त्योहार
दिवाली 2026 कब है: लक्ष्मी पूजा 8 नवम्बर, प्रदोष काल का नियम
प्रकाशित 28 अक्तूबर 2026 | Live Pandit Ji
संक्षिप्त उत्तर: रविवार, 8 नवम्बर 2026
इस साइट की गणना से बनी पर्व-तालिका दीपावली 2026 की लक्ष्मी पूजा को रविवार, 8 नवम्बर 2026 पर रखती है। अमावस्या 8 नवम्बर 2026 को 11:28 पर आरंभ होगी और 9 नवम्बर 2026 को 12:32 पर समाप्त होगी (भारतीय समय)। उस शाम नई दिल्ली में सूर्यास्त 17:31 पर होगा और प्रदोष काल 17:31 से 19:55 तक रहेगा, और यह पूरा प्रदोष अमावस्या के भीतर पड़ेगा। उस दिन का पूरा दैनिक विवरण 8 नवम्बर 2026 के पृष्ठ पर है।
तारीख तय करने वाला नियम: प्रदोष में अमावस्या
तिथि की सीमाएँ घड़ी के किसी भी क्षण पड़ सकती हैं, इसलिए हर पर्व का नियम यह भी बताता है कि तिथि सुबह परखी जाए, दोपहर को या शाम को। तालिका दीपावली पर यह नियम लगाती है: जिस शाम प्रदोष काल में अमावस्या चल रही हो, वही लक्ष्मी पूजा की तारीख होगी। इस तालिका में प्रदोष सूर्यास्त से आरंभ होकर 144 मिनट तक माना गया है; यह अवधि कैसे निकाली जाती है, यह प्रदोष काल वाले लेख में विस्तार से है।
8 नवम्बर को यह कसौटी साफ़ पूरी होगी। सूर्यास्त तक अमावस्या को आरंभ हुए 6 घण्टे 03 मिनट हो चुके होंगे, और प्रदोष के अन्त, 19:55, के बाद भी वह अगली दोपहर तक बनी रहेगी।
9 नवम्बर क्यों नहीं, और 7 नवम्बर क्यों नहीं
इस बार की अमावस्या लगभग एक दिन लम्बी होगी, 25 घण्टे 04 मिनट, इसलिए वह दो तारीखों को छुएगी। दैनिक पंचांग में तिथि सूर्योदय के समय की लिखी जाती है: 8 नवम्बर के सूर्योदय (06:38) पर चतुर्दशी दर्ज है, और 9 नवम्बर के सूर्योदय (06:38) पर अमावस्या। इसलिए जो कैलेंडर केवल सूर्योदय वाला स्तम्भ देखता है, वह 9 नवम्बर 2026 के सामने “अमावस्या” छापेगा। पर लक्ष्मी पूजा शाम का प्रश्न है। 9 नवम्बर को अमावस्या 12:32 पर समाप्त हो जाएगी, सूर्यास्त (17:30) से 4 घण्टे 58 मिनट पहले, और उस शाम के प्रदोष में शुक्ल प्रतिपदा चल रही होगी। इसलिए वह शाम इस नियम पर खरी नहीं उतरेगी।
एक दिन पहले की स्थिति उलटी है। 7 नवम्बर के सूर्यास्त (17:31) पर अमावस्या आरंभ ही नहीं हुई होगी; उस शाम चतुर्दशी रहेगी, और इसी कारण वह शाम नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली की है।
आश्विन अमावस्या या कार्तिक अमावस्या?
