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पर्व

धनतेरस 2026 कब है: 6 नवम्बर, त्रयोदशी और प्रदोष काल

प्रकाशित 28 अक्तूबर 2026 | Live Pandit Ji

धनतेरस 2026 की तारीख: संक्षिप्त उत्तर

इस साइट की पर्व-तालिका के अनुसार धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 को होगा। कृष्ण त्रयोदशी उसी दिन 10:31 पर आरंभ होगी और 7 नवम्बर 2026 को 10:48 पर समाप्त होगी। तालिका यह पर्व उस शाम पर रखती है जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी चल रही हो, और यह शर्त 6 नवम्बर की शाम पूरी होगी, 7 नवम्बर की शाम नहीं। इस पृष्ठ के सभी घड़ी-समय नई दिल्ली के हैं। तिथि के आरंभ और अंत के क्षण पूरे देश के लिए एक ही रहते हैं, जबकि सूर्योदय, सूर्यास्त और प्रदोष शहर के साथ बदलते हैं।

6 नवम्बर से 7 नवम्बर: त्रयोदशी की अवधि

क्षणसमय (नई दिल्ली)उस समय की तिथि
सूर्योदय, 6 नवम्बर06:36कृष्ण द्वादशी
त्रयोदशी का आरंभ, 6 नवम्बर10:31कृष्ण त्रयोदशी
सूर्यास्त और प्रदोष, 6 नवम्बर17:32-19:56कृष्ण त्रयोदशी
सूर्योदय, 7 नवम्बर06:37कृष्ण त्रयोदशी
त्रयोदशी का अंत, 7 नवम्बर10:48कृष्ण चतुर्दशी आरंभ
सूर्यास्त और प्रदोष, 7 नवम्बर17:31-19:55कृष्ण चतुर्दशी

कुल मिलाकर त्रयोदशी 24 घण्टे 17 मिनट चलेगी, यानी एक दिन से थोड़ा अधिक। उसके हिस्से एक पूरी शाम आएगी और एक सुबह, और ये दोनों अलग-अलग तारीखों की हैं। आगे का सारा तर्क इसी तालिका से निकलता है।

नियम: प्रदोष काल में चल रही त्रयोदशी

साइट के पर्व-नियम धनतेरस का दिन उस तिथि से तय करते हैं जो प्रदोष काल में चल रही हो। पर्व-तालिका की हर पंक्ति में प्रदोष एक ही ढंग से निकाला गया है: सूर्यास्त से आरंभ होकर 144 मिनट, यानी 2 घण्टे 24 मिनट। 6 नवम्बर 2026 को नई दिल्ली में यह अवधि 17:32 से 19:56 तक रहेगी। त्रयोदशी उस समय तक 7 घण्टे 01 मिनट से चल रही होगी और अगली सुबह 10:48 से पहले समाप्त नहीं होगी, इसलिए उस शाम का पूरा प्रदोष उसके भीतर पड़ेगा।

7 नवम्बर 2026 को यही कसौटी उलटा परिणाम देगी। उस दिन त्रयोदशी 10:48 पर समाप्त हो जाएगी, सूर्यास्त (17:31) से 6 घण्टे 43 मिनट पहले, और उस शाम का प्रदोष (17:31 से 19:55 तक) पूरा का पूरा चतुर्दशी में पड़ेगा। प्रदोष में त्रयोदशी केवल एक शाम को मिलती है, इसलिए इस नियम के भीतर दो तारीखों के बीच चुनने का प्रश्न नहीं उठता: तालिका का उत्तर 6 नवम्बर है।

6 नवम्बर की सुबह त्रयोदशी नहीं होगी। दैनिक पंचांग उस दिन सूर्योदय 06:36 पर बताता है, और उस क्षण कृष्ण द्वादशी चल रही होगी; त्रयोदशी सूर्योदय के 3 घण्टे 55 मिनट बाद आएगी। प्रदोष वाले नियम पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि वह सुबह को नहीं, संध्या को देखता है।

