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कन्या राशिफल

कन्या राशि (Virgo) के लिए आज का पंचांग और चन्द्र बल — दोनों गणना किए गए, किसी अनुमान से नहीं। नीचे आज की तिथि और नक्षत्र, कन्या से चन्द्र की भाव-स्थिति, 2026–2027 के सभी चन्द्राष्टम दिन, इस राशि के नक्षत्र और पद, और राशि स्वामी बुध की वर्तमान स्थिति दी गई है।

स्वामीबुधतत्त्वपृथ्वी तत्त्वस्वभावद्विस्वभावसायन23 अगस्त – 22 सितम्बरनिरयन17 सितम्बर – 17 अक्तूबर

सायन तिथियाँ वे हैं जो प्रचलित हैं; वैदिक ज्योतिष निरयन है, और उसकी गणना दूसरी पंक्ति से होती है। दोनों दिए गए हैं क्योंकि पहचान एक से होती है और गणना दूसरी से।

आज का पंचांग · मंगलवार, 13 अक्तूबर 2026

शुक्ल तृतीया

चन्द्र विशाखा नक्षत्र में · प्रीति योग · तैतिल करण · शुक्ल पक्ष

सूर्योदय
06:20
राहु काल
15:00-16:27
अभिजित मुहूर्त
11:44-12:30

ये समय नई दिल्ली के लिए JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किए गए हैं। सूर्योदय, राहु काल और अभिजित आपके शहर के अनुसार बदलते हैं — पंचांग टूल किसी भी तिथि और शहर के लिए इन्हें निकाल देता है।

चन्द्र बल

आज चन्द्र कन्या से किस भाव में है

दूसरा भावमध्यम

आज सूर्योदय के समय चन्द्र तुला राशि में 23.4° पर है, जो कन्या से गिनने पर दूसरा भाव है — धन भाव, अर्थात् धन, वाणी और परिवार।

चन्द्र सूर्योदय पर ही तुला में 23.4° आगे है और एक दिन में 12° से 15° चलता है, इसलिए दिन ढलने से पहले अगली राशि में चला जाएगा। ऊपर की भाव-गणना दिन के पूर्वार्ध के लिए है, पूरे दिन के लिए नहीं।

चन्द्र बल यह बताता है कि आज कोई काम आरम्भ करना चाहिए या नहीं — यह नहीं कि उसका फल क्या होगा। और यह राशि के आधार पर है, आपकी जन्म कुंडली के आधार पर नहीं। यह कोई प्रतिशत नहीं है, और जान-बूझकर नहीं है: बारह भावों में छह शुभ हैं, इसलिए किसी भी राशि के लगभग आधे दिन शुभ श्रेणी में आएँगे — इसे “आज का दिन 82% शुभ” बना देना गणना नहीं, दिखावा होता।

बारह भाव

कन्या से चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ

गिनती अंकगणित है — चन्द्र की राशि में से अपनी राशि घटा दें। भावों का शुभ, मध्यम और त्याज्य में बाँटना मुहूर्त की परम्परा है, और उसे परम्परा कहकर ही दिया गया है। अन्तिम स्तम्भ बताता है कि 2026-01-01 से 2027-12-31 तक के 730 दिनों में चन्द्र सूर्योदय के समय वास्तव में कितनी बार उस राशि में था।

कन्या राशि से गिने गए बारह भाव, उनका चन्द्र बल वर्ग और गणना में मिले सूर्योदय
भावराशिक्या दर्शाता हैवर्गसूर्योदय
पहलाकन्यातनु — शरीर और स्वयंशुभ61
दूसरातुलाधन — धन, वाणी और परिवारमध्यम65
तीसरावृश्चिकसहज — पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँशुभ66
चौथाधनुबन्धु — घर, माता और सुखत्याज्य67
पाँचवाँमकरपुत्र — सन्तान, विद्या और सृजनमध्यम68
छठाकुम्भशत्रु — प्रतिस्पर्धा, ऋण और रोगशुभ62
सातवाँमीनकलत्र — साझेदारी, जीवनसाथी और व्यापारशुभ58
आठवाँमेषरन्ध्र — उपद्रव, गुप्त और आयुत्याज्य · चन्द्राष्टम57
नौवाँवृषभभाग्य — भाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँमध्यम55
दसवाँमिथुनकर्म — कर्म, आजीविका और प्रतिष्ठाशुभ56
ग्यारहवाँकर्कलाभ — लाभ, आय और सम्पर्कशुभ57
बारहवाँसिंहव्यय — व्यय, त्याग और दूर देशत्याज्य58

