वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि (Scorpio) के लिए आज का पंचांग और चन्द्र बल — दोनों गणना किए गए, किसी अनुमान से नहीं। नीचे आज की तिथि और नक्षत्र, वृश्चिक से चन्द्र की भाव-स्थिति, 2026–2027 के सभी चन्द्राष्टम दिन, इस राशि के नक्षत्र और पद, और राशि स्वामी मंगल की वर्तमान स्थिति दी गई है।
सायन तिथियाँ वे हैं जो प्रचलित हैं; वैदिक ज्योतिष निरयन है, और उसकी गणना दूसरी पंक्ति से होती है। दोनों दिए गए हैं क्योंकि पहचान एक से होती है और गणना दूसरी से।
आज का पंचांग · शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
चन्द्र शतभिषा नक्षत्र में · अतिगण्ड योग · बव करण · शुक्ल पक्ष
ये समय नई दिल्ली के लिए JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किए गए हैं। सूर्योदय, राहु काल और अभिजित आपके शहर के अनुसार बदलते हैं — पंचांग टूल किसी भी तिथि और शहर के लिए इन्हें निकाल देता है।
चन्द्र बल
आज चन्द्र वृश्चिक से किस भाव में है
आज सूर्योदय के समय चन्द्र कुम्भ राशि में 8.6° पर है, जो वृश्चिक से गिनने पर चौथा भाव है — बन्धु भाव, अर्थात् घर, माता और सुख।
चन्द्र बल यह बताता है कि आज कोई काम आरम्भ करना चाहिए या नहीं — यह नहीं कि उसका फल क्या होगा। और यह राशि के आधार पर है, आपकी जन्म कुंडली के आधार पर नहीं। यह कोई प्रतिशत नहीं है, और जान-बूझकर नहीं है: बारह भावों में छह शुभ हैं, इसलिए किसी भी राशि के लगभग आधे दिन शुभ श्रेणी में आएँगे — इसे “आज का दिन 82% शुभ” बना देना गणना नहीं, दिखावा होता।
बारह भाव
वृश्चिक से चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ
गिनती अंकगणित है — चन्द्र की राशि में से अपनी राशि घटा दें। भावों का शुभ, मध्यम और त्याज्य में बाँटना मुहूर्त की परम्परा है, और उसे परम्परा कहकर ही दिया गया है। अन्तिम स्तम्भ बताता है कि 2026-01-01 से 2027-12-31 तक के 730 दिनों में चन्द्र सूर्योदय के समय वास्तव में कितनी बार उस राशि में था।
| भाव | राशि | क्या दर्शाता है | वर्ग | सूर्योदय |
|---|---|---|---|---|
| पहला | वृश्चिक | तनु — शरीर और स्वयं | शुभ | 66 |
| दूसरा | धनु | धन — धन, वाणी और परिवार | मध्यम | 67 |
| तीसरा | मकर | सहज — पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ | शुभ | 68 |
| चौथा | कुम्भ | बन्धु — घर, माता और सुख | त्याज्य | 62 |
| पाँचवाँ | मीन | पुत्र — सन्तान, विद्या और सृजन | मध्यम | 58 |
| छठा | मेष | शत्रु — प्रतिस्पर्धा, ऋण और रोग | शुभ | 57 |
| सातवाँ | वृषभ | कलत्र — साझेदारी, जीवनसाथी और व्यापार | शुभ | 55 |
| आठवाँ | मिथुन | रन्ध्र — उपद्रव, गुप्त और आयु | त्याज्य · चन्द्राष्टम | 56 |
| नौवाँ | कर्क | भाग्य — भाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँ | मध्यम | 57 |
| दसवाँ | सिंह | कर्म — कर्म, आजीविका और प्रतिष्ठा | शुभ | 58 |
| ग्यारहवाँ | कन्या | लाभ — लाभ, आय और सम्पर्क | शुभ | 61 |
| बारहवाँ | तुला | व्यय — व्यय, त्याग और दूर देश | त्याज्य | 65 |
