गोचर
सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर 2026: प्रवेश समय और तारीखें
प्रकाशित 27 अक्तूबर 2026 | Live Pandit Ji
सूर्य वृश्चिक राशि में कब आएगा
सूर्य 16 नवम्बर 2026 को भारतीय समय 19:39 पर तुला से वृश्चिक में आएगा, और 16 दिसम्बर 2026 को भारतीय समय 10:20 पर वृश्चिक से धनु में जाएगा। कैलेंडर की तारीखों से गिनें तो यह 30 दिनों का ठहराव है; एक क्षण से दूसरे क्षण तक नापें तो 29.6 दिन। साइट की गति-तालिका सूर्य को हर राशि में लगभग 30½ दिन देती है, इसलिए यह अवधि थोड़ी छोटी रहेगी। यह कमी गोलाई से नहीं आई, सचमुच की है: प्रवेश-तालिका में प्रवेश के समय सूर्य की गति 1.008° प्रतिदिन और निकास के समय 1.017° प्रतिदिन दर्ज है। दोनों मान 0.986° के उस वार्षिक औसत से ऊपर हैं जो गति-तालिका के चक्र से निकलता है, और निकास पर गति प्रवेश की तुलना में कुछ अधिक है।
छपे हुए पंचांग प्रायः हर राशि में निरयन सूर्य के लिए तारीखों की एक स्थिर सीमा देते हैं, और साइट की राशि-तालिका में वृश्चिक की सीमा 17 नवम्बर से 15 दिसम्बर तक की है। 2026 में यह प्रवेश उस सीमा के खुलने से पहले वाली शाम को होगा। तारीख हर वर्ष एक-सी नहीं रहती: वही तालिका 2027 का प्रवेश 17 नवम्बर 2027 के तड़के रखती है, यानी आधी रात के बाद, उससे पहले नहीं। इसलिए “सूर्य वृश्चिक राशि में कब” पूछते समय प्रश्न में वर्ष भी जोड़ना होगा।
प्रवेश का क्षण, और जिसकी तारीख यहाँ नहीं है
जिस क्षण सूर्य वृश्चिक में प्रवेश करता है, परम्परा उसे वृश्चिक संक्रांति कहती है, और साइट की राशि-तालिका में यही नाम दर्ज है। संक्रांति किस दिन मनाई जाए और पंचांग उसके साथ कौन-सी शुभ अवधि जोड़ते हैं, ये अलग प्रश्न हैं; इनका निर्णय सूर्योदय और प्रवेश के पहर से जुड़े नियमों से होता है, जिन्हें यह पृष्ठ लागू नहीं करता। यहाँ न कोई पर्व-दिवस दिया गया है, न ऐसी कोई अवधि; यह प्रश्न स्थानीय पंचांग से पूछने का है।
प्रवेश का मिनट तक का समय इसलिए छापा गया है कि सूर्य तेज़ चलता है। 1.01° प्रतिदिन की गति पर भोगांश की एक कला घड़ी के लगभग 24 मिनटों के बराबर बैठती है, इसलिए यहाँ प्रयुक्त लाहिरी मान से एक कला के अंश भर भिन्न अयनांश लेने वाला पंचांग प्रवेश को कुछ मिनट आगे या पीछे रखेगा, और अपनी गणना के अनुसार वह भी सही होगा। तारीख पर कोई संदेह नहीं है: 19:39 आधी रात से लगभग 10 कलाओं जितना समय पहले है। धनु वाला प्रवेश, 10:20 पर, दोनों ओर की आधी रात से और भी दूर है, और वहाँ एक कला लगभग 24 मिनटों की है।
| तारीख (भारतीय मानक समय) | क्या होगा |
|---|---|
| 6 नवम्बर 2026 | सूर्य विशाखा नक्षत्र में, अभी तुला में ही |
| 13 नवम्बर 2026 | बुध तुला में मार्गी |
| 16 नवम्बर 2026 | मंगल और गुरु की युति, सिंह में (युति-तालिका) |
| 16 नवम्बर 2026, 19:39 | सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश |
| 20 नवम्बर 2026 | सूर्य अनुराधा नक्षत्र में |
| 2 दिसम्बर 2026 | बुध का वृश्चिक में प्रवेश |
| 3 दिसम्बर 2026 | सूर्य ज्येष्ठा नक्षत्र में |
| 11 दिसम्बर 2026 | शनि मीन में मार्गी |
| 13 दिसम्बर 2026 | गुरु सिंह में वक्री |
| 16 दिसम्बर 2026, 10:20 | सूर्य का धनु में प्रवेश, साथ ही मूल नक्षत्र में |
घड़ी का समय केवल सूर्य के दोनों राशि-प्रवेशों के साथ है। स्तंभन, नक्षत्र-प्रवेश और युति की पंक्ति केवल दिन तक दी गई हैं। मंगल–गुरु की पंक्ति उसी तारीख को पड़ेगी जिस दिन सूर्य का प्रवेश है; यह दो अलग-अलग तालिकाओं की तारीखों का संयोग भर है, और पृष्ठ इससे कोई अर्थ नहीं निकालता।
तुला से निकलकर मंगल की राशि में
साइट की ग्रह-तालिका तुला को सूर्य की नीच राशि बताती है, इसलिए यह राशि-परिवर्तन सूर्य का उस राशि से निकलकर उसके बाद वाली राशि में जाना है। उसी तालिका में वृश्चिक सूर्य की स्वराशि या उच्च राशि नहीं है: स्वराशि सिंह है और उच्च राशि मेष। राशि-तालिका मंगल को वृश्चिक का स्वामी बताती है; मेष का स्वामी भी वही है। पृष्ठ इन्हें तालिका की पंक्तियों के रूप में ही रखता है, और इनसे यह निष्कर्ष नहीं निकालता कि यह महीना किसी के लिए क्या लेकर आएगा।
दो और पंक्तियाँ स्वयं वृश्चिक की हैं। राशि-तालिका इसमें किसी ग्रह को उच्च नहीं बताती, और चन्द्रमा को यहाँ नीच बताती है, जिसकी पुष्टि ग्रह-तालिका दूसरी ओर से करती है। साथ ही, सूर्य की इस पूरी अवधि में वृश्चिक का स्वामी सिंह में रहेगा, जो सूर्य की अपनी राशि है, और उसके पास ही गुरु भी सिंह में होगा; सूर्य के आगे बढ़ने से पहले दोनों में से कोई भी राशि नहीं बदलेगा। इस स्थिति का मंगल वाला पहलू सिंह में मंगल 2026 पृष्ठ पर है, और सूर्य की इस राशि-स्थिति का सामान्य विवेचन वृश्चिक में सूर्य (अंग्रेज़ी में) नाम के संदर्भ-पृष्ठ पर मिलेगा।
नैसर्गिक मैत्री में सूर्य और मंगल
मैत्री-तालिका दोनों दिशाओं से पढ़ी जाती है, क्योंकि एक ग्रह की पंक्ति और दूसरे ग्रह की पंक्ति का आपस में सहमत होना ज़रूरी नहीं। यहाँ अधिकतर वे सहमत हैं। सूर्य की पंक्ति में मंगल मित्र है और मंगल की पंक्ति में सूर्य मित्र, और इसी कारण साइट की स्थिति-गणना मंगल की राशि में सूर्य को “मित्र राशि में” बताती है। पूरी सूची यह है:
| ग्रह | सूर्य की पंक्ति में | इस ग्रह की पंक्ति में सूर्य |
|---|---|---|
| चन्द्रमा | मित्र | मित्र |
| मंगल | मित्र | मित्र |
| बुध | सम | मित्र |
| गुरु | मित्र | मित्र |
| शुक्र | शत्रु | शत्रु |
| शनि | शत्रु | शत्रु |
दोनों दिशाओं में चन्द्रमा, मंगल और गुरु मित्र हैं, जबकि शुक्र और शनि शत्रु। केवल बुध के लिए दोनों पंक्तियाँ अलग बात कहती हैं: सूर्य की पंक्ति में वह सम है, जबकि बुध की पंक्ति में सूर्य मित्र है। सूर्य के वृश्चिक में रहते हुए इस राशि में प्रवेश करने वाला अकेला ग्रह भी यही होगा।
