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वृषभ राशिफल

वृषभ राशि (Taurus) के लिए आज का पंचांग और चन्द्र बल — दोनों गणना किए गए, किसी अनुमान से नहीं। नीचे आज की तिथि और नक्षत्र, वृषभ से चन्द्र की भाव-स्थिति, 20262027 के सभी चन्द्राष्टम दिन, इस राशि के नक्षत्र और पद, और राशि स्वामी शुक्र की वर्तमान स्थिति दी गई है।

स्वामीशुक्रतत्त्वपृथ्वी तत्त्वस्वभावस्थिरसायन20 अप्रैल – 20 मईनिरयन15 मई – 14 जून

सायन तिथियाँ वे हैं जो प्रचलित हैं; वैदिक ज्योतिष निरयन है, और उसकी गणना दूसरी पंक्ति से होती है। दोनों दिए गए हैं क्योंकि पहचान एक से होती है और गणना दूसरी से।

आज का पंचांग · शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

पूर्णिमा

चन्द्र शतभिषा नक्षत्र में · अतिगण्ड योग · बव करण · शुक्ल पक्ष

सूर्योदय
05:57
राहु काल
10:45-12:22
अभिजित मुहूर्त
11:56-12:47

ये समय नई दिल्ली के लिए JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किए गए हैं। सूर्योदय, राहु काल और अभिजित आपके शहर के अनुसार बदलते हैं — पंचांग टूल किसी भी तिथि और शहर के लिए इन्हें निकाल देता है।

चन्द्र बल

आज चन्द्र वृषभ से किस भाव में है

दसवाँ भावशुभ

आज सूर्योदय के समय चन्द्र कुम्भ राशि में 8.6° पर है, जो वृषभ से गिनने पर दसवाँ भाव है — कर्म भाव, अर्थात् कर्म, आजीविका और प्रतिष्ठा

चन्द्र बल यह बताता है कि आज कोई काम आरम्भ करना चाहिए या नहीं — यह नहीं कि उसका फल क्या होगा। और यह राशि के आधार पर है, आपकी जन्म कुंडली के आधार पर नहीं। यह कोई प्रतिशत नहीं है, और जान-बूझकर नहीं है: बारह भावों में छह शुभ हैं, इसलिए किसी भी राशि के लगभग आधे दिन शुभ श्रेणी में आएँगे — इसे “आज का दिन 82% शुभ” बना देना गणना नहीं, दिखावा होता।

बारह भाव

वृषभ से चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ

गिनती अंकगणित है — चन्द्र की राशि में से अपनी राशि घटा दें। भावों का शुभ, मध्यम और त्याज्य में बाँटना मुहूर्त की परम्परा है, और उसे परम्परा कहकर ही दिया गया है। अन्तिम स्तम्भ बताता है कि 2026-01-01 से 2027-12-31 तक के 730 दिनों में चन्द्र सूर्योदय के समय वास्तव में कितनी बार उस राशि में था।

वृषभ राशि से गिने गए बारह भाव, उनका चन्द्र बल वर्ग और गणना में मिले सूर्योदय
भावराशिक्या दर्शाता हैवर्गसूर्योदय
पहलावृषभतनुशरीर और स्वयंशुभ55
दूसरामिथुनधनधन, वाणी और परिवारमध्यम56
तीसराकर्कसहजपराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँशुभ57
चौथासिंहबन्धुघर, माता और सुखत्याज्य58
पाँचवाँकन्यापुत्रसन्तान, विद्या और सृजनमध्यम61
छठातुलाशत्रुप्रतिस्पर्धा, ऋण और रोगशुभ65
सातवाँवृश्चिककलत्रसाझेदारी, जीवनसाथी और व्यापारशुभ66
आठवाँधनुरन्ध्रउपद्रव, गुप्त और आयुत्याज्य · चन्द्राष्टम67
नौवाँमकरभाग्यभाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँमध्यम68
दसवाँकुम्भकर्मकर्म, आजीविका और प्रतिष्ठाशुभ62
ग्यारहवाँमीनलाभलाभ, आय और सम्पर्कशुभ58
बारहवाँमेषव्ययव्यय, त्याग और दूर देशत्याज्य57