दिनों की संख्या बराबर नहीं है, और उसका कारण राशियाँ नहीं हैं: चन्द्र की कक्षा वृत्त नहीं दीर्घवृत्त है, इसलिए वह एक दिन में लगभग 11.8° से 15.3° तक चलता है — मन्द गति पर किसी राशि में अधिक ठहरता है, तेज़ गति पर जल्दी निकल जाता है। 2026–2027 में चन्द्र का अपभू (apogee) जहाँ रहा, उसी से यह अन्तर बना। अपभू 8.85 वर्ष में पूरी राशिचक्र घूम जाता है, इसलिए पाँच वर्ष बाद यही गणना अधिक दिन किसी और राशि में दिखाएगी। दो वर्ष की गिनती को किसी राशि का स्थायी गुण मानना इफ़ेमेरिस को भाग्य समझ लेना है।

चन्द्राष्टम

कन्या के सभी चन्द्राष्टम दिन, 2026–2027

कन्या के लिए चन्द्राष्टम तब है जब चन्द्र मेष में हो। गणना में यह 26 बार आया — 21 बार दो सूर्योदय तक और 5 बार तीन तक, कुल 57 सूर्योदय। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं: चन्द्र का प्रवेश और निर्गम प्रायः रात में होता है, इसलिए दो सूर्योदय की अवधि ठीक दो दिन नहीं, दो दिन से कुछ अधिक होती है। पंचांग की परम्परा यही है।

कन्या राशि के चन्द्राष्टम की सभी अवधियाँ, तिथि सहित
क्रमअवधिसूर्योदय
126–27 जनवरी 20262
222–23 फ़रवरी 20262
321–22 मार्च 20262
418–19 अप्रैल 20262
515–16 मई 20262
612–13 जून 20262
79–10 जुलाई 20262
85–6 अगस्त 20262
91–3 सितम्बर 20263
1029–30 सितम्बर 20262
1126–27 अक्तूबर 20262
1222–24 नवम्बर 20263
1320–21 दिसम्बर 20262
1416–17 जनवरी 20272
1512–14 फ़रवरी 20273
1612–13 मार्च 20272
178–9 अप्रैल 20272
185–7 मई 20273
192–3 जून 20272
2029–30 जून 20272
2126–28 जुलाई 20273
2223–24 अगस्त 20272
2319–20 सितम्बर 20272
2416–17 अक्तूबर 20272
2513–14 नवम्बर 20272
2610–11 दिसम्बर 20272

पहचान

किसी भी पंचांग में कन्या का चन्द्राष्टम पहचानना

छपे हुए पंचांग में चन्द्र की राशि प्रायः नहीं होती, नक्षत्र होता है। दोनों एक ही बात नहीं हैं: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर बँटे हैं, इसलिए लगभग एक-तिहाई दिनों में नक्षत्र जान लेने पर भी राशि तय नहीं होती। मेष में ये नक्षत्र आते हैं —

मेष राशि के नक्षत्र और वे कन्या का चन्द्राष्टम तय करते हैं या नहीं
नक्षत्रपदक्या यह अकेले तय करता है?
अश्विनीAshwini1, 2, 3, 4हाँ। पंचांग में अश्विनी लिखा हो तो चन्द्र मेष में है और कन्या के लिए यह चन्द्राष्टम है।
भरणीBharani1, 2, 3, 4हाँ। पंचांग में भरणी लिखा हो तो चन्द्र मेष में है और कन्या के लिए यह चन्द्राष्टम है।
कृत्तिकाKrittika1नहीं। कृत्तिका के केवल 1 पद मेष में आता है — शेष वृषभ में, इसलिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ेगा।

