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बुध वक्री 2026: तारीखें, राशियाँ और स्तंभन

2026 में आरंभ होने वाली 3 अवधियाँ · स्तंभनों के बीच 67 दिन · कुम्भ, कर्क, मिथुन और तुला

2026 में बुध 3 बार वक्री होता है: 26 फ़रवरी से 21 मार्च 2026 तक, 29 जून से 24 जुलाई 2026 तक और 24 अक्तूबर से 13 नवम्बर 2026 तक। केवल 2026 के कैलेंडर दिन गिनें तो बुध उनमें से 71 दिन वक्री है।

पहली अवधि: 26 फ़रवरी से 21 मार्च तक, कुम्भ में

बुध 26 फ़रवरी 2026 को 28°21′ कुम्भ पर, पूर्व भाद्रपद में, वक्री होता है, और 21 मार्च 2026 को 14°16′ कुम्भ पर, शतभिषा में, मार्गी होता है। दोनों स्तंभनों के बीच यह 23 दिनों में राशिचक्र का 14.1° पीछे चलता है।

26 फ़रवरी का स्तंभन, 28°21′ कुम्भ, पूर्व भाद्रपद के पाद 3 में है, जो मिथुन नवांश है। 21 मार्च का स्तंभन, 14°16′ कुम्भ, शतभिषा के पाद 3 में है, जो कुम्भ नवांश है। दोनों के बीच का चाप 5 पादों में फैला है, शतभिषा पाद 3 से पूर्व भाद्रपद पाद 3 तक, और बुध इसके हर अंश को तीन बार पार करता है: 26 फ़रवरी से पहले आगे, 21 मार्च तक पीछे, और उसके बाद फिर आगे। कुम्भ बुध के लिए सम राशि है।

पूरा 14.1° कुम्भ के भीतर है, इसलिए 2026 के 26 फ़रवरी वाले वक्री में कोई ऐसा राशि-परिवर्तन नहीं है जिसकी तारीख दी जा सके।

अवधि के भीतर बुध पीछे चलते हुए एक नक्षत्र-सीमा भी पार करता है: 10 मार्च 2026 को शतभिषा में प्रवेश।

तालिका इन 23 दिनों में बुध की ये युतियाँ दर्ज करती है: 28 फ़रवरी 2026 को 28° कुम्भ पर शुक्र से, 7 मार्च 2026 को 22° कुम्भ पर सूर्य से और 15 मार्च 2026 को 15° कुम्भ पर मंगल से। सूर्य से मिलन निम्न युति है, जब बुध पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुज़रता है, और इसी से इस वक्री का समय तय होता है।

इस अवधि के मार्गी स्तंभन पर एक सावधानी: यह भारतीय मानक समय की आधी रात के पास पड़ता है, इसलिए कोई और पंचांग-गणित, या किसी और समय-क्षेत्र में रखी सूची, 21 मार्च 2026 को पड़ोसी दिन पर रख सकती है, और कोई भी गलत नहीं होगा।

यह बुध के पिछले वक्री के आरंभ, 10 नवम्बर 2025, के 108 दिन बाद आरंभ होता है, और उसके समाप्त होने के 89 दिन बाद।

दूसरी अवधि: 29 जून से 24 जुलाई तक, कर्क और मिथुन में

बुध 29 जून 2026 को 2°02′ कर्क पर, पुनर्वसु में, वक्री होता है, और 24 जुलाई 2026 को 22°05′ मिथुन पर, अब भी पुनर्वसु में, मार्गी होता है। दोनों स्तंभनों के बीच यह 24 दिनों में राशिचक्र का 9.9° पीछे चलता है।

29 जून का स्तंभन, 2°02′ कर्क, पुनर्वसु के पाद 4 में है, जो कर्क नवांश है। 24 जुलाई का स्तंभन, 22°05′ मिथुन, पुनर्वसु के पाद 1 में है, जो मेष नवांश है। दोनों के बीच का चाप 4 पादों में फैला है, पुनर्वसु पाद 1 से पुनर्वसु पाद 4 तक, और बुध इसके हर अंश को तीन बार पार करता है: 29 जून से पहले आगे, 24 जुलाई तक पीछे, और उसके बाद फिर आगे। कर्क बुध के लिए शत्रु राशि है और मिथुन बुध की स्वराशि है।

