24 अप्रैल 2026 का पंचांग
शुक्रवार · नई दिल्ली
शुक्ल पक्ष · पुष्य नक्षत्र · शूल योग · विष्टि करण
सूर्योदय 05:46, सूर्यास्त 18:52 — अर्थात् इस दिन का उजाला 13 घण्टे 06 मिनट का है, और नीचे के सातों काल इसी एक जोड़ी समय से निकले हैं। चन्द्र कर्क के 8.4° पर खड़ा है, इसलिए इस दिन धनु का चन्द्राष्टम है — बारह में ठीक एक राशि का, क्योंकि चन्द्र एक समय में एक ही राशि में होता है। सब कुछ JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किया गया है।
पाँच अंग
सूर्योदय पर क्या बदलता है
पंचांग का प्रत्येक अंग वही लिया जाता है जो सूर्योदय के समय चल रहा हो, क्योंकि तिथि दिन की किसी भी घड़ी बदल सकती है और एक तारीख के सामने एक ही नाम लिखना हो तो वह सूर्योदय का नाम होता है। वही सुविधा एक बात छिपा भी देती है: कोई अंग दो सूर्योदय तक टिका रह सकता है, कोई एक ही दिन में बदलकर आगे निकल सकता है। इसीलिए 24 अप्रैल के आगे-पीछे के दिन साथ दिए हैं। प्रत्येक अंग क्या है।
| सूर्योदय पर | 23 अप्रैल | 24 अप्रैल | 25 अप्रैल |
|---|---|---|---|
| तिथि | शुक्ल सप्तमी | शुक्ल अष्टमी | शुक्ल नवमी |
| नक्षत्र | पुनर्वसु | पुष्य | आश्लेषा |
| योग | सुकर्मा | शूल | गण्ड |
| करण | गर | विष्टि | बालव |
| सूर्योदय | 05:47 | 05:46 | 05:46 |
| सूर्यास्त | 18:51 | 18:52 | 18:52 |
| राहु काल | 13:57-15:35 | 10:41-12:19 | 09:02-10:41 |
| वार | गुरुवार | शुक्रवार | शनिवार |
शुक्रवार का स्वामी शुक्र है, और वार ही वह अंग है जिस पर तीनों त्याज्य काल की जगह टिकी हुई है — नीचे की दो तालिकाएँ वही गिनती खोलकर रख देती हैं।
सात काल
इस दिन के सात काल
घड़ी के क्रम में, प्रत्येक की अवधि साथ में। तीनों त्याज्य काल — यमघण्ट काल, गुलिक काल और राहु काल — इस 13 घण्टे 06 मिनट के दिन के आठवें हिस्से हैं, इसलिए तीनों की लम्बाई इस दिन 1 घण्टा 38 मिनट के आसपास बैठती है; वह अंकगणित अगली तालिका में खुला हुआ है। पंक्तियों का क्रम जान-बूझकर बँधा नहीं रखा गया, क्योंकि राहु काल दिन के किस भाग में पड़ेगा यह वार तय करता है।
| काल | समय (IST) | अवधि |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्तशुभ | 04:10-05:46 | 1 घण्टा 36 मिनट |
| सूर्योदयसामान्य | 05:46 | एक क्षण |
| गुलिक कालत्याज्य | 07:25-09:03 | 1 घण्टा 38 मिनट |
| राहु कालत्याज्य | 10:41-12:19 | 1 घण्टा 38 मिनट |
| अभिजित मुहूर्तशुभ | 11:53-12:45 | 52 मिनट |
| यमघण्ट कालत्याज्य | 15:35-17:13 | 1 घण्टा 38 मिनट |
| सूर्यास्तसामान्य | 18:52 | एक क्षण |
सूर्योदय और सूर्यास्त की अवधि एक क्षण लिखी है और “0 मिनट” नहीं, क्योंकि वे समय-बिन्दु हैं, अवधि नहीं।
आठ भाग
दिन के आठ भाग
सूर्योदय 05:46 से सूर्यास्त 18:52 तक 786 मिनट होते हैं, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 98.3 मिनट का बनता है। आठ में से किन तीन को नाम मिलेगा यह वार तय करता है, और शुक्रवार को वे यहाँ पड़ते हैं: दूसरा (गुलिक काल), चौथा (राहु काल) और सातवाँ (यमघण्ट काल)। यह दिन इस तालिका के सबसे छोटे दिन से 2 घण्टे 47 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन से 52 मिनट कम है, और ऊपर का हर काल इसी के साथ खिंचता या सिकुड़ता है। राहु काल कोई अलग से दी गई घड़ी नहीं, इसी बँटवारे का एक भाग है — घटाइए और आठ से भाग दे लीजिए।