दिनों की संख्या बराबर नहीं है, और उसका कारण राशियाँ नहीं हैं: चन्द्र की कक्षा वृत्त नहीं दीर्घवृत्त है, इसलिए वह एक दिन में लगभग 11.8° से 15.3° तक चलता है — मन्द गति पर किसी राशि में अधिक ठहरता है, तेज़ गति पर जल्दी निकल जाता है। 2026–2027 में चन्द्र का अपभू (apogee) जहाँ रहा, उसी से यह अन्तर बना। अपभू 8.85 वर्ष में पूरी राशिचक्र घूम जाता है, इसलिए पाँच वर्ष बाद यही गणना अधिक दिन किसी और राशि में दिखाएगी। दो वर्ष की गिनती को किसी राशि का स्थायी गुण मानना इफ़ेमेरिस को भाग्य समझ लेना है।
चन्द्राष्टम
वृश्चिक के सभी चन्द्राष्टम दिन, 2026–2027
वृश्चिक के लिए चन्द्राष्टम तब है जब चन्द्र मिथुन में हो। गणना में यह 27 बार आया — 25 बार दो सूर्योदय तक और 2 बार तीन तक, कुल 56 सूर्योदय। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं: चन्द्र का प्रवेश और निर्गम प्रायः रात में होता है, इसलिए दो सूर्योदय की अवधि ठीक दो दिन नहीं, दो दिन से कुछ अधिक होती है। पंचांग की परम्परा यही है।
| क्रम | अवधि | सूर्योदय |
|---|---|---|
| 1 | 3–4 जनवरी 2026 | 2 |
| 2 | 30–31 जनवरी 2026 | 2 |
| 3 | 26–27 फ़रवरी 2026 | 2 |
| 4 | 25–27 मार्च 2026 | 3 |
| 5 | 22–23 अप्रैल 2026 | 2 |
| 6 | 19–20 मई 2026 | 2 |
| 7 | 16–17 जून 2026 | 2 |
| 8 | 13–14 जुलाई 2026 | 2 |
| 9 | 9–10 अगस्त 2026 | 2 |
| 10 | 6–7 सितम्बर 2026 | 2 |
| 11 | 3–4 अक्तूबर 2026 | 2 |
| 12 | 30–31 अक्तूबर 2026 | 2 |
| 13 | 27–28 नवम्बर 2026 | 2 |
| 14 | 24–25 दिसम्बर 2026 | 2 |
| 15 | 20–21 जनवरी 2027 | 2 |
| 16 | 17–18 फ़रवरी 2027 | 2 |
| 17 | 16–17 मार्च 2027 | 2 |
| 18 | 12–13 अप्रैल 2027 | 2 |
| 19 | 10–11 मई 2027 | 2 |
| 20 | 6–7 जून 2027 | 2 |
| 21 | 3–4 जुलाई 2027 | 2 |
| 22 | 31 जुलाई – 1 अगस्त 2027 | 2 |
| 23 | 27–28 अगस्त 2027 | 2 |
| 24 | 23–25 सितम्बर 2027 | 3 |
| 25 | 21–22 अक्तूबर 2027 | 2 |
| 26 | 17–18 नवम्बर 2027 | 2 |
| 27 | 14–15 दिसम्बर 2027 | 2 |
पहचान
किसी भी पंचांग में वृश्चिक का चन्द्राष्टम पहचानना
छपे हुए पंचांग में चन्द्र की राशि प्रायः नहीं होती, नक्षत्र होता है। दोनों एक ही बात नहीं हैं: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर बँटे हैं, इसलिए लगभग एक-तिहाई दिनों में नक्षत्र जान लेने पर भी राशि तय नहीं होती। मिथुन में ये नक्षत्र आते हैं —
| नक्षत्र | पद | क्या यह अकेले तय करता है? |
|---|---|---|
| मृगशिराMrigashira | 3, 4 | नहीं। मृगशिरा के केवल 3 और 4 पद मिथुन में आते हैं — शेष वृषभ में, इसलिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ेगा। |
| आर्द्राArdra | 1, 2, 3, 4 | हाँ। पंचांग में आर्द्रा लिखा हो तो चन्द्र मिथुन में है और वृश्चिक के लिए यह चन्द्राष्टम है। |
| पुनर्वसुPunarvasu | 1, 2, 3 | नहीं। पुनर्वसु के केवल 1 और 2 और 3 पद मिथुन में आते हैं — शेष कर्क में, इसलिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ेगा। |
