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20 अक्तूबर 2026 का पंचांग

मंगलवार · नई दिल्ली

शुक्ल नवमी

शुक्ल पक्ष · श्रवण नक्षत्र · शूल योग · कौलव करण

सूर्योदय 06:24, सूर्यास्त 17:46 — अर्थात् इस दिन का उजाला 11 घण्टे 22 मिनट का है, और नीचे के सातों काल इसी एक जोड़ी समय से निकले हैं। चन्द्र मकर के 17.4° पर खड़ा है, इसलिए इस दिन मिथुन का चन्द्राष्टम है — बारह में ठीक एक राशि का, क्योंकि चन्द्र एक समय में एक ही राशि में होता है। सब कुछ JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किया गया है।

पाँच अंग

सूर्योदय पर क्या बदलता है

पंचांग का प्रत्येक अंग वही लिया जाता है जो सूर्योदय के समय चल रहा हो, क्योंकि तिथि दिन की किसी भी घड़ी बदल सकती है और एक तारीख के सामने एक ही नाम लिखना हो तो वह सूर्योदय का नाम होता है। वही सुविधा एक बात छिपा भी देती है: कोई अंग दो सूर्योदय तक टिका रह सकता है, कोई एक ही दिन में बदलकर आगे निकल सकता है। इसीलिए 20 अक्तूबर के आगे-पीछे के दिन साथ दिए हैं। प्रत्येक अंग क्या है

20 अक्तूबर 2026 के पाँच अंग और दिन की सीमाएँ, आगे-पीछे के दिनों के साथ, नई दिल्ली के लिए
सूर्योदय पर19 अक्तूबर20 अक्तूबर21 अक्तूबर
तिथिशुक्ल अष्टमीशुक्ल नवमीशुक्ल दशमी
नक्षत्रउत्तराषाढ़ाश्रवणधनिष्ठा
योगधृतिशूलगण्ड
करणबवकौलवगर
सूर्योदय06:2406:2406:25
सूर्यास्त17:4717:4617:45
राहु काल07:49-09:1514:56-16:2112:05-13:30
वारसोमवारमंगलवारबुधवार

मंगलवार का स्वामी मंगल है, और वार ही वह अंग है जिस पर तीनों त्याज्य काल की जगह टिकी हुई है — नीचे की दो तालिकाएँ वही गिनती खोलकर रख देती हैं।

सात काल

इस दिन के सात काल

घड़ी के क्रम में, प्रत्येक की अवधि साथ में। तीनों त्याज्य काल — यमघण्ट काल, गुलिक काल और राहु काल — इस 11 घण्टे 22 मिनट के दिन के आठवें हिस्से हैं, इसलिए तीनों की लम्बाई इस दिन 1 घण्टा 25 मिनट के आसपास बैठती है; वह अंकगणित अगली तालिका में खुला हुआ है। पंक्तियों का क्रम जान-बूझकर बँधा नहीं रखा गया, क्योंकि राहु काल दिन के किस भाग में पड़ेगा यह वार तय करता है।

20 अक्तूबर 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय, सूर्यास्त और पाँच मुहूर्त काल
कालसमय (IST)अवधि
ब्रह्म मुहूर्तशुभ04:48-06:241 घण्टा 36 मिनट
सूर्योदयसामान्य06:24एक क्षण
यमघण्ट कालत्याज्य09:15-10:401 घण्टा 25 मिनट
अभिजित मुहूर्तशुभ11:43-12:2845 मिनट
गुलिक कालत्याज्य12:05-13:311 घण्टा 26 मिनट
राहु कालत्याज्य14:56-16:211 घण्टा 25 मिनट
सूर्यास्तसामान्य17:46एक क्षण

सूर्योदय और सूर्यास्त की अवधि एक क्षण लिखी है और “0 मिनट” नहीं, क्योंकि वे समय-बिन्दु हैं, अवधि नहीं।

आठ भाग

दिन के आठ भाग

सूर्योदय 06:24 से सूर्यास्त 17:46 तक 682 मिनट होते हैं, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 85.3 मिनट का बनता है। आठ में से किन तीन को नाम मिलेगा यह वार तय करता है, और मंगलवार को वे यहाँ पड़ते हैं: तीसरा (यमघण्ट काल), पाँचवाँ (गुलिक काल) और सातवाँ (राहु काल)। यह दिन इस तालिका के सबसे छोटे दिन से 1 घण्टा 03 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन से 2 घण्टे 36 मिनट कम है, और ऊपर का हर काल इसी के साथ खिंचता या सिकुड़ता है। राहु काल कोई अलग से दी गई घड़ी नहीं, इसी बँटवारे का एक भाग है — घटाइए और आठ से भाग दे लीजिए।