अधिकांश प्रकाशित पंचांग नक्षत्र के साथ पद या चन्द्र का अंश भी देते हैं, और दोनों में से कोई भी बात तय कर देता है। यदि यह देखना ही न हो, तो ऊपर की तालिका में 2026-01-01 से 2027-12-31 तक की सभी 26 अवधियाँ तिथि सहित दी हुई हैं।

तारा बल

तारा बल, और एक राशि का पृष्ठ यहाँ तक ही क्यों जा सकता है

मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता। उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं: चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है — हर तारा तीन नक्षत्रों के पास होता है, एक के पास नहीं। इनमें तीन सर्वत्र त्याज्य माने गए हैं: विपत्, प्रत्यरि, वध।

और यहीं एक राशि के पृष्ठ की सीमा है, जिसे छिपाने के बजाय कह देना ठीक है। एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए राशि जान लेने पर जन्म-नक्षत्र तय नहीं होता — कन्या में चन्द्र वाले जातक का जन्म-नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा में से कोई एक हो सकता है, और तीनों के तारा चक्र अलग हैं। चन्द्र बल राशि से ही निकल आता है, इसीलिए यह पृष्ठ उसकी गणना कर देता है। तारा बल नहीं निकलता, इसलिए नीचे हर सम्भावित जन्म-नक्षत्र का चक्र अलग स्तम्भ में दिया है।

कन्या राशि के प्रत्येक सम्भावित जन्म-नक्षत्र के लिए नौ तारा और उनके नक्षत्र
तारावर्गजन्म-नक्षत्र उत्तर फाल्गुनीपद 2, 3, 4जन्म-नक्षत्र हस्तजन्म-नक्षत्र चित्रापद 1, 2
1. जन्ममिश्रउत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, कृत्तिकाहस्त, श्रवण, रोहिणीचित्रा, धनिष्ठा, मृगशिरा
2. सम्पत्शुभहस्त, श्रवण, रोहिणीचित्रा, धनिष्ठा, मृगशिरास्वाती, शतभिषा, आर्द्रा
3. विपत्त्याज्यचित्रा, धनिष्ठा, मृगशिरास्वाती, शतभिषा, आर्द्राविशाखा, पूर्व भाद्रपद, पुनर्वसु
4. क्षेमशुभस्वाती, शतभिषा, आर्द्राविशाखा, पूर्व भाद्रपद, पुनर्वसुअनुराधा, उत्तर भाद्रपद, पुष्य
5. प्रत्यरित्याज्यविशाखा, पूर्व भाद्रपद, पुनर्वसुअनुराधा, उत्तर भाद्रपद, पुष्यज्येष्ठा, रेवती, आश्लेषा
6. साधकशुभअनुराधा, उत्तर भाद्रपद, पुष्यज्येष्ठा, रेवती, आश्लेषामूल, अश्विनी, मघा
7. वधत्याज्यज्येष्ठा, रेवती, आश्लेषामूल, अश्विनी, मघापूर्वाषाढ़ा, भरणी, पूर्व फाल्गुनी
8. मित्रशुभमूल, अश्विनी, मघापूर्वाषाढ़ा, भरणी, पूर्व फाल्गुनीउत्तराषाढ़ा, कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी
9. अति-मित्रशुभपूर्वाषाढ़ा, भरणी, पूर्व फाल्गुनीउत्तराषाढ़ा, कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनीश्रवण, रोहिणी, हस्त

अपना जन्म-नक्षत्र एक बार जान लें — मुफ़्त कुंडली उसे पद के साथ बता देती है — और इनमें से एक स्तम्भ जीवन भर आपका रहेगा। बारह भावों में छह चन्द्र बल की पहली छाननी पार करते हैं और नौ तारा में छह दूसरी में त्याज्य नहीं हैं, इसलिए दोनों पार करने वाला दिन लगभग एक-तिहाई होता है — छाननी असली है, और फिर भी भविष्यवाणी नहीं। तिथि, करण, योग और प्रश्न के समय का लग्न इसके बाद आते हैं।

