15 अप्रैल 2026 का पंचांग
बुधवार · नई दिल्ली
कृष्ण पक्ष · पूर्व भाद्रपद नक्षत्र · ब्रह्म योग · गर करण
सूर्योदय 05:56, सूर्यास्त 18:46 — अर्थात् इस दिन का उजाला 12 घण्टे 50 मिनट का है, और नीचे के सातों काल इसी एक जोड़ी समय से निकले हैं। चन्द्र कुम्भ के 27.9° पर खड़ा है, इसलिए इस दिन कर्क का चन्द्राष्टम है — बारह में ठीक एक राशि का, क्योंकि चन्द्र एक समय में एक ही राशि में होता है। सब कुछ JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किया गया है।
पाँच अंग
सूर्योदय पर क्या बदलता है
पंचांग का प्रत्येक अंग वही लिया जाता है जो सूर्योदय के समय चल रहा हो, क्योंकि तिथि दिन की किसी भी घड़ी बदल सकती है और एक तारीख के सामने एक ही नाम लिखना हो तो वह सूर्योदय का नाम होता है। वही सुविधा एक बात छिपा भी देती है: कोई अंग दो सूर्योदय तक टिका रह सकता है, कोई एक ही दिन में बदलकर आगे निकल सकता है। इसीलिए 15 अप्रैल के आगे-पीछे के दिन साथ दिए हैं। प्रत्येक अंग क्या है।
| सूर्योदय पर | 14 अप्रैल | 15 अप्रैल | 16 अप्रैल |
|---|---|---|---|
| तिथि | कृष्ण द्वादशी | कृष्ण त्रयोदशी | कृष्ण चतुर्दशी |
| नक्षत्र | शतभिषा | पूर्व भाद्रपद | उत्तर भाद्रपद |
| योग | शुक्ल | ब्रह्म | इन्द्र |
| करण | कौलव | गर | विष्टि |
| सूर्योदय | 05:57 | 05:56 | 05:54 |
| सूर्यास्त | 18:46 | 18:46 | 18:47 |
| राहु काल | 15:33-17:10 | 12:21-13:57 | 13:57-15:34 |
| वार | मंगलवार | बुधवार | गुरुवार |
बुधवार का स्वामी बुध है, और वार ही वह अंग है जिस पर तीनों त्याज्य काल की जगह टिकी हुई है — नीचे की दो तालिकाएँ वही गिनती खोलकर रख देती हैं।
सात काल
इस दिन के सात काल
घड़ी के क्रम में, प्रत्येक की अवधि साथ में। तीनों त्याज्य काल — यमघण्ट काल, गुलिक काल और राहु काल — इस 12 घण्टे 50 मिनट के दिन के आठवें हिस्से हैं, इसलिए तीनों की लम्बाई इस दिन 1 घण्टा 36 मिनट के आसपास बैठती है; वह अंकगणित अगली तालिका में खुला हुआ है। पंक्तियों का क्रम जान-बूझकर बँधा नहीं रखा गया, क्योंकि राहु काल दिन के किस भाग में पड़ेगा यह वार तय करता है।
| काल | समय (IST) | अवधि |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्तशुभ | 04:20-05:56 | 1 घण्टा 36 मिनट |
| सूर्योदयसामान्य | 05:56 | एक क्षण |
| यमघण्ट कालत्याज्य | 07:32-09:08 | 1 घण्टा 36 मिनट |
| गुलिक कालत्याज्य | 10:45-12:21 | 1 घण्टा 36 मिनट |
| अभिजित मुहूर्तशुभ | 11:55-12:47 | 52 मिनट |
| राहु कालत्याज्य | 12:21-13:57 | 1 घण्टा 36 मिनट |
| सूर्यास्तसामान्य | 18:46 | एक क्षण |
सूर्योदय और सूर्यास्त की अवधि एक क्षण लिखी है और “0 मिनट” नहीं, क्योंकि वे समय-बिन्दु हैं, अवधि नहीं।
आठ भाग
दिन के आठ भाग
सूर्योदय 05:56 से सूर्यास्त 18:46 तक 770 मिनट होते हैं, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 96.3 मिनट का बनता है। आठ में से किन तीन को नाम मिलेगा यह वार तय करता है, और बुधवार को वे यहाँ पड़ते हैं: दूसरा (यमघण्ट काल), चौथा (गुलिक काल) और पाँचवाँ (राहु काल)। यह दिन इस तालिका के सबसे छोटे दिन से 2 घण्टे 31 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन से 1 घण्टा 08 मिनट कम है, और ऊपर का हर काल इसी के साथ खिंचता या सिकुड़ता है। राहु काल कोई अलग से दी गई घड़ी नहीं, इसी बँटवारे का एक भाग है — घटाइए और आठ से भाग दे लीजिए।