| भाग | से | तक | नाम |
|---|---|---|---|
| पहला | 05:46 | 07:24 | — |
| दूसरा | 07:24 | 09:03 | गुलिक काल |
| तीसरा | 09:03 | 10:41 | — |
| चौथा | 10:41 | 12:19 | राहु काल |
| पाँचवाँ | 12:19 | 13:57 | — |
| छठा | 13:57 | 15:36 | — |
| सातवाँ | 15:36 | 17:14 | यमघण्ट काल |
| आठवाँ | 17:14 | 18:52 | — |
जिन पाँच भागों पर नाम नहीं है वे छाँट-कर बचे हुए शुभ भाग नहीं हैं — वे केवल अनामित हैं, और परम्परा उनके विषय में कुछ कहती ही नहीं। किसी दूसरे शहर के लिए यह पूरा बँटवारा उसके अपने सूर्योदय से दोबारा निकालना पड़ता है, जो panchang tool कर देता है।
चन्द्र बल
चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ
एक चन्द्र, और बारह उत्तर। भाव वह दूरी है जो आपकी जन्म राशि से कर्क तक गिनी जाती है, इसलिए एक ही आकाश बारह लोगों के लिए बारह अलग बातें कहता है। इस दिन शुभ वर्ग में वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर और कुम्भ पड़ती हैं और त्याज्य वर्ग में मेष, सिंह और धनु; शेष तीन मध्यम में हैं। अन्तिम स्तम्भ आपका अगला चन्द्राष्टम इसी तारीख से आगे गिनकर देता है।
| जन्म राशि | इस दिन का भाव | क्या दर्शाता है | वर्ग | अगला चन्द्राष्टम |
|---|---|---|---|---|
| ♈︎मेष | चौथा | बन्धु — घर, माता और सुख | त्याज्य | 3 मई |
| ♉︎वृषभ | तीसरा | सहज — पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ | शुभ | 6 मई |
| ♊︎मिथुन | दूसरा | धन — धन, वाणी और परिवार | मध्यम | 8 मई |
| ♋︎कर्क | पहला | तनु — शरीर और स्वयं | शुभ | 11 मई |
| ♌︎सिंह | बारहवाँ | व्यय — व्यय, त्याग और दूर देश | त्याज्य | 13 मई |
| ♍︎कन्या | ग्यारहवाँ | लाभ — लाभ, आय और सम्पर्क | शुभ | 15 मई |
| ♎︎तुला | दसवाँ | कर्म — कर्म, आजीविका और प्रतिष्ठा | शुभ | 17 मई |
| ♏︎वृश्चिक | नौवाँ | भाग्य — भाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँ | मध्यम | 19 मई |
| ♐︎धनु | आठवाँ | रन्ध्र — उपद्रव, गुप्त और आयु | त्याज्य · चन्द्राष्टम | इसी दिन |
| ♑︎मकर | सातवाँ | कलत्र — साझेदारी, जीवनसाथी और व्यापार | शुभ | 26 अप्रैल |
| ♒︎कुम्भ | छठा | शत्रु — प्रतिस्पर्धा, ऋण और रोग | शुभ | 28 अप्रैल |
| ♓︎मीन | पाँचवाँ | पुत्र — सन्तान, विद्या और सृजन | मध्यम | 1 मई |
शुभ
पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव
इन दिनों चन्द्र बल नए कार्य के आरम्भ का समर्थन करता माना जाता है। शास्त्रीय प्रयोग सीमित है और सीमित ही रखना चाहिए — यह आरम्भ करने की अनुमति है, परिणाम का वचन नहीं।
मध्यम
दूसरा, पाँचवाँ और नौवाँ भाव
न सहायक, न बाधक। इसी वर्ग पर परम्पराओं में मतभेद है — कुछ नवम को भाग्य का भाव मानकर पूर्णतः शुभ गिनते हैं, और कुछ द्वितीय को अशुभ। यदि कोई दिन महत्त्वपूर्ण है तो उसे तिथि, नक्षत्र और करण तय करते हैं, यह वर्ग नहीं।
त्याज्य
चौथा, आठवाँ और बारहवाँ भाव