अधिकांश प्रकाशित पंचांग नक्षत्र के साथ पद या चन्द्र का अंश भी देते हैं, और दोनों में से कोई भी बात तय कर देता है। यदि यह देखना ही न हो, तो ऊपर की तालिका में 2026-01-01 से 2027-12-31 तक की सभी 27 अवधियाँ तिथि सहित दी हुई हैं।
तारा बल
तारा बल, और एक राशि का पृष्ठ यहाँ तक ही क्यों जा सकता है
मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता। उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं: चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है — हर तारा तीन नक्षत्रों के पास होता है, एक के पास नहीं। इनमें तीन सर्वत्र त्याज्य माने गए हैं: विपत्, प्रत्यरि, वध।
और यहीं एक राशि के पृष्ठ की सीमा है, जिसे छिपाने के बजाय कह देना ठीक है। एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए राशि जान लेने पर जन्म-नक्षत्र तय नहीं होता — वृश्चिक में चन्द्र वाले जातक का जन्म-नक्षत्र विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा में से कोई एक हो सकता है, और तीनों के तारा चक्र अलग हैं। चन्द्र बल राशि से ही निकल आता है, इसीलिए यह पृष्ठ उसकी गणना कर देता है। तारा बल नहीं निकलता, इसलिए नीचे हर सम्भावित जन्म-नक्षत्र का चक्र अलग स्तम्भ में दिया है।
| तारा | वर्ग | जन्म-नक्षत्र विशाखापद 4 | जन्म-नक्षत्र अनुराधा | जन्म-नक्षत्र ज्येष्ठा |
|---|---|---|---|---|
| 1. जन्म | मिश्र | विशाखा, पूर्व भाद्रपद, पुनर्वसु | अनुराधा, उत्तर भाद्रपद, पुष्य | ज्येष्ठा, रेवती, आश्लेषा |
| 2. सम्पत् | शुभ | अनुराधा, उत्तर भाद्रपद, पुष्य | ज्येष्ठा, रेवती, आश्लेषा | मूल, अश्विनी, मघा |
| 3. विपत् | त्याज्य | ज्येष्ठा, रेवती, आश्लेषा | मूल, अश्विनी, मघा | पूर्वाषाढ़ा, भरणी, पूर्व फाल्गुनी |
| 4. क्षेम | शुभ | मूल, अश्विनी, मघा | पूर्वाषाढ़ा, भरणी, पूर्व फाल्गुनी | उत्तराषाढ़ा, कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी |
| 5. प्रत्यरि | त्याज्य | पूर्वाषाढ़ा, भरणी, पूर्व फाल्गुनी | उत्तराषाढ़ा, कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी | श्रवण, रोहिणी, हस्त |
| 6. साधक | शुभ | उत्तराषाढ़ा, कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी | श्रवण, रोहिणी, हस्त | धनिष्ठा, मृगशिरा, चित्रा |
| 7. वध | त्याज्य | श्रवण, रोहिणी, हस्त | धनिष्ठा, मृगशिरा, चित्रा | शतभिषा, आर्द्रा, स्वाती |
| 8. मित्र | शुभ | धनिष्ठा, मृगशिरा, चित्रा | शतभिषा, आर्द्रा, स्वाती | पूर्व भाद्रपद, पुनर्वसु, विशाखा |
| 9. अति-मित्र | शुभ | शतभिषा, आर्द्रा, स्वाती | पूर्व भाद्रपद, पुनर्वसु, विशाखा | उत्तर भाद्रपद, पुष्य, अनुराधा |
अपना जन्म-नक्षत्र एक बार जान लें — मुफ़्त कुंडली उसे पद के साथ बता देती है — और इनमें से एक स्तम्भ जीवन भर आपका रहेगा। बारह भावों में छह चन्द्र बल की पहली छाननी पार करते हैं और नौ तारा में छह दूसरी में त्याज्य नहीं हैं, इसलिए दोनों पार करने वाला दिन लगभग एक-तिहाई होता है — छाननी असली है, और फिर भी भविष्यवाणी नहीं। तिथि, करण, योग और प्रश्न के समय का लग्न इसके बाद आते हैं।
राशि स्वामी
