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लग्न

इंदु लग्न कैसे निकालें: कला मान और हर लग्न की तालिका

इंदु लग्न क्या है

इंदु चन्द्रमा का एक नाम है, और इंदु लग्न वह राशि है जो दो अन्य राशियों से निकाली जाती है: लग्न और चन्द्र राशि। मंत्रेश्वर की फलदीपिका यह नियम देती है और इससे मिलने वाली राशि को धन के संदर्भ में पढ़ती है। यह आरूढ़ लग्न की तरह गणना से बनी राशि है, कोई दूसरी उदय राशि नहीं: इंदु लग्न पर कुछ भी उदित नहीं होता, और इसे आकाश देखकर नहीं, गिनकर निकाला जाता है। यह पृष्ठ इसका गणित और हर संयोजन के लिए एक तालिका देता है। धन के विषय में फलदीपिका आगे जो कहती है, उसे यहाँ उसी ग्रंथ के मत के रूप में बताया गया है, और उससे आगे कुछ नहीं जोड़ा गया।

सात ग्रहों के कला मान

यह नियम हर राशि-स्वामी को कुछ कलाएँ देता है, जिनका अनुवाद प्रायः किरणें किया जाता है। इस पद्धति में राहु और केतु किसी राशि के स्वामी नहीं हैं, और उनका कोई मान नहीं है।

ग्रहकलाएँ12 से भाग देने पर शेष
सूर्य306
चन्द्र164
मंगल66
बुध88
गुरु1010
शुक्र120
शनि11

अंत में योग को 12 से भाग दिया जाता है, इसलिए परिणाम केवल तीसरे स्तंभ पर निर्भर करता है। इससे दो बातें निकलती हैं। शुक्र की 12 कलाएँ 0 शेष छोड़ती हैं, इसलिए नवमेश शुक्र हो तो गिनती में कुछ नहीं जुड़ता। और सूर्य की 30 तथा मंगल की 6 कलाएँ, दोनों 6 शेष छोड़ती हैं, इसलिए गणना में दोनों से एक ही परिणाम आता है, यद्यपि एक की कलाएँ दूसरे की पाँच गुना हैं।

इंदु लग्न कैसे निकालें

  1. लग्न से नौवीं राशि देखें और उसका स्वामी लिख लें।
  2. चन्द्र राशि से नौवीं राशि देखें और उसका स्वामी लिख लें।
  3. दोनों स्वामियों की कलाएँ जोड़ें।
  4. योग को 12 से भाग देकर शेष रखें। शेष 0 हो तो उसे 12 मानें; 12 या उससे कम योग को जैसा है वैसा ही लें।
  5. चन्द्र राशि को एक मानकर उससे उतनी ही राशियाँ गिनें। जिस राशि पर गिनती पहुँचे, वही इंदु लग्न है।

छोटे योग का उदाहरण: सिंह लग्न, और चन्द्रमा वृषभ में। सिंह से नौवीं राशि मेष है, जिसका स्वामी मंगल है (6 कलाएँ)। वृषभ से नौवीं राशि मकर है, जिसका स्वामी शनि है (1)। योग 7 है, जो 12 से कम है, इसलिए वृषभ से सात राशियाँ गिनें: इंदु लग्न वृश्चिक है, जो लग्न से चौथी राशि है।

12 से बड़े योग का उदाहरण: धनु लग्न, और चन्द्रमा कर्क में। धनु से नौवीं राशि सिंह है, जिसका स्वामी सूर्य है (30); कर्क से नौवीं राशि मीन है, जिसका स्वामी गुरु है (10)। 40 को 12 से भाग देने पर 4 शेष बचता है, और कर्क से चौथी राशि तुला है, जो लग्न से ग्यारहवीं है।

बारह लग्नों के लिए केवल सात पंक्तियाँ क्यों

इस नियम में लग्न केवल अपने नवमेश के माध्यम से आता है, और पाँच ग्रहों में से हर एक दो लग्नों का नवमेश है। इसलिए जिन लग्नों का नवमेश एक ही है, उनके सारे इंदु लग्न भी एक जैसे होते हैं, चन्द्र राशि चाहे कोई भी हो: सिंह और मीन (मंगल); तुला और मकर (बुध); मेष और कर्क (गुरु); कन्या और कुम्भ (शुक्र); वृषभ और मिथुन (शनि)। अपनी अलग पंक्ति केवल धनु लग्न की है, जिसका नवमेश सूर्य है, और वृश्चिक लग्न की, जिसका नवमेश चन्द्रमा है। सभी 144 संयोजनों में योग 2 से 60 तक जाता है।

हाथ से गणना करते समय दो स्थितियों में भूल होना आसान है। 144 में से 17 खानों में शेष 0 आता है, इसलिए इंदु लग्न चन्द्र राशि से बारहवीं राशि होता है। आठ खानों में शेष 1 आता है, और इंदु लग्न स्वयं चन्द्र राशि ही होता है।