दिनों की संख्या बराबर नहीं है, और उसका कारण राशियाँ नहीं हैं: चन्द्र की कक्षा वृत्त नहीं दीर्घवृत्त है, इसलिए वह एक दिन में लगभग 11.8° से 15.3° तक चलता है — मन्द गति पर किसी राशि में अधिक ठहरता है, तेज़ गति पर जल्दी निकल जाता है। 20262027 में चन्द्र का अपभू (apogee) जहाँ रहा, उसी से यह अन्तर बना। अपभू 8.85 वर्ष में पूरी राशिचक्र घूम जाता है, इसलिए पाँच वर्ष बाद यही गणना अधिक दिन किसी और राशि में दिखाएगी। दो वर्ष की गिनती को किसी राशि का स्थायी गुण मानना इफ़ेमेरिस को भाग्य समझ लेना है।

चन्द्राष्टम

वृषभ के सभी चन्द्राष्टम दिन, 20262027

वृषभ के लिए चन्द्राष्टम तब है जब चन्द्र धनु में हो। गणना में यह 27 बार आया — 14 बार दो सूर्योदय तक और 13 बार तीन तक, कुल 67 सूर्योदय। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं: चन्द्र का प्रवेश और निर्गम प्रायः रात में होता है, इसलिए दो सूर्योदय की अवधि ठीक दो दिन नहीं, दो दिन से कुछ अधिक होती है। पंचांग की परम्परा यही है।

वृषभ राशि के चन्द्राष्टम की सभी अवधियाँ, तिथि सहित
क्रमअवधिसूर्योदय
116–18 जनवरी 20263
213–14 फ़रवरी 20262
312–14 मार्च 20263
48–10 अप्रैल 20263
56–7 मई 20262
62–4 जून 20263
729 जून – 1 जुलाई 20263
827–28 जुलाई 20262
923–24 अगस्त 20262
1019–21 सितम्बर 20263
1117–18 अक्तूबर 20262
1213–14 नवम्बर 20262
1310–12 दिसम्बर 20263
146–8 जनवरी 20273
153–4 फ़रवरी 20272
162–3 मार्च 20272
1729–31 मार्च 20273
1826–27 अप्रैल 20272
1923–24 मई 20272
2019–21 जून 20273
2117–18 जुलाई 20272
2213–14 अगस्त 20272
239–11 सितम्बर 20273
246–8 अक्तूबर 20273
253–4 नवम्बर 20272
2630 नवम्बर – 1 दिसम्बर 20272
2727–29 दिसम्बर 20273

पहचान

किसी भी पंचांग में वृषभ का चन्द्राष्टम पहचानना

छपे हुए पंचांग में चन्द्र की राशि प्रायः नहीं होती, नक्षत्र होता है। दोनों एक ही बात नहीं हैं: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर बँटे हैं, इसलिए लगभग एक-तिहाई दिनों में नक्षत्र जान लेने पर भी राशि तय नहीं होती। धनु में ये नक्षत्र आते हैं —

धनु राशि के नक्षत्र और वे वृषभ का चन्द्राष्टम तय करते हैं या नहीं
नक्षत्रपदक्या यह अकेले तय करता है?
मूलMoola1, 2, 3, 4हाँ। पंचांग में मूल लिखा हो तो चन्द्र धनु में है और वृषभ के लिए यह चन्द्राष्टम है।
पूर्वाषाढ़ाPurva Ashadha1, 2, 3, 4हाँ। पंचांग में पूर्वाषाढ़ा लिखा हो तो चन्द्र धनु में है और वृषभ के लिए यह चन्द्राष्टम है।
उत्तराषाढ़ाUttara Ashadha1नहीं। उत्तराषाढ़ा के केवल 1 पद धनु में आता है — शेष मकर में, इसलिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ेगा।

