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26 जुलाई 2026 का पंचांग

रविवार · नई दिल्ली

शुक्ल द्वादशी

शुक्ल पक्ष · ज्येष्ठा नक्षत्र · इन्द्र योग · बालव करण

सूर्योदय 05:39, सूर्यास्त 19:15 — अर्थात् इस दिन का उजाला 13 घण्टे 36 मिनट का है, और नीचे के सातों काल इसी एक जोड़ी समय से निकले हैं। चन्द्र वृश्चिक के 29° पर खड़ा है, इसलिए इस दिन मेष का चन्द्राष्टम है — बारह में ठीक एक राशि का, क्योंकि चन्द्र एक समय में एक ही राशि में होता है। सब कुछ JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किया गया है।

पाँच अंग

सूर्योदय पर क्या बदलता है

पंचांग का प्रत्येक अंग वही लिया जाता है जो सूर्योदय के समय चल रहा हो, क्योंकि तिथि दिन की किसी भी घड़ी बदल सकती है और एक तारीख के सामने एक ही नाम लिखना हो तो वह सूर्योदय का नाम होता है। वही सुविधा एक बात छिपा भी देती है: कोई अंग दो सूर्योदय तक टिका रह सकता है, कोई एक ही दिन में बदलकर आगे निकल सकता है। इसीलिए 26 जुलाई के आगे-पीछे के दिन साथ दिए हैं। प्रत्येक अंग क्या है।

26 जुलाई 2026 के पाँच अंग और दिन की सीमाएँ, आगे-पीछे के दिनों के साथ, नई दिल्ली के लिए
सूर्योदय पर25 जुलाई26 जुलाई27 जुलाई
तिथिशुक्ल एकादशीशुक्ल द्वादशीशुक्ल त्रयोदशी
नक्षत्रज्येष्ठाज्येष्ठामूल
योगब्रह्मइन्द्रवैधृति
करणविष्टिबालवतैतिल
सूर्योदय05:3805:3905:39
सूर्यास्त19:1619:1519:15
राहु काल09:03-10:4517:33-19:1507:21-09:03
वारशनिवाररविवारसोमवार

रविवार का स्वामी सूर्य है, और वार ही वह अंग है जिस पर तीनों त्याज्य काल की जगह टिकी हुई है — नीचे की दो तालिकाएँ वही गिनती खोलकर रख देती हैं।

सात काल

इस दिन के सात काल

घड़ी के क्रम में, प्रत्येक की अवधि साथ में। तीनों त्याज्य काल — यमघण्ट काल, गुलिक काल और राहु काल — इस 13 घण्टे 36 मिनट के दिन के आठवें हिस्से हैं, इसलिए तीनों की लम्बाई इस दिन 1 घण्टा 42 मिनट के आसपास बैठती है; वह अंकगणित अगली तालिका में खुला हुआ है। पंक्तियों का क्रम जान-बूझकर बँधा नहीं रखा गया, क्योंकि राहु काल दिन के किस भाग में पड़ेगा यह वार तय करता है।

26 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय, सूर्यास्त और पाँच मुहूर्त काल
कालसमय (IST)अवधि
ब्रह्म मुहूर्तशुभ04:03-05:391 घण्टा 36 मिनट
सूर्योदयसामान्य05:39एक क्षण
अभिजित मुहूर्तशुभ12:00-12:5454 मिनट
यमघण्ट कालत्याज्य12:27-14:091 घण्टा 42 मिनट
गुलिक कालत्याज्य15:51-17:331 घण्टा 42 मिनट
राहु कालत्याज्य17:33-19:151 घण्टा 42 मिनट
सूर्यास्तसामान्य19:15एक क्षण

सूर्योदय और सूर्यास्त की अवधि एक क्षण लिखी है और “0 मिनट” नहीं, क्योंकि वे समय-बिन्दु हैं, अवधि नहीं।

आठ भाग

दिन के आठ भाग

सूर्योदय 05:39 से सूर्यास्त 19:15 तक 816 मिनट होते हैं, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 102.0 मिनट का बनता है। आठ में से किन तीन को नाम मिलेगा यह वार तय करता है, और रविवार को वे यहाँ पड़ते हैं: पाँचवाँ (यमघण्ट काल), सातवाँ (गुलिक काल) और आठवाँ (राहु काल)। यह दिन इस तालिका के सबसे छोटे दिन से 3 घण्टे 17 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन से 22 मिनट कम है, और ऊपर का हर काल इसी के साथ खिंचता या सिकुड़ता है। राहु काल कोई अलग से दी गई घड़ी नहीं, इसी बँटवारे का एक भाग है — घटाइए और आठ से भाग दे लीजिए।