इस महीने से पहले और इसके भीतर बुध
वक्री चाल के पूरे दौर में बुध तुला के भीतर ही है, और वहीं 13 नवम्बर 2026 को मार्गी होगा, सूर्य के उस राशि को छोड़ने से 3 दिन पहले; यह पूरा चक्कर बुध वक्री 2026 पृष्ठ पर दिया गया है। इसके बाद बुध 2 दिसम्बर 2026 को वृश्चिक में आएगा, इसलिए सूर्य की अवधि के अंतिम 14 दिनों में दोनों इसी राशि में होंगे, और सूर्य के आगे बढ़ जाने पर भी बुध वृश्चिक में ही रहेगा; धनु में वह 22 दिसम्बर को पहुँचेगा। दोनों राशि-प्रवेशों के बीच युति-तालिका में सूर्य की किसी भी ग्रह के साथ कोई पंक्ति नहीं है। इस राशि में बुध के अपने महीने का ब्योरा वृश्चिक में बुध 2026 पृष्ठ पर है।
विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा और फिर मूल
राशि की सीमा पर सूर्य का नक्षत्र नहीं बदलता। वह 6 नवम्बर 2026 को, तुला में रहते हुए ही, विशाखा में प्रवेश करेगा, और विशाखा नक्षत्र राशि-सीमा के पार वृश्चिक के आरंभिक अंशों तक फैला है। 20 नवम्बर 2026 को वह अनुराधा में और 3 दिसम्बर 2026 को ज्येष्ठा में जाएगा; ये दोनों पूरी तरह वृश्चिक के भीतर हैं। ज्येष्ठा का विस्तार ठीक वहीं समाप्त होता है जहाँ वृश्चिक समाप्त होती है, और मूल धनु के 0°00′ से आरंभ होता है, इसलिए निकास दो तालिकाओं में दर्ज एक ही घटना है: नक्षत्र-तालिका में मूल के प्रवेश का समय ठीक वही है जो धनु के राशि-प्रवेश का। नक्षत्र-तालिका इन चारों के स्वामी क्रमशः गुरु, शनि, बुध और केतु बताती है। नक्षत्र-प्रवेशों की यहाँ केवल तारीख है, और पद का कोई उल्लेख नहीं। (चारों नक्षत्रों के पृष्ठ अंग्रेज़ी में हैं।)
वृश्चिक में सूर्य के रहते धीमे ग्रह
इस अवधि के भीतर दो स्तंभन पड़ेंगे, दोनों अंतिम सप्ताह में। शनि 11 दिसम्बर 2026 को मीन में मार्गी होगा, जिससे 137 दिनों की वक्री अवधि पूरी होगी (शनि वक्री 2026), और गुरु 13 दिसम्बर 2026 को सिंह में वक्री होगा। उस दिन से वह वक्री अवधि आरंभ होगी जिसे साइट की तालिका सिंह से पीछे कर्क तक ले जाती है (गुरु वक्री 2026)। इसी महीने राहु और केतु के मध्यम बिंदु भी राशि बदलेंगे। साइट उनका कोई समय नहीं छापती, क्योंकि उनकी पंक्तियाँ खगोलीय सारणी से पढ़ा गया मान नहीं, एक सूत्र से निकली हैं; यह परिवर्तन राहु–केतु गोचर 2026 (अंग्रेज़ी में) पृष्ठ पर है।
निकास का महत्व एक दूसरे कैलेंडर से जुड़ा है। धनु में सूर्य के प्रवेश से वह अवधि आरंभ होती है जिसे पंचांग खरमास कहते हैं। उसकी तारीखें और उससे जुड़ी प्रथाएँ खरमास दिसम्बर 2026 पृष्ठ पर हैं, और यह पृष्ठ उन्हें दोबारा नहीं लिखता।
अपनी चन्द्र राशि से वृश्चिक की गिनती