तालिका इस पर्व को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के रूप में दर्ज करती है। यह अमान्त गणना है, जिसमें मास अमावस्या पर पूरा होता है; महाराष्ट्र और गुजरात के पंचांग इसी तरह गिनते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे क्षेत्रों के पंचांग पूर्णिमान्त गणना अपनाते हैं, जिसमें कृष्ण पक्ष आगे आने वाले मास के नाम से जुड़ता है, इसलिए वहाँ यही रात कार्तिक अमावस्या कहलाती है। चान्द्र दिन एक ही है, नाम दो। अमान्त गणना में कार्तिक उसी क्षण आरंभ होगा जब यह अमावस्या समाप्त होगी, यानी 9 नवम्बर को 12:32 पर; दोनों पद्धतियों में कार्तिक की अवधि कार्तिक मास 2026 वाले लेख में दी गई है।
पाँच पर्व, 6 तारीखें
तालिका की पाँच पंक्तियों को साथ रखने पर 2026 का क्रम यह बनता है। पहली तीन तारीखें एक ही प्रदोष नियम से तय होंगी, चौथी सूर्योदय से और पाँचवीं मध्याह्न से। सूर्यास्त और प्रदोष हर पंक्ति के लिए नई दिल्ली के हैं; अन्तिम दो पर्वों की तारीख प्रदोष से तय नहीं होती, फिर भी तालिका उनका प्रदोष दर्ज करती है।
| पर्व | तारीख | वार | निर्णायक तिथि (कसौटी) | सूर्यास्त, नई दिल्ली | प्रदोष, नई दिल्ली |
|---|---|---|---|---|---|
| धनतेरस | 6 नवम्बर 2026 | शुक्रवार | कृष्ण त्रयोदशी (प्रदोष) | 17:32 | 17:32 से 19:56 तक |
| छोटी दिवाली | 7 नवम्बर 2026 | शनिवार | कृष्ण चतुर्दशी (प्रदोष) | 17:31 | 17:31 से 19:55 तक |
| लक्ष्मी पूजा | 8 नवम्बर 2026 | रविवार | अमावस्या (प्रदोष) | 17:31 | 17:31 से 19:55 तक |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवम्बर 2026 | मंगलवार | शुक्ल प्रतिपदा (सूर्योदय) | 17:30 | 17:30 से 19:54 तक |
| भाई दूज | 11 नवम्बर 2026 | बुधवार | शुक्ल द्वितीया (मध्याह्न) | 17:29 | 17:29 से 19:53 तक |
धनतेरस की त्रयोदशी 6 नवम्बर को 10:31 पर आरंभ होगी, चतुर्दशी उसी क्षण आएगी जब त्रयोदशी 7 नवम्बर को 10:48 पर समाप्त होगी, और अमावस्या चतुर्दशी के अन्त पर। हर तिथि अपनी शाम के प्रदोष तक पहुँच चुकी होगी, इसलिए ये तीनों पर्व 6 नवम्बर, 7 नवम्बर और 8 नवम्बर की लगातार तीन शामों में आएँगे।
इसके बाद क्रम एक दिन खिसकेगा। गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) इस वर्ष दीपावली के अगले दिन नहीं, 2 दिन बाद, मंगलवार, 10 नवम्बर 2026 को पड़ेगी। कारण तालिका की पंक्ति में ही है: गोवर्धन पूजा की कसौटी सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा है, और प्रतिपदा 9 नवम्बर को 12:32 पर आरंभ होगी, उस दिन के सूर्योदय (06:38) के बाद। 9 नवम्बर की सुबह अमावस्या की होगी, इसलिए प्रतिपदा का पहला सूर्योदय 10 नवम्बर को (06:39) होगा, और वह उस दिन 14:00 तक चलेगी। बीच की तारीख, 9 नवम्बर 2026, पर इन पाँच में से कोई पर्व नहीं पड़ेगा।
भाई दूज की द्वितीया 10 नवम्बर को 14:00 पर आरंभ होगी, यानी उस दिन का मध्याह्न बीत जाने के बाद, और 11 नवम्बर को 15:53 तक चलेगी। मध्याह्न की कसौटी पर यह बुधवार, 11 नवम्बर 2026 को पूरी होगी, इसलिए भाई दूज गोवर्धन पूजा के अगले दिन पड़ेगी।