26 जुलाई 2026 को सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन के आठ बराबर भाग और उनमें नामित तीन काल
भागसेतकनाम
पहला05:3907:21—
दूसरा07:2109:03—
तीसरा09:0310:45—
चौथा10:4512:27—
पाँचवाँ12:2714:09यमघण्ट काल
छठा14:0915:51—
सातवाँ15:5117:33गुलिक काल
आठवाँ17:3319:15राहु काल

जिन पाँच भागों पर नाम नहीं है वे छाँट-कर बचे हुए शुभ भाग नहीं हैं — वे केवल अनामित हैं, और परम्परा उनके विषय में कुछ कहती ही नहीं। किसी दूसरे शहर के लिए यह पूरा बँटवारा उसके अपने सूर्योदय से दोबारा निकालना पड़ता है, जो panchang tool कर देता है।

चन्द्र बल

चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ

एक चन्द्र, और बारह उत्तर। भाव वह दूरी है जो आपकी जन्म राशि से वृश्चिक तक गिनी जाती है, इसलिए एक ही आकाश बारह लोगों के लिए बारह अलग बातें कहता है। इस दिन शुभ वर्ग में वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर और कुम्भ पड़ती हैं और त्याज्य वर्ग में मेष, सिंह और धनु; शेष तीन मध्यम में हैं। अन्तिम स्तम्भ आपका अगला चन्द्राष्टम इसी तारीख से आगे गिनकर देता है।

26 जुलाई 2026 को चन्द्र जिस भाव में है, बारहों जन्म राशियों से गिनकर, और प्रत्येक राशि का अगला चन्द्राष्टम
जन्म राशिइस दिन का भावक्या दर्शाता हैवर्गअगला चन्द्राष्टम
♈︎मेषआठवाँरन्ध्र — उपद्रव, गुप्त और आयुत्याज्य · चन्द्राष्टमइसी दिन
♉︎वृषभसातवाँकलत्र — साझेदारी, जीवनसाथी और व्यापारशुभ27 जुलाई
♊︎मिथुनछठाशत्रु — प्रतिस्पर्धा, ऋण और रोगशुभ29 जुलाई
♋︎कर्कपाँचवाँपुत्र — सन्तान, विद्या और सृजनमध्यम1 अगस्त
♌︎सिंहचौथाबन्धु — घर, माता और सुखत्याज्य3 अगस्त
♍︎कन्यातीसरासहज — पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँशुभ5 अगस्त
♎︎तुलादूसराधन — धन, वाणी और परिवारमध्यम7 अगस्त
♏︎वृश्चिकपहलातनु — शरीर और स्वयंशुभ9 अगस्त
♐︎धनुबारहवाँव्यय — व्यय, त्याग और दूर देशत्याज्य11 अगस्त
♑︎मकरग्यारहवाँलाभ — लाभ, आय और सम्पर्कशुभ14 अगस्त
♒︎कुम्भदसवाँकर्म — कर्म, आजीविका और प्रतिष्ठाशुभ16 अगस्त
♓︎मीननौवाँभाग्य — भाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँमध्यम18 अगस्त

शुभ

पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव

इन दिनों चन्द्र बल नए कार्य के आरम्भ का समर्थन करता माना जाता है। शास्त्रीय प्रयोग सीमित है और सीमित ही रखना चाहिए — यह आरम्भ करने की अनुमति है, परिणाम का वचन नहीं।

मध्यम

दूसरा, पाँचवाँ और नौवाँ भाव

न सहायक, न बाधक। इसी वर्ग पर परम्पराओं में मतभेद है — कुछ नवम को भाग्य का भाव मानकर पूर्णतः शुभ गिनते हैं, और कुछ द्वितीय को अशुभ। यदि कोई दिन महत्त्वपूर्ण है तो उसे तिथि, नक्षत्र और करण तय करते हैं, यह वर्ग नहीं।