परम्परा में किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के आरम्भ के लिए ये नहीं चुने जाते। अष्टम — चन्द्राष्टम — पर सभी परम्पराएँ एकमत हैं; चतुर्थ और द्वादश को अधिकांश, किन्तु सभी नहीं, इसमें गिनते हैं।
धनु की यह अवधि तब तक चलती है जब तक चन्द्र कर्क में है — 25 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर वह वहीं मिलता है, और 26 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर सिंह में, जिसके बाद यही अवधि कर्क की हो जाती है। राशि-परिवर्तन का क्षण इन दो सूर्योदय के बीच कहीं है; मिनट बता देना उस परिशुद्धता का दावा करना होता जो इस आँकड़े में नहीं है।
तारा बल
तारा बल
मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता; उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं। चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र — और इस दिन गिनती पुष्य पर आकर रुकती है। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है: हर तारा ठीक तीन जन्म-नक्षत्रों के पास होता है। नीचे दाहिने स्तम्भ में अपना जन्म-नक्षत्र खोजिए।
इस दिन त्याज्य माने गए तीनों तारा — विपत्, प्रत्यरि और वध — उन जातकों पर पड़ते हैं जिनका जन्म-नक्षत्र आर्द्रा, शतभिषा, स्वाती, रोहिणी, श्रवण, हस्त, भरणी, पूर्वाषाढ़ा और पूर्व फाल्गुनी है। यह सूची कल दूसरी होगी, क्योंकि नक्षत्र बदलते ही पूरा चक्र एक पायदान आगे खिसक जाता है।
| तारा | क्या दर्शाता है | यदि आपका जन्म-नक्षत्र है |
|---|---|---|
| 1. जन्ममिश्र | जन्म-नक्षत्र — सहायक नहीं, तीव्र करने वाला | पुष्य, उत्तर भाद्रपद और अनुराधा |
| 2. सम्पत्शुभ | सम्पत्ति; लाभ के लिए किए गए कार्य में सबसे बलवान | पुनर्वसु, पूर्व भाद्रपद और विशाखा |
| 3. विपत्त्याज्य | संकट और हानि; आरम्भ या यात्रा के लिए नहीं चुना जाता | आर्द्रा, शतभिषा और स्वाती |
| 4. क्षेमशुभ | कुशल-क्षेम; जो टिकना चाहिए उसके लिए, जीतना है उसके लिए नहीं | मृगशिरा, धनिष्ठा और चित्रा |
| 5. प्रत्यरित्याज्य | बाधा; जहाँ दूसरे पक्ष की सहमति चाहिए वहाँ त्याज्य | रोहिणी, श्रवण और हस्त |
| 6. साधकशुभ | सिद्धि; आरम्भ के लिए नहीं, पूर्ण करने के लिए | कृत्तिका, उत्तराषाढ़ा और उत्तर फाल्गुनी |
| 7. वधत्याज्य | हानि; तीनों में सबसे भारी, पूर्णतः वर्जित | भरणी, पूर्वाषाढ़ा और पूर्व फाल्गुनी |
| 8. मित्रशुभ | मित्रता; वस्तुओं के बजाय व्यक्तियों से व्यवहार के लिए | अश्विनी, मूल और मघा |
| 9. अति-मित्रशुभ | घनिष्ठ मित्रता, परम मित्र भी; नौ में सबसे कोमल | रेवती, ज्येष्ठा और आश्लेषा |
पुष्य सूर्योदय का नक्षत्र फिर 21 मई 2026, 18 जून 2026 और 15 जुलाई 2026 को बनता है। अन्तराल ठीक बराबर नहीं मिलेंगे, क्योंकि तालिका में जो नक्षत्र लिखा है वह सूर्योदय के क्षण का है और चन्द्र की गति एक जैसी नहीं रहती। मुफ़्त कुंडली जन्म-नक्षत्र पद के साथ बता देती है।
प्रश्न
24 अप्रैल 2026 के पंचांग पर सामान्य प्रश्न
24 अप्रैल 2026 को तिथि क्या है?+
नई दिल्ली में सूर्योदय (05:46) के समय शुक्ल अष्टमी है, और वह शुक्ल पक्ष में पड़ती है। पिछले सूर्योदय पर शुक्ल सप्तमी थी। अगले सूर्योदय तक यह शुक्ल नवमी हो जाती है। जिस घड़ी यह बदलती है वह यहाँ नहीं दी गई, क्योंकि गणना दिन में एक बार, सूर्योदय पर देखती है।