उसी रात काली पूजा
बंगाल, असम और ओडिशा की परंपरा में इस अमावस्या की रात काली पूजा होती है, और उसकी कसौटी प्रदोष नहीं, आधी रात में चल रही अमावस्या है। इस साइट का काली पूजा वाला लेख वही गणना करता है, और उसके अनुसार 2026 में यह रात भी 8 नवम्बर 2026 की ही होगी, यानी लक्ष्मी पूजा और काली पूजा एक ही रात पड़ेंगी। यह पृष्ठ आधी रात की कोई घड़ी-अवधि नहीं देता; उसका आधार उसी लेख में समझाया गया है।
पूजा की परंपरा, और यह पृष्ठ क्या नहीं छापता
उत्तर भारत की परंपरा में लक्ष्मी पूजा संध्या के बाद की जाती है: घर की सफ़ाई के बाद लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा या चित्र की पूजा होती है, और देहरी, आँगन और छत पर दीये जलाए जाते हैं। व्यापारी परिवारों में इसी शाम बही-खातों की पूजा की रीति भी चलती है। तालिका का प्रदोष नियम भी इसी शाम के समय को देखता है।
कई छपे पंचांग पूजा के लिए प्रदोष के भीतर किसी स्थिर लग्न की एक संकरी अवधि भी देते हैं। यह पृष्ठ ऐसी कोई अवधि नहीं छापता। लग्न का उदय हर शहर के अक्षांश और देशान्तर पर निर्भर करता है, और इस साइट की तालिका उसे नहीं निकालती; किसी एक शहर की ऐसी अवधि दूसरे शहर पर लागू नहीं होती। अपने परिवार की रीति में ऐसी अवधि मानी जाती हो, तो उसे अपने शहर के पंचांग से लें।
शहर बदलने पर क्या बदलेगा
इस पृष्ठ का हर सूर्योदय, सूर्यास्त और प्रदोष नई दिल्ली के लिए है। आपके शहर में सूर्यास्त कुछ मिनट पहले या बाद होगा, और प्रदोष उसी के साथ खिसकेगा। अमावस्या के आरंभ और अन्त के क्षण, 8 नवम्बर को 11:28 और 9 नवम्बर को 12:32, पूरे भारत में भारतीय समय के अनुसार एक ही रहेंगे। इस साइट की शहर-सूची के सभी 38 शहरों में 8 नवम्बर का प्रदोष अमावस्या के भीतर ही पड़ेगा, क्योंकि अमावस्या उस दिन दोपहर से पहले आरंभ होकर अगले दिन दोपहर तक चलेगी; शहरवार सूर्योदय और सूर्यास्त शहरों के पंचांग (अंग्रेज़ी में) में देखे जा सकते हैं।
अगले वर्ष: दीपावली 2027
तालिका 2027 की लक्ष्मी पूजा को शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2027 को रखती है। तब अमावस्या 28 अक्तूबर को 20:48 पर, यानी पिछले दिन के सूर्यास्त के बाद, आरंभ होगी और 29 अक्तूबर को 19:06 पर समाप्त होगी, जो उस दिन के प्रदोष (17:38 से 20:02 तक, नई दिल्ली) के बीच का क्षण है। काली पूजा वाला लेख उस वर्ष आधी रात की अमावस्या 28 अक्तूबर 2027 की रात पर पाता है, यानी 2027 में दोनों पूजाएँ अलग-अलग रातों में पड़ेंगी। पूरी गणना दीपावली 2027 पृष्ठ पर है।
किसी भी तारीख का पंचांग
8 नवम्बर 2026 समेत किसी भी तारीख की सूर्योदय-तिथि, नक्षत्र और सूर्यास्त दैनिक पंचांग में नई दिल्ली के लिए दिए गए हैं। निःशुल्क पंचांग उपकरण भी इसी स्थान की गणना दिखाता है; किसी और शहर का समय वहीं के पंचांग में देखें।
पंचांग उपकरण खोलें (अंग्रेज़ी में)