20 अक्तूबर 2026 को सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन के आठ बराबर भाग और उनमें नामित तीन काल
भागसेतकनाम
पहला06:2407:49
दूसरा07:4909:15
तीसरा09:1510:40यमघण्ट काल
चौथा10:4012:05
पाँचवाँ12:0513:30गुलिक काल
छठा13:3014:56
सातवाँ14:5616:21राहु काल
आठवाँ16:2117:46

जिन पाँच भागों पर नाम नहीं है वे छाँट-कर बचे हुए शुभ भाग नहीं हैं — वे केवल अनामित हैं, और परम्परा उनके विषय में कुछ कहती ही नहीं। किसी दूसरे शहर के लिए यह पूरा बँटवारा उसके अपने सूर्योदय से दोबारा निकालना पड़ता है, जो panchang tool कर देता है।

चन्द्र बल

चन्द्र बल — सभी बारह राशियाँ

एक चन्द्र, और बारह उत्तर। भाव वह दूरी है जो आपकी जन्म राशि से मकर तक गिनी जाती है, इसलिए एक ही आकाश बारह लोगों के लिए बारह अलग बातें कहता है। इस दिन शुभ वर्ग में मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन पड़ती हैं और त्याज्य वर्ग में मिथुन, तुला और कुम्भ; शेष तीन मध्यम में हैं। अन्तिम स्तम्भ आपका अगला चन्द्राष्टम इसी तारीख से आगे गिनकर देता है।

20 अक्तूबर 2026 को चन्द्र जिस भाव में है, बारहों जन्म राशियों से गिनकर, और प्रत्येक राशि का अगला चन्द्राष्टम
जन्म राशिइस दिन का भावक्या दर्शाता हैवर्गअगला चन्द्राष्टम
♈︎मेषदसवाँकर्मकर्म, आजीविका और प्रतिष्ठाशुभ10 नवम्बर
♉︎वृषभनौवाँभाग्यभाग्य, धर्म और लम्बी यात्राएँमध्यम13 नवम्बर
♊︎मिथुनआठवाँरन्ध्रउपद्रव, गुप्त और आयुत्याज्य · चन्द्राष्टमइसी दिन
♋︎कर्कसातवाँकलत्रसाझेदारी, जीवनसाथी और व्यापारशुभ22 अक्तूबर
♌︎सिंहछठाशत्रुप्रतिस्पर्धा, ऋण और रोगशुभ24 अक्तूबर
♍︎कन्यापाँचवाँपुत्रसन्तान, विद्या और सृजनमध्यम26 अक्तूबर
♎︎तुलाचौथाबन्धुघर, माता और सुखत्याज्य28 अक्तूबर
♏︎वृश्चिकतीसरासहजपराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँशुभ30 अक्तूबर
♐︎धनुदूसराधनधन, वाणी और परिवारमध्यम1 नवम्बर
♑︎मकरपहलातनुशरीर और स्वयंशुभ3 नवम्बर
♒︎कुम्भबारहवाँव्ययव्यय, त्याग और दूर देशत्याज्य6 नवम्बर
♓︎मीनग्यारहवाँलाभलाभ, आय और सम्पर्कशुभ8 नवम्बर

शुभ

पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव

इन दिनों चन्द्र बल नए कार्य के आरम्भ का समर्थन करता माना जाता है। शास्त्रीय प्रयोग सीमित है और सीमित ही रखना चाहिए — यह आरम्भ करने की अनुमति है, परिणाम का वचन नहीं।

मध्यम

दूसरा, पाँचवाँ और नौवाँ भाव

न सहायक, न बाधक। इसी वर्ग पर परम्पराओं में मतभेद है — कुछ नवम को भाग्य का भाव मानकर पूर्णतः शुभ गिनते हैं, और कुछ द्वितीय को अशुभ। यदि कोई दिन महत्त्वपूर्ण है तो उसे तिथि, नक्षत्र और करण तय करते हैं, यह वर्ग नहीं।

त्याज्य

चौथा, आठवाँ और बारहवाँ भाव

परम्परा में किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के आरम्भ के लिए ये नहीं चुने जाते। अष्टम — चन्द्राष्टम — पर सभी परम्पराएँ एकमत हैं; चतुर्थ और द्वादश को अधिकांश, किन्तु सभी नहीं, इसमें गिनते हैं।