24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?+
10:41-12:19 — अर्थात् 1 घण्टा 38 मिनट, जो इस 13 घण्टे 06 मिनट के दिन का आठवाँ भाग है। सूर्योदय (05:46) से सूर्यास्त (18:52) तक के उन आठ भागों में यह चौथा है, क्योंकि शुक्रवार को यही भाग राहु के हिस्से आता है। उसी बनावट से यमघण्ट काल 15:35-17:13 और गुलिक काल 07:25-09:03 निकलते हैं।
24 अप्रैल 2026 का दिन कितना लम्बा है, और उसका एक भाग कितना?+
नई दिल्ली में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 13 घण्टे 06 मिनट, अर्थात् 786 मिनट, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 98.3 मिनट का। यह इस दो-वर्षीय तालिका के सबसे छोटे दिन (10 घण्टे 19 मिनट, 17 दिसम्बर 2026) से 2 घण्टे 47 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन (13 घण्टे 58 मिनट, 14 जून 2026) से 52 मिनट कम है, और इतना अन्तर ही वह कारण है जिससे एक दिन का राहु काल याद रख लेना काम नहीं देता।
24 अप्रैल 2026 को चन्द्र किस नक्षत्र में है?+
पुष्य, सूर्योदय के समय, और चन्द्र कर्क के 8.4° पर। इसी गणना में यह नक्षत्र सूर्योदय पर फिर 21 मई 2026, 18 जून 2026 और 15 जुलाई 2026 को आता है। अंश इसलिए दिया गया है कि नक्षत्र अकेला राशि तय नहीं करता: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर दो राशियों में बँटे हैं।
24 अप्रैल 2026 को किस राशि का चन्द्राष्टम है?+
धनु का। चन्द्र कर्क में है, और कर्क धनु से आठवीं राशि पड़ती है। 25 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर चन्द्र कर्क में ही मिलता है और 26 अप्रैल 2026 के सूर्योदय पर सिंह में, जिसके बाद यह अवधि कर्क की हो जाती है।
24 अप्रैल 2026 के बाद मेरा अगला चन्द्राष्टम कब है?+
इस दिन से आगे गिनने पर — मेष 3 मई 2026; वृषभ 6 मई 2026; मिथुन 8 मई 2026; कर्क 11 मई 2026; सिंह 13 मई 2026; कन्या 15 मई 2026; तुला 17 मई 2026; वृश्चिक 19 मई 2026; धनु 24 अप्रैल 2026; मकर 26 अप्रैल 2026; कुम्भ 28 अप्रैल 2026; मीन 1 मई 2026। हर राशि को चन्द्र मास में एक बार यह अवधि मिलती है, दो या तीन सूर्योदय तक। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं।
क्या 24 अप्रैल 2026 शुभ दिन है?+
किसी एक तारीख का पृष्ठ यह प्रश्न हल नहीं कर सकता, और यह पृष्ठ प्रयास भी नहीं करता। बारह भावों में छह शुभ माने जाते हैं, इसलिए इस दिन बारह राशियों में 6 शुभ स्थिति में हैं — और उसके बाद तारा बल, तिथि, करण, योग और आपकी अपनी कुंडली सब लागू होते हैं। दोनों शास्त्रीय छाननी पार करने वाले दिन किसी एक व्यक्ति के लिए लगभग एक-तिहाई निकलते हैं, इसलिए छाननी असली है और फिर भी भविष्यवाणी नहीं।
यह पंचांग किस स्थान का है और कैसे निकाला गया है?+
नई दिल्ली (28.6139° उत्तर, 77.209° पूर्व) का, JPL DE421 इफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से, 1 जनवरी 2026 से 31 दिसम्बर 2027 तक की गणना में से। किसी दूसरे शहर के लिए घड़ी के समय बदल जाएँगे; तिथि, नक्षत्र, योग और करण नहीं बदलेंगे, क्योंकि वे सूर्य और चन्द्र के अन्तर से बनते हैं, स्थान से नहीं।