त्याज्य

चौथा, आठवाँ और बारहवाँ भाव

परम्परा में किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के आरम्भ के लिए ये नहीं चुने जाते। अष्टम — चन्द्राष्टम — पर सभी परम्पराएँ एकमत हैं; चतुर्थ और द्वादश को अधिकांश, किन्तु सभी नहीं, इसमें गिनते हैं।

मेष की यह अवधि तब तक चलती है जब तक चन्द्र वृश्चिक में है — 26 जुलाई 2026 के सूर्योदय पर वह वहीं मिलता है, और 27 जुलाई 2026 के सूर्योदय पर धनु में, जिसके बाद यही अवधि वृश्चिक की हो जाती है। राशि-परिवर्तन का क्षण इन दो सूर्योदय के बीच कहीं है; मिनट बता देना उस परिशुद्धता का दावा करना होता जो इस आँकड़े में नहीं है।

तारा बल

तारा बल

मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता; उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं। चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र — और इस दिन गिनती ज्येष्ठा पर आकर रुकती है। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है: हर तारा ठीक तीन जन्म-नक्षत्रों के पास होता है। नीचे दाहिने स्तम्भ में अपना जन्म-नक्षत्र खोजिए।

इस दिन त्याज्य माने गए तीनों तारा — विपत्, प्रत्यरि और वध — उन जातकों पर पड़ते हैं जिनका जन्म-नक्षत्र विशाखा, पुनर्वसु, पूर्व भाद्रपद, चित्रा, मृगशिरा, धनिष्ठा, उत्तर फाल्गुनी, कृत्तिका और उत्तराषाढ़ा है। यह सूची कल दूसरी होगी, क्योंकि नक्षत्र बदलते ही पूरा चक्र एक पायदान आगे खिसक जाता है।

26 जुलाई 2026 के नौ तारा और वे जन्म-नक्षत्र जिनसे प्रत्येक तक गिनती पहुँचती है
ताराक्या दर्शाता हैयदि आपका जन्म-नक्षत्र है
1. जन्ममिश्रजन्म-नक्षत्र — सहायक नहीं, तीव्र करने वालाज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती
2. सम्पत्शुभसम्पत्ति; लाभ के लिए किए गए कार्य में सबसे बलवानअनुराधा, पुष्य और उत्तर भाद्रपद
3. विपत्त्याज्यसंकट और हानि; आरम्भ या यात्रा के लिए नहीं चुना जाताविशाखा, पुनर्वसु और पूर्व भाद्रपद
4. क्षेमशुभकुशल-क्षेम; जो टिकना चाहिए उसके लिए, जीतना है उसके लिए नहींस्वाती, आर्द्रा और शतभिषा
5. प्रत्यरित्याज्यबाधा; जहाँ दूसरे पक्ष की सहमति चाहिए वहाँ त्याज्यचित्रा, मृगशिरा और धनिष्ठा
6. साधकशुभसिद्धि; आरम्भ के लिए नहीं, पूर्ण करने के लिएहस्त, रोहिणी और श्रवण
7. वधत्याज्यहानि; तीनों में सबसे भारी, पूर्णतः वर्जितउत्तर फाल्गुनी, कृत्तिका और उत्तराषाढ़ा
8. मित्रशुभमित्रता; वस्तुओं के बजाय व्यक्तियों से व्यवहार के लिएपूर्व फाल्गुनी, भरणी और पूर्वाषाढ़ा
9. अतिमित्रशुभघनिष्ठ मित्रता, परम मित्र भी; नौ में सबसे कोमलमघा, अश्विनी और मूल

ज्येष्ठा सूर्योदय का नक्षत्र फिर 22 अगस्त 2026, 18 सितम्बर 2026 और 15 अक्तूबर 2026 को बनता है। अन्तराल ठीक बराबर नहीं मिलेंगे, क्योंकि तालिका में जो नक्षत्र लिखा है वह सूर्योदय के क्षण का है और चन्द्र की गति एक जैसी नहीं रहती। मुफ़्त कुंडली जन्म-नक्षत्र पद के साथ बता देती है।

प्रश्न

26 जुलाई 2026 के पंचांग पर सामान्य प्रश्न

26 जुलाई 2026 को तिथि क्या है?+

नई दिल्ली में सूर्योदय (05:39) के समय शुक्ल द्वादशी है, और वह शुक्ल पक्ष में पड़ती है। पिछले सूर्योदय पर शुक्ल एकादशी थी। अगले सूर्योदय तक यह शुक्ल त्रयोदशी हो जाती है। जिस घड़ी यह बदलती है वह यहाँ नहीं दी गई, क्योंकि गणना दिन में एक बार, सूर्योदय पर देखती है।