अगली सुबह: 7 नवम्बर के सूर्योदय पर भी त्रयोदशी

भ्रम यहीं पैदा हो सकता है। दैनिक पंचांग हर दिन के आगे वह तिथि लिखता है जो सूर्योदय पर चल रही हो, और 7 नवम्बर 2026 के आगे वह कृष्ण त्रयोदशी लिखेगा। उस दिन सूर्योदय 06:37 पर होगा, और त्रयोदशी उसके बाद भी 4 घण्टे 11 मिनट तक, यानी 10:48 तक, रहेगी। जो पाठक केवल सूर्योदय की तिथि देखकर धनतेरस ढूँढेगा, वह 7 नवम्बर पर पहुँच सकता है। पर धनतेरस का नियम सूर्योदय का नहीं है, और 7 नवम्बर की शाम त्रयोदशी की नहीं होगी।

वह शाम नरक चतुर्दशी की होगी। चतुर्दशी ठीक उसी क्षण आरंभ होगी जब त्रयोदशी समाप्त होगी, और 7 नवम्बर 2026 का प्रदोष उसी के भीतर रहेगा। तालिका नरक चतुर्दशी को भी प्रदोष वाले नियम से तय करती है, इसलिए वह शनिवार, 7 नवम्बर 2026 को होगी। उस दिन की पूरी गणना नरक चतुर्दशी 2026 पर अलग से दी गई है।

आश्विन कृष्ण पक्ष या कार्तिक कृष्ण पक्ष?

साइट के पर्व-नियम अमान्त गणना में लिखे गए हैं, जिसमें मास अमावस्या पर समाप्त होता है, और उनमें धनतेरस आश्विन के कृष्ण पक्ष की 13वीं तिथि का पर्व है। नाम का “तेरस” इसी तेरहवीं तिथि, त्रयोदशी, का लोक-रूप है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के पंचांग यही अमान्त गणना अपनाते हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के पंचांग पूर्णिमान्त हैं: वहाँ मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है, इसलिए कृष्ण पक्ष की किसी भी तिथि के साथ जो मास लिखा जाता है, वह अमान्त मास से एक आगे का होता है, और यही तिथि वहाँ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी कहलाती है। तिथि एक ही है; 10:31 और 10:48 के क्षण मास के नाम से नहीं बदलते। पूर्णिमान्त कार्तिक के आरंभ और अंत की तारीखें कार्तिक मास 2026 पर हैं।

शहर बदलने पर क्या बदलेगा

सूर्यास्त देशान्तर और अक्षांश के साथ खिसकता है, और प्रदोष उसके साथ खिसकता है। प्रदोष काल वाले पृष्ठ पर 14 शहरों की गणना है, और उसमें 6 नवम्बर 2026 की यही शाम ली गई है: उस शाम सबसे पहले सूर्यास्त गुवाहाटी में होगा और सबसे देर से मुंबई में, और दोनों के बीच 1 घण्टा 24 मिनट का अंतर रहेगा। यह अंतर धनतेरस की तारीख नहीं बदलेगा, क्योंकि तारीख तय करने वाले दोनों अंतराल इससे कहीं बड़े हैं: 6 नवम्बर को त्रयोदशी सूर्यास्त से 7 घण्टे 01 मिनट पहले आरंभ होगी, और 7 नवम्बर को सूर्यास्त से 6 घण्टे 43 मिनट पहले समाप्त हो चुकी होगी। इन 14 शहरों में से हर एक में तारीख यही रहेगी; प्रदोष के घड़ी-समय अपने शहर के पंचांग से लें।

धन्वन्तरि, यम दीपदान और बर्तन ख़रीदने की प्रथा

आयुर्वेद की परंपरा में यह त्रयोदशी धन्वन्तरि जयन्ती के रूप में भी मनाई जाती है। पुराणों की समुद्र-मन्थन कथा में धन्वन्तरि अमृत का कलश लेकर समुद्र से प्रकट होते हैं, और वैद्यों की परंपरा उन्हें आयुर्वेद के देवता के रूप में पूजती है। यह पृष्ठ इस पूजा के किसी फल का दावा नहीं करता।

उत्तर भारत की लोक-परंपरा में धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार के बाहर एक दीया दक्षिण की ओर मुख करके रखा जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। कई परिवार यह दीया अगली शाम, छोटी दिवाली पर, रखते हैं। जो परिवार इसे धनतेरस के प्रदोष में रखते हैं, उनके लिए तालिका का प्रदोष 6 नवम्बर 2026 को 17:32 से 19:56 तक है। इस दीये से क्या टलता है या क्या मिलता है, इस पर यह पृष्ठ कुछ नहीं कहता।