इंदु लग्न तालिका: हर लग्न और हर चन्द्र राशि

लग्न को बाएँ स्तंभ में और चन्द्र राशि को सबसे ऊपर की पंक्ति में देखें; उनके मिलन वाला खाना इंदु लग्न बताता है। निःशुल्क कुंडली (अंग्रेज़ी में) जन्म की तारीख, समय और स्थान से दोनों जानकारियाँ, लग्न और चन्द्र राशि, देती है, और चन्द्र राशि कैलकुलेटर (अंग्रेज़ी में) अकेले दूसरी जानकारी देता है।

लग्न (नवमेश)चन्द्रमा मेष मेंचन्द्रमा वृषभ मेंचन्द्रमा मिथुन मेंचन्द्रमा कर्क मेंचन्द्रमा सिंह मेंचन्द्रमा कन्या मेंचन्द्रमा तुला मेंचन्द्रमा वृश्चिक मेंचन्द्रमा धनु मेंचन्द्रमा मकर मेंचन्द्रमा कुम्भ मेंचन्द्रमा मीन में
मेष (गुरु)वृश्चिकमीनमेषकुम्भवृश्चिकमिथुनमीनधनुमीनमिथुनवृश्चिकमिथुन
वृषभ (शनि)कुम्भमिथुनकर्कवृषभकुम्भकन्यामिथुनमीनमिथुनकन्याकुम्भकन्या
मिथुन (शनि)कुम्भमिथुनकर्कवृषभकुम्भकन्यामिथुनमीनमिथुनकन्याकुम्भकन्या
कर्क (गुरु)वृश्चिकमीनमेषकुम्भवृश्चिकमिथुनमीनधनुमीनमिथुनवृश्चिकमिथुन
सिंह (मंगल)कर्कवृश्चिकधनुतुलाकर्ककुम्भवृश्चिकसिंहवृश्चिककुम्भकर्ककुम्भ
कन्या (शुक्र)मकरवृषभमिथुनमेषमकरसिंहवृषभकुम्भवृषभसिंहमकरसिंह
तुला (बुध)कन्यामकरकुम्भधनुकन्यामेषमकरतुलामकरमेषकन्यामेष
वृश्चिक (चन्द्र)वृषभकन्यातुलासिंहवृषभधनुकन्यामिथुनकन्याधनुवृषभधनु
धनु (सूर्य)कर्कवृश्चिकधनुतुलाकर्ककुम्भवृश्चिकसिंहवृश्चिककुम्भकर्ककुम्भ
मकर (बुध)कन्यामकरकुम्भधनुकन्यामेषमकरतुलामकरमेषकन्यामेष
कुम्भ (शुक्र)मकरवृषभमिथुनमेषमकरसिंहवृषभकुम्भवृषभसिंहमकरसिंह
मीन (मंगल)कर्कवृश्चिकधनुतुलाकर्ककुम्भवृश्चिकसिंहवृश्चिककुम्भकर्ककुम्भ

लग्न किसी राशि के किनारे पर हो, या चन्द्रमा राशि की सीमा के पास हो, तो आप किसी दूसरी पंक्ति या स्तंभ में पहुँच सकते हैं, इसलिए दोनों के लिए जन्म का सटीक समय चाहिए। यह तालिका निरयन राशियाँ मानकर बनी है, जैसे इस साइट की हर तालिका।

यह पृष्ठ क्या नहीं बताता

यह पृष्ठ नहीं बताता कि किसी राशि में इंदु लग्न होने का आपकी आय के लिए क्या अर्थ है, और न ही इसके आधार पर किसी को कोई वित्तीय निर्णय लेने या टालने को कहता है। फलदीपिका आगे इंदु लग्न में स्थित ग्रहों को अपने धन-विवेचन के अंग के रूप में पढ़ती है, और उस विवेचन के लिए पूरी कुंडली चाहिए, केवल एक तालिका नहीं। धन से जुड़े प्रश्न आपकी परिस्थिति के तथ्यों से, और जहाँ आवश्यक हो, किसी योग्य सलाहकार से तय होने चाहिए। दूसरे भाव (अंग्रेज़ी में) का पृष्ठ उस भाव का वर्णन करता है जिसे परंपरा बचत के लिए सबसे पहले देखती है, और कुंडली योगों की सूची (अंग्रेज़ी में) उन नामित योगों को सामने रखती है जिन्हें इस साइट ने मापा है।

इस लेख का अंग्रेज़ी संस्करण: Indu Lagna: How to Calculate It, With a Table for Every Lagna।

जन्म विवरण से आपका लग्न और चन्द्र राशि

जन्म कुंडली रिपोर्ट लग्न, हर ग्रह की राशि और हर भाव का स्वामी देती है, जिनसे इस गिनती के दोनों नवमेश मिल जाते हैं। यह रिपोर्ट इंदु लग्न की गणना नहीं करती, और न ही उसे धन के लिए पढ़ती है।

कुंडली रिपोर्ट लें (अंग्रेज़ी में)