26 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?+

17:33-19:15 — अर्थात् 1 घण्टा 42 मिनट, जो इस 13 घण्टे 36 मिनट के दिन का आठवाँ भाग है। सूर्योदय (05:39) से सूर्यास्त (19:15) तक के उन आठ भागों में यह आठवाँ है, क्योंकि रविवार को यही भाग राहु के हिस्से आता है। उसी बनावट से यमघण्ट काल 12:27-14:09 और गुलिक काल 15:51-17:33 निकलते हैं।

26 जुलाई 2026 का दिन कितना लम्बा है, और उसका एक भाग कितना?+

नई दिल्ली में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 13 घण्टे 36 मिनट, अर्थात् 816 मिनट, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 102.0 मिनट का। यह इस दो-वर्षीय तालिका के सबसे छोटे दिन (10 घण्टे 19 मिनट, 17 दिसम्बर 2026) से 3 घण्टे 17 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन (13 घण्टे 58 मिनट, 14 जून 2026) से 22 मिनट कम है, और इतना अन्तर ही वह कारण है जिससे एक दिन का राहु काल याद रख लेना काम नहीं देता।

26 जुलाई 2026 को चन्द्र किस नक्षत्र में है?+

ज्येष्ठा, सूर्योदय के समय, और चन्द्र वृश्चिक के 29° पर। इसी गणना में यह नक्षत्र सूर्योदय पर फिर 22 अगस्त 2026, 18 सितम्बर 2026 और 15 अक्तूबर 2026 को आता है। अंश इसलिए दिया गया है कि नक्षत्र अकेला राशि तय नहीं करता: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर दो राशियों में बँटे हैं।

26 जुलाई 2026 को किस राशि का चन्द्राष्टम है?+

मेष का। चन्द्र वृश्चिक में है, और वृश्चिक मेष से आठवीं राशि पड़ती है। 26 जुलाई 2026 के सूर्योदय पर चन्द्र वृश्चिक में ही मिलता है और 27 जुलाई 2026 के सूर्योदय पर धनु में, जिसके बाद यह अवधि वृश्चिक की हो जाती है।

26 जुलाई 2026 के बाद मेरा अगला चन्द्राष्टम कब है?+

इस दिन से आगे गिनने पर — मेष 26 जुलाई 2026; वृषभ 27 जुलाई 2026; मिथुन 29 जुलाई 2026; कर्क 1 अगस्त 2026; सिंह 3 अगस्त 2026; कन्या 5 अगस्त 2026; तुला 7 अगस्त 2026; वृश्चिक 9 अगस्त 2026; धनु 11 अगस्त 2026; मकर 14 अगस्त 2026; कुम्भ 16 अगस्त 2026; मीन 18 अगस्त 2026। हर राशि को चन्द्र मास में एक बार यह अवधि मिलती है, दो या तीन सूर्योदय तक। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं।

क्या 26 जुलाई 2026 शुभ दिन है?+

किसी एक तारीख का पृष्ठ यह प्रश्न हल नहीं कर सकता, और यह पृष्ठ प्रयास भी नहीं करता। बारह भावों में छह शुभ माने जाते हैं, इसलिए इस दिन बारह राशियों में 6 शुभ स्थिति में हैं — और उसके बाद तारा बल, तिथि, करण, योग और आपकी अपनी कुंडली सब लागू होते हैं। दोनों शास्त्रीय छाननी पार करने वाले दिन किसी एक व्यक्ति के लिए लगभग एक-तिहाई निकलते हैं, इसलिए छाननी असली है और फिर भी भविष्यवाणी नहीं।

यह पंचांग किस स्थान का है और कैसे निकाला गया है?+

नई दिल्ली (28.6139° उत्तर, 77.209° पूर्व) का, JPL DE421 इफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से, 1 जनवरी 2026 से 31 दिसम्बर 2027 तक की गणना में से। किसी दूसरे शहर के लिए घड़ी के समय बदल जाएँगे; तिथि, नक्षत्र, योग और करण नहीं बदलेंगे, क्योंकि वे सूर्य और चन्द्र के अन्तर से बनते हैं, स्थान से नहीं।