राशि स्वामी

बुध कहाँ है, और वह इतना धीरे क्यों चलता है

कन्या बुध की राशि है, इसलिए कन्या का हर पाठ आधा बुध का पाठ है। यही वह आधा हिस्सा है जो चन्द्र नहीं देता — और यही कारण है कि “आज” उतना बड़ा प्रश्न नहीं है जितना लगता है, क्योंकि बुध एक राशि में हफ़्तों से वर्षों तक रहता है जबकि चन्द्र सवा दो दिन।

प्रश्न

कन्या राशिफल — सामान्य प्रश्न

कन्या राशि का चन्द्राष्टम कब होता है?+

जब गोचर का चन्द्र कन्या से आठवीं राशि, अर्थात् मेष में हो। यह हर चन्द्र मास में लगभग ढाई दिन के लिए आता है — इस पृष्ठ की 2026-01-01 से 2027-12-31 तक की गणना में 26 बार, कुल 57 सूर्योदय। 21 बार यह दो सूर्योदय तक रहा और 5 बार तीन तक। सभी तिथियाँ इस पृष्ठ की तालिका में दी गई हैं।

यह राशिफल सूर्य राशि से पढ़ें या चन्द्र राशि से?+

चन्द्र राशि से। वैदिक राशिफल जन्म के समय चन्द्र जिस राशि में था, उसी के लिए लिखा जाता है — और इस पृष्ठ की चन्द्र बल गणना तो सूर्य राशि से पढ़ने पर निरर्थक ही हो जाती है, क्योंकि वह गिनती जन्म के चन्द्र से ही की जाती है। मुफ़्त कुंडली से अपनी चन्द्र राशि और नक्षत्र एक बार जान लेना ठीक रहता है।

कन्या के लिए लगभग आधे दिन शुभ क्यों निकलते हैं?+

क्योंकि बारह भावों में से छह — पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ — शुभ माने जाते हैं। कन्या से ये कन्या, वृश्चिक, कुम्भ, मीन, मिथुन, कर्क राशियाँ हैं, और गणना में इनमें 730 दिनों के 360 सूर्योदय पड़े। यह चन्द्र बल की बनावट है, कन्या का कोई विशेष गुण नहीं। इसीलिए यह छाननी है, भविष्यवाणी नहीं — और इसी कारण इसका प्रतिशत बनाना निरर्थक होता।

छपे हुए पंचांग से चन्द्राष्टम कैसे पहचानें?+

राशि को नक्षत्रों में बदल लें। मेष में अश्विनी, भरणी, कृत्तिका नक्षत्र आते हैं। जिन नक्षत्रों के चारों पद इसी राशि में हैं, वे अकेले ही बात तय कर देते हैं; जो नक्षत्र 30° की सीमा पर बँटा है, उसके लिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ता है। 27 में से नौ नक्षत्र सीमा पर बँटे हैं, इसलिए नक्षत्र जान लेना हर बार पर्याप्त नहीं होता।

क्या इस पृष्ठ से आज का मुहूर्त निकाल सकते हैं?+

दिन छाँटने तक — हाँ, और वह काम का बड़ा हिस्सा है। पूरा मुहूर्त इससे नहीं निकलता, क्योंकि उसके लिए तीन चीज़ें चाहिए जो यहाँ नहीं हैं: पंचांग के अंगों के मिनट तक के समाप्ति-काल, आपके शहर के अनुसार उठाया गया लग्न, और आपकी जन्म कुंडली। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए इससे दिन छाँटिए और समय किसी पंडित जी से निश्चित कराइए।

व्यक्तिगत फलादेश चाहिए?

यह पृष्ठ वह देता है जो गणना से निकलता है — पंचांग, चन्द्र बल और चन्द्राष्टम की तिथियाँ। यह राशि के लिए है, आपकी कुंडली के लिए नहीं। कौन सा दिन आपके लिए कैसा रहेगा, यह जन्म कुंडली, दशा और गोचर तीनों को देखकर बताया जाता है।

अन्य राशियों का राशिफल

इसी राशि का अंग्रेज़ी पृष्ठ, जिसमें विस्तृत दैनिक फलादेश भी है: Virgo horoscope, और कल के लिए Virgo tomorrow।