मिथुन की यह अवधि तब तक चलती है जब तक चन्द्र मकर में है — 21 अक्तूबर 2026 के सूर्योदय पर वह वहीं मिलता है, और 22 अक्तूबर 2026 के सूर्योदय पर कुम्भ में, जिसके बाद यही अवधि मकर की हो जाती है। राशि-परिवर्तन का क्षण इन दो सूर्योदय के बीच कहीं है; मिनट बता देना उस परिशुद्धता का दावा करना होता जो इस आँकड़े में नहीं है।

तारा बल

तारा बल

मुहूर्त में चन्द्र बल अकेला नहीं देखा जाता; उसके साथ तारा बल देखा जाता है, और दोनों अलग-अलग चीज़ गिनते हैं। चन्द्र बल जन्म-चन्द्र की राशि से राशियाँ गिनता है, तारा बल जन्म-नक्षत्र से नक्षत्र — और इस दिन गिनती श्रवण पर आकर रुकती है। नौ तारा हैं और नक्षत्र 27, इसलिए चक्र तीन बार दुहराता है: हर तारा ठीक तीन जन्म-नक्षत्रों के पास होता है। नीचे दाहिने स्तम्भ में अपना जन्म-नक्षत्र खोजिए।

इस दिन त्याज्य माने गए तीनों तारा — विपत्, प्रत्यरि और वध — उन जातकों पर पड़ते हैं जिनका जन्म-नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा, पूर्व फाल्गुनी, भरणी, ज्येष्ठा, आश्लेषा, रेवती, विशाखा, पुनर्वसु और पूर्व भाद्रपद है। यह सूची कल दूसरी होगी, क्योंकि नक्षत्र बदलते ही पूरा चक्र एक पायदान आगे खिसक जाता है।

20 अक्तूबर 2026 के नौ तारा और वे जन्म-नक्षत्र जिनसे प्रत्येक तक गिनती पहुँचती है
ताराक्या दर्शाता हैयदि आपका जन्म-नक्षत्र है
1. जन्ममिश्रजन्म-नक्षत्र — सहायक नहीं, तीव्र करने वालाश्रवण, हस्त और रोहिणी
2. सम्पत्शुभसम्पत्ति; लाभ के लिए किए गए कार्य में सबसे बलवानउत्तराषाढ़ा, उत्तर फाल्गुनी और कृत्तिका
3. विपत्त्याज्यसंकट और हानि; आरम्भ या यात्रा के लिए नहीं चुना जातापूर्वाषाढ़ा, पूर्व फाल्गुनी और भरणी
4. क्षेमशुभकुशल-क्षेम; जो टिकना चाहिए उसके लिए, जीतना है उसके लिए नहींमूल, मघा और अश्विनी
5. प्रत्यरित्याज्यबाधा; जहाँ दूसरे पक्ष की सहमति चाहिए वहाँ त्याज्यज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती
6. साधकशुभसिद्धि; आरम्भ के लिए नहीं, पूर्ण करने के लिएअनुराधा, पुष्य और उत्तर भाद्रपद
7. वधत्याज्यहानि; तीनों में सबसे भारी, पूर्णतः वर्जितविशाखा, पुनर्वसु और पूर्व भाद्रपद
8. मित्रशुभमित्रता; वस्तुओं के बजाय व्यक्तियों से व्यवहार के लिएस्वाती, आर्द्रा और शतभिषा
9. अति-मित्रशुभघनिष्ठ मित्रता, परम मित्र भी; नौ में सबसे कोमलचित्रा, मृगशिरा और धनिष्ठा

श्रवण सूर्योदय का नक्षत्र फिर 16 नवम्बर 2026, 13 दिसम्बर 2026 और 14 दिसम्बर 2026 को बनता है। अन्तराल ठीक बराबर नहीं मिलेंगे, क्योंकि तालिका में जो नक्षत्र लिखा है वह सूर्योदय के क्षण का है और चन्द्र की गति एक जैसी नहीं रहती। मुफ़्त कुंडली जन्म-नक्षत्र पद के साथ बता देती है।

प्रश्न

20 अक्तूबर 2026 के पंचांग पर सामान्य प्रश्न

20 अक्तूबर 2026 को तिथि क्या है?+

नई दिल्ली में सूर्योदय (06:24) के समय शुक्ल नवमी है, और वह शुक्ल पक्ष में पड़ती है। पिछले सूर्योदय पर शुक्ल अष्टमी थी। अगले सूर्योदय तक यह शुक्ल दशमी हो जाती है। जिस घड़ी यह बदलती है वह यहाँ नहीं दी गई, क्योंकि गणना दिन में एक बार, सूर्योदय पर देखती है।