अधिकांश प्रकाशित पंचांग नक्षत्र के साथ पद या चन्द्र का अंश भी देते हैं, और दोनों में से कोई भी बात तय कर देता है। यदि यह देखना ही न हो, तो ऊपर की तालिका में 2026-01-01 से 2027-12-31 तक की सभी 27 अवधियाँ तिथि सहित दी हुई हैं।

तारा बल

तारा बल, और एक राशि का पृष्ठ यहाँ तक ही क्यों जा सकता है

मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता। उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं: चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है — हर तारा तीन नक्षत्रों के पास होता है, एक के पास नहीं। इनमें तीन सर्वत्र त्याज्य माने गए हैं: विपत्, प्रत्यरि, वध

और यहीं एक राशि के पृष्ठ की सीमा है, जिसे छिपाने के बजाय कह देना ठीक है। एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए राशि जान लेने पर जन्म-नक्षत्र तय नहीं होता — वृषभ में चन्द्र वाले जातक का जन्म-नक्षत्र कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा में से कोई एक हो सकता है, और तीनों के तारा चक्र अलग हैं। चन्द्र बल राशि से ही निकल आता है, इसीलिए यह पृष्ठ उसकी गणना कर देता है। तारा बल नहीं निकलता, इसलिए नीचे हर सम्भावित जन्म-नक्षत्र का चक्र अलग स्तम्भ में दिया है।

वृषभ राशि के प्रत्येक सम्भावित जन्म-नक्षत्र के लिए नौ तारा और उनके नक्षत्र
तारावर्गजन्म-नक्षत्र कृत्तिकापद 2, 3, 4जन्म-नक्षत्र रोहिणीजन्म-नक्षत्र मृगशिरापद 1, 2
1. जन्ममिश्रकृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ारोहिणी, हस्त, श्रवणमृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
2. सम्पत्शुभरोहिणी, हस्त, श्रवणमृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठाआर्द्रा, स्वाती, शतभिषा
3. विपत्त्याज्यमृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठाआर्द्रा, स्वाती, शतभिषापुनर्वसु, विशाखा, पूर्व भाद्रपद
4. क्षेमशुभआर्द्रा, स्वाती, शतभिषापुनर्वसु, विशाखा, पूर्व भाद्रपदपुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपद
5. प्रत्यरित्याज्यपुनर्वसु, विशाखा, पूर्व भाद्रपदपुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपदआश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
6. साधकशुभपुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपदआश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवतीमघा, मूल, अश्विनी
7. वधत्याज्यआश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवतीमघा, मूल, अश्विनीपूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, भरणी
8. मित्रशुभमघा, मूल, अश्विनीपूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, भरणीउत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, कृत्तिका
9. अति-मित्रशुभपूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, भरणीउत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, कृत्तिकाहस्त, श्रवण, रोहिणी

अपना जन्म-नक्षत्र एक बार जान लें — मुफ़्त कुंडली उसे पद के साथ बता देती है — और इनमें से एक स्तम्भ जीवन भर आपका रहेगा। बारह भावों में छह चन्द्र बल की पहली छाननी पार करते हैं और नौ तारा में छह दूसरी में त्याज्य नहीं हैं, इसलिए दोनों पार करने वाला दिन लगभग एक-तिहाई होता है — छाननी असली है, और फिर भी भविष्यवाणी नहीं। तिथि, करण, योग और प्रश्न के समय का लग्न इसके बाद आते हैं।