मंगल कहाँ है, और वह इतना धीरे क्यों चलता है
वृश्चिक मंगल की राशि है, इसलिए वृश्चिक का हर पाठ आधा मंगल का पाठ है। यही वह आधा हिस्सा है जो चन्द्र नहीं देता — और यही कारण है कि “आज” उतना बड़ा प्रश्न नहीं है जितना लगता है, क्योंकि मंगल एक राशि में हफ़्तों से वर्षों तक रहता है जबकि चन्द्र सवा दो दिन।
प्रश्न
वृश्चिक राशिफल — सामान्य प्रश्न
वृश्चिक राशि का चन्द्राष्टम कब होता है?+
जब गोचर का चन्द्र वृश्चिक से आठवीं राशि, अर्थात् मिथुन में हो। यह हर चन्द्र मास में लगभग ढाई दिन के लिए आता है — इस पृष्ठ की 2026-01-01 से 2027-12-31 तक की गणना में 27 बार, कुल 56 सूर्योदय। 25 बार यह दो सूर्योदय तक रहा और 2 बार तीन तक। सभी तिथियाँ इस पृष्ठ की तालिका में दी गई हैं।
यह राशिफल सूर्य राशि से पढ़ें या चन्द्र राशि से?+
चन्द्र राशि से। वैदिक राशिफल जन्म के समय चन्द्र जिस राशि में था, उसी के लिए लिखा जाता है — और इस पृष्ठ की चन्द्र बल गणना तो सूर्य राशि से पढ़ने पर निरर्थक ही हो जाती है, क्योंकि वह गिनती जन्म के चन्द्र से ही की जाती है। मुफ़्त कुंडली से अपनी चन्द्र राशि और नक्षत्र एक बार जान लेना ठीक रहता है।
वृश्चिक के लिए लगभग आधे दिन शुभ क्यों निकलते हैं?+
क्योंकि बारह भावों में से छह — पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ — शुभ माने जाते हैं। वृश्चिक से ये वृश्चिक, मकर, मेष, वृषभ, सिंह, कन्या राशियाँ हैं, और गणना में इनमें 730 दिनों के 365 सूर्योदय पड़े। यह चन्द्र बल की बनावट है, वृश्चिक का कोई विशेष गुण नहीं। इसीलिए यह छाननी है, भविष्यवाणी नहीं — और इसी कारण इसका प्रतिशत बनाना निरर्थक होता।
छपे हुए पंचांग से चन्द्राष्टम कैसे पहचानें?+
राशि को नक्षत्रों में बदल लें। मिथुन में मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु नक्षत्र आते हैं। जिन नक्षत्रों के चारों पद इसी राशि में हैं, वे अकेले ही बात तय कर देते हैं; जो नक्षत्र 30° की सीमा पर बँटा है, उसके लिए पद या चन्द्र का अंश देखना पड़ता है। 27 में से नौ नक्षत्र सीमा पर बँटे हैं, इसलिए नक्षत्र जान लेना हर बार पर्याप्त नहीं होता।
क्या इस पृष्ठ से आज का मुहूर्त निकाल सकते हैं?+
दिन छाँटने तक — हाँ, और वह काम का बड़ा हिस्सा है। पूरा मुहूर्त इससे नहीं निकलता, क्योंकि उसके लिए तीन चीज़ें चाहिए जो यहाँ नहीं हैं: पंचांग के अंगों के मिनट तक के समाप्ति-काल, आपके शहर के अनुसार उठाया गया लग्न, और आपकी जन्म कुंडली। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए इससे दिन छाँटिए और समय किसी पंडित जी से निश्चित कराइए।
व्यक्तिगत फलादेश चाहिए?
यह पृष्ठ वह देता है जो गणना से निकलता है — पंचांग, चन्द्र बल और चन्द्राष्टम की तिथियाँ। यह राशि के लिए है, आपकी कुंडली के लिए नहीं। कौन सा दिन आपके लिए कैसा रहेगा, यह जन्म कुंडली, दशा और गोचर तीनों को देखकर बताया जाता है।
अन्य राशियों का राशिफल
इसी राशि का अंग्रेज़ी पृष्ठ, जिसमें विस्तृत दैनिक फलादेश भी है: Scorpio horoscope, और कल के लिए Scorpio tomorrow।