वह चाप एक राशि-सीमा पार करता है, इसलिए 2026 का 29 जून वाला वक्री कर्क में आरंभ होकर मिथुन में समाप्त होता है। DE421 तालिका बुध का पीछे की ओर मिथुन में पुनः प्रवेश 7 जुलाई 2026 को रखती है, वक्री होने के 8 दिन बाद।

तालिका इन 24 दिनों में बुध की एक ही युति दर्ज करती है: 13 जुलाई 2026 को 26° मिथुन पर सूर्य से। सूर्य से मिलन निम्न युति है, जब बुध पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुज़रता है, और इसी से इस वक्री का समय तय होता है।

इस अवधि के वक्री स्तंभन पर एक सावधानी: यह भारतीय मानक समय की आधी रात के पास पड़ता है, इसलिए कोई और पंचांग-गणित, या किसी और समय-क्षेत्र में रखी सूची, 29 जून 2026 को पड़ोसी दिन पर रख सकती है, और कोई भी गलत नहीं होगा।

यह बुध के पिछले वक्री के आरंभ, 26 फ़रवरी 2026, के 123 दिन बाद आरंभ होता है, और उसके समाप्त होने के 100 दिन बाद।

तीसरी अवधि: 24 अक्तूबर से 13 नवम्बर तक, तुला में

बुध 24 अक्तूबर 2026 को 26°44′ तुला पर, विशाखा में, वक्री होता है, और 13 नवम्बर 2026 को 10°48′ तुला पर, स्वाती में, मार्गी होता है। दोनों स्तंभनों के बीच यह 20 दिनों में राशिचक्र का 15.9° पीछे चलता है।

24 अक्तूबर का स्तंभन, 26°44′ तुला, विशाखा में है, पाद-सीमा के इतने पास कि पाद अयनांश पर निर्भर है। 13 नवम्बर का स्तंभन, 10°48′ तुला, स्वाती के पाद 2 में है, जो मकर नवांश है। दोनों के बीच का चाप 6 पादों में फैला है, स्वाती पाद 2 से विशाखा पाद 3 तक, और बुध इसके हर अंश को तीन बार पार करता है: 24 अक्तूबर से पहले आगे, 13 नवम्बर तक पीछे, और उसके बाद फिर आगे। तुला बुध के लिए मित्र राशि है।

पूरा 15.9° तुला के भीतर है, इसलिए 2026 के 24 अक्तूबर वाले वक्री में कोई ऐसा राशि-परिवर्तन नहीं है जिसकी तारीख दी जा सके।

अवधि के भीतर बुध पीछे चलते हुए एक नक्षत्र-सीमा भी पार करता है: 3 नवम्बर 2026 को स्वाती में प्रवेश।

तालिका इन 20 दिनों में बुध की एक ही युति दर्ज करती है: 4 नवम्बर 2026 को 17° तुला पर सूर्य से। सूर्य से मिलन निम्न युति है, जब बुध पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुज़रता है, और इसी से इस वक्री का समय तय होता है।

यह बुध के पिछले वक्री के आरंभ, 29 जून 2026, के 117 दिन बाद आरंभ होता है, और उसके समाप्त होने के 92 दिन बाद।

बुध की बाकी अवधियों से 2026 की तुलना

साइट 2024 से 2031 तक बुध के जो 25 वक्री निकालती है, उनमें एक अवधि स्तंभनों के बीच 20 से 24 दिन चलती है और 8.6° से 16.3° फिर से तय करती है। 2026 की अवधियाँ 23 दिन (14.1°), 24 दिन (9.9°) और 20 दिन (15.9°) चलती हैं।

यहाँ की हर तारीख एक दिन है, कभी समय नहीं। स्तंभन पर ग्रह लगभग स्थिर होता है, इसलिए जिस मिनट वह मुड़ता है वह तालिका का सबसे अस्थिर आँकड़ा है; 2026 में बुध के लिए दिन ही वह है जिस पर दो सावधानी से बने स्रोत सहमत होंगे।

2024 से 2031 तक बुध की हर अवधि बुध वक्री पृष्ठ पर तालिका में है, जिसमें 2025 और 2027 भी हैं। यही पृष्ठ अंग्रेज़ी में Mercury retrograde 2026 पर है।