| भाग | से | तक | नाम |
|---|---|---|---|
| पहला | 05:56 | 07:32 | — |
| दूसरा | 07:32 | 09:09 | यमघण्ट काल |
| तीसरा | 09:09 | 10:45 | — |
| चौथा | 10:45 | 12:21 | गुलिक काल |
| पाँचवाँ | 12:21 | 13:57 | राहु काल |
| छठा | 13:57 | 15:34 | — |
| सातवाँ | 15:34 | 17:10 | — |
| आठवाँ | 17:10 | 18:46 | — |
जिन पाँच भागों पर नाम नहीं है वे छाँट-कर बचे हुए शुभ भाग नहीं हैं — वे केवल अनामित हैं, और परम्परा उनके विषय में कुछ कहती ही नहीं। किसी दूसरे शहर के लिए यह पूरा बँटवारा उसके अपने सूर्योदय से दोबारा निकालना पड़ता है, जो panchang tool कर देता है।
चन्द्र बल
चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ
एक चन्द्र, और बारह उत्तर। भाव वह दूरी है जो आपकी जन्म राशि से कुम्भ तक गिनी जाती है, इसलिए एक ही आकाश बारह लोगों के लिए बारह अलग बातें कहता है। इस दिन शुभ वर्ग में मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु और कुम्भ पड़ती हैं और त्याज्य वर्ग में कर्क, वृश्चिक और मीन; शेष तीन मध्यम में हैं। अन्तिम स्तम्भ आपका अगला चन्द्राष्टम इसी तारीख से आगे गिनकर देता है।
| जन्म राशि | इस दिन का भाव | क्या दर्शाता है | वर्ग | अगला चन्द्राष्टम |
|---|---|---|---|---|
| ♈︎मेष | ग्यारहवाँ | लाभ — लाभ, आय और सम्पर्क | शुभ | 3 मई |
| ♉︎वृषभ | दसवाँ | कर्म — कर्म, आजीविका और प्रतिष्ठा | शुभ | 6 मई |
| ♊︎मिथुन | नौवाँ | भाग्य — भाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँ | मध्यम | 8 मई |
| ♋︎कर्क | आठवाँ | रन्ध्र — उपद्रव, गुप्त और आयु | त्याज्य · चन्द्राष्टम | इसी दिन |
| ♌︎सिंह | सातवाँ | कलत्र — साझेदारी, जीवनसाथी और व्यापार | शुभ | 16 अप्रैल |
| ♍︎कन्या | छठा | शत्रु — प्रतिस्पर्धा, ऋण और रोग | शुभ | 18 अप्रैल |
| ♎︎तुला | पाँचवाँ | पुत्र — सन्तान, विद्या और सृजन | मध्यम | 20 अप्रैल |
| ♏︎वृश्चिक | चौथा | बन्धु — घर, माता और सुख | त्याज्य | 22 अप्रैल |
| ♐︎धनु | तीसरा | सहज — पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ | शुभ | 24 अप्रैल |
| ♑︎मकर | दूसरा | धन — धन, वाणी और परिवार | मध्यम | 26 अप्रैल |
| ♒︎कुम्भ | पहला | तनु — शरीर और स्वयं | शुभ | 28 अप्रैल |
| ♓︎मीन | बारहवाँ | व्यय — व्यय, त्याग और दूर देश | त्याज्य | 1 मई |
शुभ
पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव
इन दिनों चन्द्र बल नए कार्य के आरम्भ का समर्थन करता माना जाता है। शास्त्रीय प्रयोग सीमित है और सीमित ही रखना चाहिए — यह आरम्भ करने की अनुमति है, परिणाम का वचन नहीं।
मध्यम
दूसरा, पाँचवाँ और नौवाँ भाव
न सहायक, न बाधक। इसी वर्ग पर परम्पराओं में मतभेद है — कुछ नवम को भाग्य का भाव मानकर पूर्णतः शुभ गिनते हैं, और कुछ द्वितीय को अशुभ। यदि कोई दिन महत्त्वपूर्ण है तो उसे तिथि, नक्षत्र और करण तय करते हैं, यह वर्ग नहीं।
त्याज्य
चौथा, आठवाँ और बारहवाँ भाव
परम्परा में किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के आरम्भ के लिए ये नहीं चुने जाते। अष्टम — चन्द्राष्टम — पर सभी परम्पराएँ एकमत हैं; चतुर्थ और द्वादश को अधिकांश, किन्तु सभी नहीं, इसमें गिनते हैं।
