की तालिका से है, जो 2028 के अन्त तक जाती है। अन्तिम स्तम्भ में सरकारी महीने के पहले दिन चल रहा चान्द्र मास है, अमान्त गणना (अमावस्या से अमावस्या) में, और जहाँ पूर्णिमान्त नाम अलग है वहाँ वह भी। जिस पहले दिन अमावस्या या पूर्णिमा पड़ती है, वहाँ महीने का नाम न देकर वही लिखा है।
| महीना | ग्रेगोरियन तारीखें | सूर्य का सायन राशि-प्रवेश | पहले दिन का चान्द्र मास |
|---|---|---|---|
| चैत्र 1948 | 22 मार्च 2026 – 20 अप्रैल (30) | मेष, 20 मार्च | चैत्र, शुक्ल |
| वैशाख 1948 | 21 अप्रैल 2026 – 21 मई (31) | वृषभ, 20 अप्रैल | वैशाख, शुक्ल |
| ज्येष्ठ 1948 | 22 मई 2026 – 21 जून (31) | मिथुन, 21 मई | अधिक ज्येष्ठ, शुक्ल |
| आषाढ़ 1948 | 22 जून 2026 – 22 जुलाई (31) | कर्क, 21 जून | ज्येष्ठ, शुक्ल |
| श्रावण 1948 | 23 जुलाई 2026 – 22 अगस्त (31) | सिंह, 23 जुलाई | आषाढ़, शुक्ल |
| भाद्र 1948 | 23 अगस्त 2026 – 22 सितम्बर (31) | कन्या, 23 अगस्त | श्रावण, शुक्ल |
| आश्विन 1948 | 23 सितम्बर 2026 – 22 अक्तूबर (30) | तुला, 23 सितम्बर | भाद्रपद, शुक्ल |
| कार्तिक 1948 | 23 अक्तूबर 2026 – 21 नवम्बर (30) | वृश्चिक, 23 अक्तूबर | आश्विन, शुक्ल |
| अग्रहायण 1948 | 22 नवम्बर 2026 – 21 दिसम्बर (30) | धनु, 22 नवम्बर | कार्तिक, शुक्ल |
| पौष 1948 | 22 दिसम्बर 2026 – 20 जनवरी 2027 (30) | मकर, 22 दिसम्बर | मार्गशीर्ष, शुक्ल |
| माघ 1948 | 21 जनवरी 2027 – 19 फ़रवरी (30) | कुंभ, 20 जनवरी | पौष, शुक्ल |
| फाल्गुन 1948 | 20 फ़रवरी 2027 – 21 मार्च (30) | मीन, 19 फ़रवरी | माघ, शुक्ल |
| चैत्र 1949 | 22 मार्च 2027 – 20 अप्रैल (30) | मेष, 21 मार्च | उस दिन पूर्णिमा |
| वैशाख 1949 | 21 अप्रैल 2027 – 21 मई (31) | वृषभ, 20 अप्रैल | उस दिन पूर्णिमा |
| ज्येष्ठ 1949 | 22 मई 2027 – 21 जून (31) | मिथुन, 21 मई | वैशाख, कृष्ण (पूर्णिमान्त ज्येष्ठ) |
| आषाढ़ 1949 | 22 जून 2027 – 22 जुलाई (31) | कर्क, 21 जून | ज्येष्ठ, कृष्ण (पूर्णिमान्त आषाढ़) |
| श्रावण 1949 | 23 जुलाई 2027 – 22 अगस्त (31) | सिंह, 23 जुलाई | आषाढ़, कृष्ण (पूर्णिमान्त श्रावण) |
| भाद्र 1949 | 23 अगस्त 2027 – 22 सितम्बर (31) | कन्या, 23 अगस्त | श्रावण, कृष्ण (पूर्णिमान्त भाद्रपद) |
| आश्विन 1949 | 23 सितम्बर 2027 – 22 अक्तूबर (30) | तुला, 23 सितम्बर | भाद्रपद, कृष्ण (पूर्णिमान्त आश्विन) |
| कार्तिक 1949 | 23 अक्तूबर 2027 – 21 नवम्बर (30) | वृश्चिक, 23 अक्तूबर | आश्विन, कृष्ण (पूर्णिमान्त कार्तिक) |
| अग्रहायण 1949 | 22 नवम्बर 2027 – 21 दिसम्बर (30) | धनु, 22 नवम्बर | कार्तिक, कृष्ण (पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष) |
| पौष 1949 | 22 दिसम्बर 2027 – 20 जनवरी 2028 (30) | मकर, 22 दिसम्बर | मार्गशीर्ष, कृष्ण (पूर्णिमान्त पौष) |
| माघ 1949 | 21 जनवरी 2028 – 19 फ़रवरी (30) | कुंभ, 20 जनवरी | पौष, कृष्ण (पूर्णिमान्त माघ) |
| फाल्गुन 1949 | 20 फ़रवरी 2028 – 20 मार्च (30) | मीन, 19 फ़रवरी | माघ, कृष्ण (पूर्णिमान्त फाल्गुन) |