गोचर में गिनती जन्म राशि से आरंभ होती है: जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में था, वही राशि पहला भाव गिनी जाती है। आगे की तालिका वृश्चिक के लिए यह गिनती करके हर भाव का वही नाम लिखती है जो साइट की भाव-तालिकाओं में है। ग्रह-तालिका सूर्य को केवल एक दृष्टि देती है, सातवीं, जो वृश्चिक से वृषभ पर पड़ती है; वृषभ शुक्र की एक राशि है, और राशि-तालिका इसी राशि में चन्द्रमा को उच्च बताती है। अंतिम स्तंभ इस भाव की भी गिनती करता है। भाव जीवन के किसी क्षेत्र का नाम है, और हर भाव के पृष्ठ पर वे विषय गिनाए गए हैं जो परम्परा उस भाव को देती है। गोचर उस भाव में क्या करता है, इस पर तालिका कुछ नहीं कहती।
| चन्द्र राशि | उससे वृश्चिक | भाव (पृष्ठ अंग्रेज़ी में) | सातवीं दृष्टि वाला भाव |
|---|---|---|---|
| मेष | आठवाँ | आयु भाव | दूसरा |
| वृषभ | सातवाँ | कलत्र भाव | पहला |
| मिथुन | छठा | शत्रु भाव | बारहवाँ |
| कर्क | पाँचवाँ | पुत्र भाव | ग्यारहवाँ |
| सिंह | चौथा | सुख भाव | दसवाँ |
| कन्या | तीसरा | सहज भाव | नौवाँ |
| तुला | दूसरा | धन भाव | आठवाँ |
| वृश्चिक | पहला | तनु भाव | सातवाँ |
| धनु | बारहवाँ | व्यय भाव | छठा |
| मकर | ग्यारहवाँ | लाभ भाव | पाँचवाँ |
| कुम्भ | दसवाँ | कर्म भाव | चौथा |
| मीन | नौवाँ | भाग्य भाव | तीसरा |
जन्म राशि से की यह गिनती एक आरंभिक ढाँचा है, फलादेश नहीं। इसमें लग्न, किसी कुंडली में सूर्य जिस भाव का स्वामी है वह भाव, वृश्चिक या वृषभ में बैठा कोई जन्म-ग्रह, और चल रही दशा नहीं गिने जाते। चन्द्र राशि निकालने का उपकरण (अंग्रेज़ी में) जन्म-विवरण भरने पर जन्म राशि निकाल देता है। सूर्य के उपासक जो रविवार का व्रत रखते हैं, उसका वर्णन Sunday fasting for Surya Dev में है, और जिस कुंडली में सूर्य कमज़ोर आँका जाए उसके लिए परम्परा जो विधियाँ बताती है, वे remedies for a weak Sun में एकत्र हैं (दोनों अंग्रेज़ी में); इनमें से कोई भी इस गोचर से बँधा हुआ नहीं है।
तारीखें एक नज़र में
सूर्य वृश्चिक में: 16 नवम्बर 2026, भारतीय समय 19:39; अनुराधा में: 20 नवम्बर; बुध वृश्चिक में: 2 दिसम्बर; ज्येष्ठा में: 3 दिसम्बर; शनि मार्गी: 11 दिसम्बर; गुरु वक्री: 13 दिसम्बर; सूर्य धनु और मूल में: 16 दिसम्बर 2026, भारतीय समय 10:20। बीच में, 1 दिसम्बर 2026 को, मासिक स्थिति-पंक्ति सूर्य को वृश्चिक के 14.3° पर रखती है, प्रवेश के 15 दिन बाद।
यह लेख अंग्रेज़ी में भी पढ़ा जा सकता है: Sun in Scorpio 2026: Surya Gochar Vrishchik Rashi Dates।
आपकी कुंडली में वृश्चिक किस भाव में
राशि-प्रवेश के समय सभी पाठकों के लिए समान हैं, पर वृश्चिक जिस भाव में पड़ती है वह हर कुंडली में अलग होता है। जन्म कुंडली रिपोर्ट आपके जन्म के दिन, समय और स्थान से लग्न, चन्द्र राशि, हर ग्रह की राशि और भाव, और दशाओं का क्रम उनकी तारीखों सहित निकालती है। रिपोर्ट इस गोचर की व्याख्या नहीं करती; ऐसी व्याख्या के लिए जिस कुंडली की ज़रूरत होगी, वह यही है।
कुंडली रिपोर्ट लें (अंग्रेज़ी में)