इस दिन बर्तन, या सोने-चाँदी की कोई वस्तु, ख़रीदने का चलन उत्तर भारत की परंपरा में व्यापक है, और कई घरों में इसी दिन नई झाड़ू भी ली जाती है। यह एक प्रथा है, आर्थिक सलाह नहीं। यह पृष्ठ ख़रीदने का कोई समय नहीं देता, और कीमतों या निवेश के बारे में कुछ नहीं कहता।

कुछ पंचांग धनतेरस की पूजा या ख़रीदारी के लिए प्रदोष के भीतर एक और संकरी अवधि छापते हैं, जो स्थिर लग्न से निकाली जाती है। यह पृष्ठ ऐसी कोई अवधि नहीं देता। लग्न का समय शहर के अक्षांश और देशान्तर पर निर्भर है, इसलिए नई दिल्ली के लिए निकाला गया लग्न-समय दूसरे शहर पर लागू नहीं होगा, और इस साइट की पर्व-तालिका में ऐसा कोई स्तम्भ है ही नहीं।

पाँच पर्वों का क्रम

  • धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026
  • नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली: शनिवार, 7 नवम्बर 2026 (गणना)
  • दीपावली / लक्ष्मी पूजा: रविवार, 8 नवम्बर 2026 (गणना)
  • गोवर्धन पूजा: मंगलवार, 10 नवम्बर 2026 (गणना)
  • भाई दूज: बुधवार, 11 नवम्बर 2026 (गणना)

पहले तीन पर्व लगातार तीन तारीखों पर पड़ेंगे, और तीनों प्रदोष वाले नियम से तय होते हैं। दीपावली के अगले दिन, 9 नवम्बर 2026 को, सूर्योदय पर भी अमावस्या रहेगी, और गोवर्धन पूजा का नियम सूर्योदय की तिथि देखता है, इसलिए वह एक दिन छोड़कर 10 नवम्बर को पड़ेगी।

धनतेरस 2027

अगले वर्ष सुबह और शाम का यह अंतर नहीं रहेगा। 2027 में त्रयोदशी बुधवार, 27 अक्तूबर 2027 को 01:03 पर आरंभ होगी और उसी दिन 22:50 पर समाप्त होगी, इसलिए उस दिन का सूर्योदय (06:29) और पूरा प्रदोष (17:40 से 20:04 तक) दोनों उसी के भीतर पड़ेंगे। उस वर्ष की पूरी पंक्ति धनतेरस 2027 पर है।

एक नज़र में

  • धनतेरस (तालिका, प्रदोष नियम): शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026
  • कृष्ण त्रयोदशी: 6 नवम्बर 2026 को 10:31 से 7 नवम्बर 2026 को 10:48 तक
  • सूर्योदय और सूर्यास्त, 6 नवम्बर 2026 (नई दिल्ली): 06:36 और 17:32
  • प्रदोष, 6 नवम्बर 2026 (नई दिल्ली): 17:32-19:56
  • सूर्योदय पर तिथि: 6 नवम्बर को कृष्ण द्वादशी, 7 नवम्बर को कृष्ण त्रयोदशी
  • सूर्योदय पर नक्षत्र, 6 नवम्बर: हस्त; यह पर्व की शर्त नहीं है
  • मास का नाम: आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (अमान्त); कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमान्त)
  • अगले वर्ष: बुधवार, 27 अक्तूबर 2027

दोनों दिनों का पूरा पंचांग 6 नवम्बर 2026 और 7 नवम्बर 2026 के दैनिक पृष्ठों पर है, और बाकी तारीखों के लिए दैनिक पंचांग देखें।

दूसरे शहरों का सूर्यास्त

इस पृष्ठ के घड़ी-समय नई दिल्ली के हैं। निःशुल्क पंचांग उपकरण भी उसी स्थान के लिए गणना करता है, और दूसरे शहरों के सूर्योदय-सूर्यास्त शहरवार पंचांग (अंग्रेज़ी में) में हैं।

पंचांग उपकरण (अंग्रेज़ी में)