| चैत्र 1950 | 21 मार्च 2028 – 20 अप्रैल (31) | मेष, 20 मार्च | फाल्गुन, कृष्ण (पूर्णिमान्त चैत्र) |
| वैशाख 1950 | 21 अप्रैल 2028 – 21 मई (31) | वृषभ, 19 अप्रैल | चैत्र, कृष्ण (पूर्णिमान्त वैशाख) |
| ज्येष्ठ 1950 | 22 मई 2028 – 21 जून (31) | मिथुन, 20 मई | वैशाख, कृष्ण (पूर्णिमान्त ज्येष्ठ) |
| आषाढ़ 1950 | 22 जून 2028 – 22 जुलाई (31) | कर्क, 21 जून | उस दिन अमावस्या |
| श्रावण 1950 | 23 जुलाई 2028 – 22 अगस्त (31) | सिंह, 22 जुलाई | श्रावण, शुक्ल |
| भाद्र 1950 | 23 अगस्त 2028 – 22 सितम्बर (31) | कन्या, 22 अगस्त | भाद्रपद, शुक्ल |
| आश्विन 1950 | 23 सितम्बर 2028 – 22 अक्तूबर (30) | तुला, 22 सितम्बर | आश्विन, शुक्ल |
| कार्तिक 1950 | 23 अक्तूबर 2028 – 21 नवम्बर (30) | वृश्चिक, 23 अक्तूबर | कार्तिक, शुक्ल |
| अग्रहायण 1950 | 22 नवम्बर 2028 – 21 दिसम्बर (30) | धनु, 22 नवम्बर | मार्गशीर्ष, शुक्ल |
| पौष 1950 | 22 दिसम्बर 2028 – 20 जनवरी 2029 (30) | मकर, 21 दिसम्बर | तालिकाओं की सीमा से आगे |
| माघ 1950 | 21 जनवरी 2029 – 19 फ़रवरी (30) | तालिका की सीमा से आगे | तालिकाओं की सीमा से आगे |
| फाल्गुन 1950 | 20 फ़रवरी 2029 – 21 मार्च (30) | तालिका की सीमा से आगे | तालिकाओं की सीमा से आगे |
क्या 1 चैत्र विषुव के दिन पड़ता है?
उसी दिन नहीं: समिति ने नववर्ष वसन्त विषुव के अगले दिन रखा, और स्थिर 22 मार्च (अधिवर्ष में 21 मार्च) इस नियम का केवल निकट रूप है। साइट की तालिका में सूर्य ने भारतीय समय में 20 मार्च 2026, 21 मार्च 2027 और 20 मार्च 2028 को विषुव पार किया, और 1 चैत्र क्रमशः दो दिन, एक दिन और एक दिन बाद आया। आगे के महीने भी सूर्य की सायन राशियों के साथ इसी ढीले ढंग से चलते हैं। चैत्र 1948 से पौष 1950 तक के जिन 34 सरकारी महीनों तक डेकन-तालिका पहुँचती है, उनमें से 14 उसी तारीख को शुरू होते हैं जिस दिन सूर्य राशि में प्रवेश करता है, 17 एक दिन बाद और 3 दो दिन बाद; कोई भी प्रवेश से पहले शुरू नहीं होता, और कोई भी दो दिन से अधिक बाद नहीं।
महीने सूर्य के साथ ठीक-ठीक इसलिए नहीं चल पाते कि उनके पहले दिन स्थिर हैं जबकि सूर्य के प्रवेश नहीं: ग्रेगोरियन अधिवर्ष-चक्र हर प्रवेश को हर साल लगभग छह घंटे आगे और हर अधिवर्ष के बाद लगभग एक दिन पीछे करता है, और सूर्य उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में एक राशि गर्मियों की तुलना में जल्दी पार करता है। रिपोर्ट की महीनों की लम्बाई इसी असमानता को पूरे दिनों में पकड़ती है। 31 दिन वाले महीने वैशाख से भाद्र तक के हैं, जो वर्ष के बीच के उस भाग में पड़ते हैं जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है और सूर्य राशिचक्र पर सबसे धीमा चलता है; ये पाँच महीने चैत्र के साथ वर्ष का लम्बा आधा भाग बनाते हैं। पृथ्वी के सूर्य से सबसे निकट और सबसे दूर होने की तारीखें उपसौर और अपसौर पृष्ठ पर हैं।
नाम पंचांग वाले, महीने अलग