20 अक्तूबर 2026 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?+

14:56-16:21 — अर्थात् 1 घण्टा 25 मिनट, जो इस 11 घण्टे 22 मिनट के दिन का आठवाँ भाग है। सूर्योदय (06:24) से सूर्यास्त (17:46) तक के उन आठ भागों में यह सातवाँ है, क्योंकि मंगलवार को यही भाग राहु के हिस्से आता है। उसी बनावट से यमघण्ट काल 09:15-10:40 और गुलिक काल 12:05-13:31 निकलते हैं।

20 अक्तूबर 2026 का दिन कितना लम्बा है, और उसका एक भाग कितना?+

नई दिल्ली में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 11 घण्टे 22 मिनट, अर्थात् 682 मिनट, इसलिए आठों में से प्रत्येक भाग 85.3 मिनट का। यह इस दो-वर्षीय तालिका के सबसे छोटे दिन (10 घण्टे 19 मिनट, 17 दिसम्बर 2026) से 1 घण्टा 03 मिनट अधिक, और सबसे लम्बे दिन (13 घण्टे 58 मिनट, 14 जून 2026) से 2 घण्टे 36 मिनट कम है, और इतना अन्तर ही वह कारण है जिससे एक दिन का राहु काल याद रख लेना काम नहीं देता।

20 अक्तूबर 2026 को चन्द्र किस नक्षत्र में है?+

श्रवण, सूर्योदय के समय, और चन्द्र मकर के 17.4° पर। इसी गणना में यह नक्षत्र सूर्योदय पर फिर 16 नवम्बर 2026, 13 दिसम्बर 2026 और 14 दिसम्बर 2026 को आता है। अंश इसलिए दिया गया है कि नक्षत्र अकेला राशि तय नहीं करता: 27 में से नौ नक्षत्र 30° की सीमा पर दो राशियों में बँटे हैं।

20 अक्तूबर 2026 को किस राशि का चन्द्राष्टम है?+

मिथुन का। चन्द्र मकर में है, और मकर मिथुन से आठवीं राशि पड़ती है। 21 अक्तूबर 2026 के सूर्योदय पर चन्द्र मकर में ही मिलता है और 22 अक्तूबर 2026 के सूर्योदय पर कुम्भ में, जिसके बाद यह अवधि मकर की हो जाती है।

20 अक्तूबर 2026 के बाद मेरा अगला चन्द्राष्टम कब है?+

इस दिन से आगे गिनने पर — मेष 10 नवम्बर 2026; वृषभ 13 नवम्बर 2026; मिथुन 20 अक्तूबर 2026; कर्क 22 अक्तूबर 2026; सिंह 24 अक्तूबर 2026; कन्या 26 अक्तूबर 2026; तुला 28 अक्तूबर 2026; वृश्चिक 30 अक्तूबर 2026; धनु 1 नवम्बर 2026; मकर 3 नवम्बर 2026; कुम्भ 6 नवम्बर 2026; मीन 8 नवम्बर 2026। हर राशि को चन्द्र मास में एक बार यह अवधि मिलती है, दो या तीन सूर्योदय तक। ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं।

क्या 20 अक्तूबर 2026 शुभ दिन है?+

किसी एक तारीख का पृष्ठ यह प्रश्न हल नहीं कर सकता, और यह पृष्ठ प्रयास भी नहीं करता। बारह भावों में छह शुभ माने जाते हैं, इसलिए इस दिन बारह राशियों में 6 शुभ स्थिति में हैं — और उसके बाद तारा बल, तिथि, करण, योग और आपकी अपनी कुंडली सब लागू होते हैं। दोनों शास्त्रीय छाननी पार करने वाले दिन किसी एक व्यक्ति के लिए लगभग एक-तिहाई निकलते हैं, इसलिए छाननी असली है और फिर भी भविष्यवाणी नहीं।

यह पंचांग किस स्थान का है और कैसे निकाला गया है?+

नई दिल्ली (28.6139° उत्तर, 77.209° पूर्व) का, JPL DE421 इफ़ेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से, 1 जनवरी 2026 से 31 दिसम्बर 2027 तक की गणना में से। किसी दूसरे शहर के लिए घड़ी के समय बदल जाएँगे; तिथि, नक्षत्र, योग और करण नहीं बदलेंगे, क्योंकि वे सूर्य और चन्द्र के अन्तर से बनते हैं, स्थान से नहीं।