राशि स्वामी

शुक्र कहाँ है, और वह इतना धीरे क्यों चलता है

वृषभ शुक्र की राशि है, इसलिए वृषभ का हर पाठ आधा शुक्र का पाठ है। यही वह आधा हिस्सा है जो चन्द्र नहीं देता — और यही कारण है कि “आज” उतना बड़ा प्रश्न नहीं है जितना लगता है, क्योंकि शुक्र एक राशि में हफ़्तों से वर्षों तक रहता है जबकि चन्द्र सवा दो दिन।

प्रश्न

वृषभ राशिफल — सामान्य प्रश्न

वृषभ राशि का चन्द्राष्टम कब होता है?+

जब गोचर का चन्द्र वृषभ से आठवीं राशि, अर्थात् धनु में हो। यह हर चन्द्र मास में लगभग ढाई दिन के लिए आता है — इस पृष्ठ की 2026-01-01 से 2027-12-31 तक की गणना में 27 बार, कुल 67 सूर्योदय। 14 बार यह दो सूर्योदय तक रहा और 13 बार तीन तक। सभी तिथियाँ इस पृष्ठ की तालिका में दी गई हैं।

यह राशिफल सूर्य राशि से पढ़ें या चन्द्र राशि से?+

चन्द्र राशि से। वैदिक राशिफल जन्म के समय चन्द्र जिस राशि में था, उसी के लिए लिखा जाता है — और इस पृष्ठ की चन्द्र बल गणना तो सूर्य राशि से पढ़ने पर निरर्थक ही हो जाती है, क्योंकि वह गिनती जन्म के चन्द्र से ही की जाती है। मुफ़्त कुंडली से अपनी चन्द्र राशि और नक्षत्र एक बार जान लेना ठीक रहता है।

वृषभ के लिए लगभग आधे दिन शुभ क्यों निकलते हैं?+

क्योंकि बारह भावों में से छह — पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ — शुभ माने जाते हैं। वृषभ से ये वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन राशियाँ हैं, और गणना में इनमें 730 दिनों के 363 सूर्योदय पड़े। यह चन्द्र बल की बनावट है, वृषभ का कोई विशेष गुण नहीं। इसीलिए यह छाननी है, भविष्यवाणी नहीं — और इसी कारण इसका प्रतिशत बनाना निरर्थक होता।

छपे हुए पंचांग से चन्द्राष्टम कैसे पहचानें?+

राशि को नक्षत्रों में बदल लें। धनु में मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र आते हैं। जिन नक्षत्रों के चारों पद इसी राशि में हैं, वे अकेले ही बात तय कर देते हैं; जो नक्षत्र 30° की सीमा पर बँटा है, उसके लिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ता है। 27 में से नौ नक्षत्र सीमा पर बँटे हैं, इसलिए नक्षत्र जान लेना हर बार पर्याप्त नहीं होता।

क्या इस पृष्ठ से आज का मुहूर्त निकाल सकते हैं?+

दिन छाँटने तक — हाँ, और वह काम का बड़ा हिस्सा है। पूरा मुहूर्त इससे नहीं निकलता, क्योंकि उसके लिए तीन चीज़ें चाहिए जो यहाँ नहीं हैं: पंचांग के अंगों के मिनट तक के समाप्ति-काल, आपके शहर के अनुसार उठाया गया लग्न, और आपकी जन्म कुंडली। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए इससे दिन छाँटिए और समय किसी पंडित जी से निश्चित कराइए।

व्यक्तिगत फलादेश चाहिए?

यह पृष्ठ वह देता है जो गणना से निकलता है — पंचांग, चन्द्र बल और चन्द्राष्टम की तिथियाँ। यह राशि के लिए है, आपकी कुंडली के लिए नहीं। कौन सा दिन आपके लिए कैसा रहेगा, यह जन्म कुंडली, दशा और गोचर तीनों को देखकर बताया जाता है।

अन्य राशियों का राशिफल

इसी राशि का अंग्रेज़ी पृष्ठ, जिसमें विस्तृत दैनिक फलादेश भी है: Taurus horoscope, और कल के लिए Taurus tomorrow