तालिका के जिन 30 सरकारी महीनों के पहले दिन न अमावस्या है न पूर्णिमा, उनमें से केवल 7 उसी नाम के अमान्त चान्द्र मास के भीतर शुरू होते हैं, और 20 उसी नाम के पूर्णिमान्त मास के भीतर। कार्तिक से यह बात साफ़ दिखती है। 23 अक्तूबर 2026 को, सरकारी कार्तिक 1948 के पहले दिन, पंचांग में अमान्त आश्विन का शुक्ल पक्ष चल रहा था, यानी दोनों गणनाओं से एक महीना पीछे। 23 अक्तूबर 2027 को आश्विन का कृष्ण पक्ष था, जिसे पूर्णिमान्त पंचांग कार्तिक कह चुका होता है। 23 अक्तूबर 2028 को स्वयं चान्द्र कार्तिक चल रहा था।
इसका कारण चान्द्र वर्ष की लम्बाई है। बारह चान्द्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, इसलिए चान्द्र महीने हर साल स्थिर सरकारी तारीखों की तुलना में पहले शुरू होने लगते हैं, जब तक कोई अधिक मास उन्हें फिर पीछे न धकेल दे। तालिका में ऐसा एक मोड़ दिखता है: शक 1948 का सरकारी ज्येष्ठ 2026 के अधिक ज्येष्ठ में शुरू हुआ, और उसके अगले सरकारी महीने से चान्द्र नाम एक महीना पीछे चलने लगे। 2028 तक यह खिसकाव उन्हें फिर बराबर ले आता है (शक 1950 के श्रावण, भाद्र, आश्विन, कार्तिक, अग्रहायण सब अपने ही नाम के चान्द्र मास में शुरू होते हैं), और अगला अधिक मास, 15 मार्च 2029 से शुरू होने वाला अधिक चैत्र, जो अधिक मास पृष्ठ पर है, चक्र फिर शुरू करता है। हर चान्द्र मास कितने दिन का होता है, यह चन्द्र मास की अवधि वाले पृष्ठ पर है। चान्द्र पर्व चान्द्र मासों की तिथियों से चलते हैं, सरकारी महीने से नहीं, इसलिए उनमें से कोई भी स्थिर शक तारीख पर नहीं पड़ता।
शक संवत के दो नववर्ष
पंचांग का शक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बदलता है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादि के रूप में मनाया जाता है, और साइट का विक्रम संवत पृष्ठ इस मोड़ की तारीख गणना से बनी पर्व-तालिकाओं से देता है। राष्ट्रीय कैलेंडर 22 मार्च को, या अधिवर्ष में 21 मार्च को, बदलता है। दोनों शायद ही कभी एक दिन पड़ते हैं:
| शक वर्ष | राष्ट्रीय कैलेंडर, 1 चैत्र | पंचांग, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा | अन्तर (दिन) |
|---|---|---|---|
| 1948 | रविवार, 22 मार्च 2026 | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 3 (पंचांग पहले) |
| 1949 | सोमवार, 22 मार्च 2027 | बुधवार, 7 अप्रैल 2027 | 16 (राष्ट्रीय कैलेंडर पहले) |
| 1950 | मंगलवार, 21 मार्च 2028 | सोमवार, 27 मार्च 2028 | 6 (राष्ट्रीय कैलेंडर पहले) |
2026 में पंचांग का वर्ष 1948 सरकारी वर्ष से तीन दिन पहले शुरू हुआ। 2027 में क्रम उलट जाता है और अन्तर तीनों वर्षों में सबसे बड़ा है: 22 मार्च से 6 अप्रैल 2027 तक राष्ट्रीय कैलेंडर 1949 दिखाता है जबकि पंचांग अभी 1948 में है। उस वसन्त का सरकारी नववर्ष होली के दिन, 22 मार्च 2027 को, होलिका दहन की अगली सुबह पड़ता है। रिपोर्ट लिखती है कि चैत्रादि चान्द्र वर्ष 15 मार्च से 13 अप्रैल के बीच कभी भी शुरू होता है, और यहाँ के तीनों वर्ष इसी सीमा के भीतर हैं।
सरकारी महीनों से बँधी छह ऋतुएँ
यही रिपोर्ट छह ऋतुओं को सरकारी महीनों के जोड़ों से बाँधती है, इसलिए इस कैलेंडर में हर ऋतु की ग्रेगोरियन तारीखें स्थिर हैं:
- ग्रीष्म: वैशाख और ज्येष्ठ, 21 अप्रैल से 21 जून तक
- वर्षा: आषाढ़ और श्रावण, 22 जून से 22 अगस्त तक
- शरद: भाद्र और आश्विन, 23 अगस्त से 22 अक्तूबर तक
- हेमंत: कार्तिक और अग्रहायण, 23 अक्तूबर से 21 दिसम्बर तक
- शिशिर: पौष और माघ, 22 दिसम्बर से 19 फ़रवरी तक
- वसंत: फाल्गुन और चैत्र, 20 फ़रवरी से 20 अप्रैल तक
यह वह जोड़ी नहीं है जो अधिकतर लोग सीखते हैं, जिसमें वसंत चान्द्र चैत्र और वैशाख है। यह सायन गणना के अधिक निकट है, जिसमें शिशिर दिसम्बर के अयनान्त से शुरू होती है; छह ऋतुओं वाला पृष्ठ चान्द्र, निरयण और सायन, तीनों गणनाएँ साथ रखता है।
इसे किसने बनाया
समिति ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अधीन काम किया और उसके अध्यक्ष खगोल-भौतिकविद मेघनाद साहा थे; विकिपीडिया अन्य सदस्यों के नाम ए. सी. बनर्जी, के. एल. दफ़्तरी, जे. एस. करंदीकर, गोरख प्रसाद, आर. वी. वैद्य और एन. सी. लाहिड़ी बताता है। विकिपीडिया के विवरण के अनुसार समिति ने देश के अलग-अलग भागों में चल रहे लगभग तीस कैलेंडरों का अध्ययन किया, और रिपोर्ट की अन्तिम सिफ़ारिश यह थी कि एकीकृत राष्ट्रीय कैलेंडर सभी राज्यों में सिविल कामों के लिए प्रयोग हो। रिपोर्ट ने एक सुधरे हुए धार्मिक कैलेंडर के नियम भी सुझाए थे; विकिपीडिया के अनुसार यह भाग स्वीकार नहीं हुआ, और सरकार के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांगों के बावजूद सिविल कैलेंडर सरकारी दफ़्तरों के बाहर कम ही अपनाया गया।
“राष्ट्रीय पंचांग” खोजने पर दो अर्थ मिलते हैं: स्वयं राष्ट्रीय कैलेंडर, और इसी नाम का वार्षिक पंचांग, जिसे विकिपीडिया भारत मौसम विज्ञान विभाग के पोज़िशनल एस्ट्रोनॉमी सेंटर के प्रकाशनों में गिनाता है।
किसी एक दिन की तिथि और नक्षत्र दैनिक पंचांग नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए छापता है, और साठ वर्षों के उस चक्र के नाम और क्रम, जिसे कुछ क्षेत्र संख्या की जगह प्रयोग करते हैं, संवत्सर पृष्ठ पर हैं। अंग्रेज़ी में: Indian National Calendar: Today’s Saka Date and Months।
संक्षेप में
- यह क्या है: भारत का सिविल कैलेंडर, सौर, स्थिर महीनों वाला, शक संवत में गिना जाने वाला
- कब से प्रयोग में: 1 चैत्र 1879, यानी 22 मार्च 1957 से
- पहला और अन्तिम महीना: चैत्र और फाल्गुन; पाँचवाँ महीना श्रावण है
- वर्ष संख्या: 1 चैत्र से ग्रेगोरियन वर्ष घटा 78, उससे पहले घटा 79; 29 अक्तूबर 2026 को 7 कार्तिक 1948
- अधिवर्ष: जब शक + 78 ग्रेगोरियन अधिवर्ष हो; तब चैत्र 21 मार्च से शुरू होकर 31 दिन का होता है
- पंचांग से अलग: चान्द्र-सौर शक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बदलता है, जैसे 7 अप्रैल 2027 को, जबकि सरकारी वर्ष 22 मार्च 2027 को
किसी दिन की तिथि और नक्षत्र देखें
दैनिक पंचांग 2026 और 2027 के लिए नई दिल्ली के सूर्योदय पर तिथि, नक्षत्र, योग और करण देता है। यह कैलेंडर बताता है, कोई भविष्यवाणी नहीं करता।
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