कर्क की यह अवधि तब तक चलती है जब तक चन्द्र कुम्भ में है — 15 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर वह वहीं मिलता है, और 16 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर मीन में, जिसके बाद यही अवधि कुम्भ की हो जाती है। राशि-परिवर्तन का क्षण इन दो सूर्योदय के बीच कहीं है; मिनट बता देना उस परिशुद्धता का दावा करना होता जो इस आँकड़े में नहीं है।
तारा बल
तारा बल
मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता; उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं। चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र — और इस दिन गिनती पूर्व भाद्रपद पर आकर रुकती है। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है: हर तारा ठीक तीन जन्म-नक्षत्रों के पास होता है। नीचे दाहिने स्तम्भ में अपना जन्म-नक्षत्र खोजिए।
इस दिन त्याज्य माने गए तीनों तारा — विपत्, प्रत्यरि और वध — उन जातकों पर पड़ते हैं जिनका जन्म-नक्षत्र धनिष्ठा, चित्रा, मृगशिरा, उत्तराषाढ़ा, उत्तर फाल्गुनी, कृत्तिका, मूल, मघा और अश्विनी है। यह सूची कल दूसरी होगी, क्योंकि नक्षत्र बदलते ही पूरा चक्र एक पायदान आगे खिसक जाता है।
| तारा | क्या दर्शाता है | यदि आपका जन्म-नक्षत्र है |
|---|---|---|
| 1. जन्ममिश्र | जन्म-नक्षत्र — सहायक नहीं, तीव्र करने वाला | पूर्व भाद्रपद, विशाखा और पुनर्वसु |
| 2. सम्पत्शुभ | सम्पत्ति; लाभ के लिए किए गए कार्य में सबसे बलवान | शतभिषा, स्वाती और आर्द्रा |
| 3. विपत्त्याज्य | संकट और हानि; आरम्भ या यात्रा के लिए नहीं चुना जाता | धनिष्ठा, चित्रा और मृगशिरा |
| 4. क्षेमशुभ | कुशल-क्षेम; जो टिकना चाहिए उसके लिए, जीतना है उसके लिए नहीं | श्रवण, हस्त और रोहिणी |
| 5. प्रत्यरित्याज्य | बाधा; जहाँ दूसरे पक्ष की सहमति चाहिए वहाँ त्याज्य | उत्तराषाढ़ा, उत्तर फाल्गुनी और कृत्तिका |
| 6. साधकशुभ | सिद्धि; आरम्भ के लिए नहीं, पूर्ण करने के लिए | पूर्वाषाढ़ा, पूर्व फाल्गुनी और भरणी |
| 7. वधत्याज्य | हानि; तीनों में सबसे भारी, पूर्णतः वर्जित | मूल, मघा और अश्विनी |
| 8. मित्रशुभ | मित्रता; वस्तुओं के बजाय व्यक्तियों से व्यवहार के लिए | ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती |
| 9. अति-मित्रशुभ | घनिष्ठ मित्रता, परम मित्र भी; नौ में सबसे कोमल | अनुराधा, पुष्य और उत्तर भाद्रपद |
पूर्व भाद्रपद सूर्योदय का नक्षत्र फिर 12 मई 2026, 9 जून 2026 और 6 जुलाई 2026 को बनता है। अन्तराल ठीक बराबर नहीं मिलेंगे, क्योंकि तालिका में जो नक्षत्र लिखा है वह सूर्योदय के क्षण का है और चन्द्र की गति एक जैसी नहीं रहती। मुफ़्त कुंडली जन्म-नक्षत्र पद के साथ बता देती है।
प्रश्न
15 अप्रैल 2026 के पंचांग पर सामान्य प्रश्न
15 अप्रैल 2026 को तिथि क्या है?+
नई दिल्ली में सूर्योदय (05:56) के समय कृष्ण त्रयोदशी है, और वह कृष्ण पक्ष में पड़ती है। पिछले सूर्योदय पर कृष्ण द्वादशी थी। अगले सूर्योदय तक यह कृष्ण चतुर्दशी हो जाती है। जिस घड़ी यह बदलती है वह यहाँ नहीं दी गई, क्योंकि गणना दिन में एक बार, सूर्योदय पर देखती है।
15 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?+
12:21-13:57 — अर्थात् 1 घण्टा 36 मिनट, जो इस 12 घण्टे 50 मिनट के दिन का आठवाँ भाग है। सूर्योदय (05:56) से सूर्यास्त (18:46) तक के उन आठ भागों में यह पाँचवाँ है, क्योंकि बुधवार को यही भाग राहु के हिस्से आता है। उसी बनावट से यमघण्ट काल 07:32-09:08 और गुलिक काल 10:45-12:21 निकलते हैं।
15 अप्रैल 2026 का दिन कितना लम्बा है, और उसका एक भाग कितना?+
नई दिल्ली में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 12 घण्टे 50 मिनट, अर्थात् 770 मिनट, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 96.3 मिनट का। यह इस दो-वर्षीय तालिका के सबसे छोटे दिन (10 घण्टे 19 मिनट, 17 दिसम्बर 2026) से 2 घण्टे 31 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन (13 घण्टे 58 मिनट, 14 जून 2026) से 1 घण्टा 08 मिनट कम है, और इतना अन्तर ही वह कारण है जिससे एक दिन का राहु काल याद रख लेना काम नहीं देता।
15 अप्रैल 2026 को चन्द्र किस नक्षत्र में है?+
पूर्व भाद्रपद, सूर्योदय के समय, और चन्द्र कुम्भ के 27.9° पर। इसी गणना में यह नक्षत्र सूर्योदय पर फिर 12 मई 2026, 9 जून 2026 और 6 जुलाई 2026 को आता है। अंश इसलिए दिया गया है कि नक्षत्र अकेला राशि तय नहीं करता: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर दो राशियों में बँटे हैं।
15 अप्रैल 2026 को किस राशि का चन्द्राष्टम है?+
कर्क का। चन्द्र कुम्भ में है, और कुम्भ कर्क से आठवीं राशि पड़ती है। 15 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर चन्द्र कुम्भ में ही मिलता है और 16 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर मीन में, जिसके बाद यह अवधि कुम्भ की हो जाती है।
15 अप्रैल 2026 के बाद मेरा अगला चन्द्राष्टम कब है?+
इस दिन से आगे गिनने पर — मेष 3 मई 2026; वृषभ 6 मई 2026; मिथुन 8 मई 2026; कर्क 15 अप्रैल 2026; सिंह 16 अप्रैल 2026; कन्या 18 अप्रैल 2026; तुला 20 अप्रैल 2026; वृश्चिक 22 अप्रैल 2026; धनु 24 अप्रैल 2026; मकर 26 अप्रैल 2026; कुम्भ 28 अप्रैल 2026; मीन 1 मई 2026। हर राशि को चन्द्र मास में एक बार यह अवधि मिलती है, दो या तीन सूर्योदय तक। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं।
क्या 15 अप्रैल 2026 शुभ दिन है?+
किसी एक तारीख का पृष्ठ यह प्रश्न हल नहीं कर सकता, और यह पृष्ठ प्रयास भी नहीं करता। बारह भावों में छह शुभ माने जाते हैं, इसलिए इस दिन बारह राशियों में 6 शुभ स्थिति में हैं — और उसके बाद तारा बल, तिथि, करण, योग और आपकी अपनी कुंडली सब लागू होते हैं। दोनों शास्त्रीय छाननी पार करने वाले दिन किसी एक व्यक्ति के लिए लगभग एक-तिहाई निकलते हैं, इसलिए छाननी असली है और फिर भी भविष्यवाणी नहीं।
यह पंचांग किस स्थान का है और कैसे निकाला गया है?+
नई दिल्ली (28.6139° उत्तर, 77.209° पूर्व) का, JPL DE421 इफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से, 1 जनवरी 2026 से 31 दिसम्बर 2027 तक की गणना में से। किसी दूसरे शहर के लिए घड़ी के समय बदल जाएँगे; तिथि, नक्षत्र, योग और करण नहीं बदलेंगे, क्योंकि वे सूर्य और चन्द्र के अन्तर से बनते हैं, स्थान से नहीं।