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अक्तूबर 2027 पंचांग

अक्तूबर 2027 के सभी 31 दिन, नई दिल्ली के लिए JPL DE421 इफ़ेमेरिस से गणना किए गए। सूर्योदय 1 अक्तूबर के 06:13 से 31 अक्तूबर के 06:32 तक जाता है — महीने भर में 19 मिनट देर की ओर राहु काल और शेष छह अवधियाँ सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान के अंश हैं, इसलिए वे सब इसी के साथ खिसकती हैं।

  • दिन 31
  • शुक्ल पक्ष 17
  • कृष्ण पक्ष 14
  • चन्द्राष्टम अवधि 15

पड़ाव

इस महीने के चान्द्र पड़ाव

ये वे तिथियाँ हैं जिन पर पक्ष बदलता है, और इसी से महीना असमान बँटता है: 31 दिनों में से 17 दिन शुक्ल पक्ष में पड़ते हैं और 14 कृष्ण पक्ष में — यह गिनती नीचे के तिथि स्तम्भ से की गई है, कैलेंडर से नहीं। एक पक्ष पन्द्रह तिथियों का होता है, पन्द्रह दिनों का नहीं, और तिथि नई दिल्ली की आधी रात से — या किसी भी नगर की आधी रात से — मेल नहीं खाती।

पूर्णिमा

पूर्ण चन्द्र — शुक्ल पक्ष यहीं समाप्त होता है

अमावस्या

नया चन्द्र — कृष्ण पक्ष यहीं समाप्त होता है

शुक्ल एकादशी और कृष्ण एकादशी

प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, जिस पर उपवास की परम्परा है

तालिका

महीने का प्रत्येक दिन

नीचे दी गई तिथि और नक्षत्र वे हैं जो सूर्योदय के समय चल रही थीं — जब एक ही मान को पूरे कैलेंडर दिन के लिए खड़ा होना हो, तो पंचांग की परम्परा यही लेती है। समय जैसे तालिका में गणना किए गए हैं, वैसे ही छापे गए हैं; इस पृष्ठ पर कोई मिनट दोबारा नहीं निकाला गया। अन्तिम स्तम्भ उस दिन की चन्द्राष्टम राशि है — ठीक एक, क्योंकि चन्द्र एक समय में एक ही राशि में होता है। किसी भी तारीख पर उस दिन का पूरा पंचांग खुलता है।

अक्तूबर 2027 का दिन-प्रतिदिन पंचांग, नई दिल्ली के लिए
दिनांकतिथिनक्षत्रसूर्योदयराहु कालचन्द्राष्टम
1 शुक्रवारशुक्ल द्वितीयाचित्रा06:1310:41-12:10कुम्भ
2 शनिवारशुक्ल तृतीयास्वाती06:1409:12-10:41मीन
3 रविवारशुक्ल चतुर्थीविशाखा06:1416:36-18:05मीन
4 सोमवारशुक्ल पंचमीअनुराधा06:1507:44-09:12मेष
5 मंगलवारशुक्ल षष्ठीज्येष्ठा06:1515:06-16:34मेष
6 बुधवारशुक्ल सप्तमीमूल06:1612:09-13:37वृषभ
7 गुरुवारशुक्ल अष्टमीपूर्वाषाढ़ा06:1713:36-15:04वृषभ
8 शुक्रवारशुक्ल अष्टमीपूर्वाषाढ़ा06:1710:40-12:08वृषभ
9 शनिवारशुक्ल नवमीउत्तराषाढ़ा06:1809:13-10:40मिथुन
10 रविवारशुक्ल दशमीश्रवण06:1816:30-17:57मिथुन
11 सोमवारशुक्ल एकादशीधनिष्ठा06:1907:46-09:13कर्क
12 मंगलवारशुक्ल द्वादशीशतभिषा06:1915:01-16:28कर्क
13 बुधवारशुक्ल त्रयोदशीपूर्व भाद्रपद06:2012:07-13:34कर्क
14 गुरुवारशुक्ल चतुर्दशीउत्तर भाद्रपद06:2113:33-15:00सिंह
15 शुक्रवारपूर्णिमारेवती06:2110:40-12:06सिंह
16 शनिवारकृष्ण प्रतिपदाअश्विनी06:2209:14-10:40कन्या
17 रविवारकृष्ण द्वितीयाभरणी06:2216:24-17:49कन्या
18 सोमवारकृष्ण तृतीयाकृत्तिका06:2307:49-09:14तुला
19 मंगलवारकृष्ण चतुर्थीरोहिणी06:2414:56-16:22तुला
20 बुधवारकृष्ण पंचमीमृगशिरा06:2412:05-13:31तुला
21 गुरुवारकृष्ण षष्ठीआर्द्रा06:2513:30-14:55वृश्चिक
22 शुक्रवारकृष्ण सप्तमीपुनर्वसु06:2510:40-12:05वृश्चिक
23 शनिवारकृष्ण अष्टमीपुष्य06:2609:15-10:40धनु
24 रविवारकृष्ण नवमीआश्लेषा06:2716:18-17:43धनु
25 सोमवारकृष्ण एकादशीमघा06:2707:52-09:16मकर
26 मंगलवारकृष्ण द्वादशीपूर्व फाल्गुनी06:2814:53-16:17मकर
27 बुधवारकृष्ण त्रयोदशीउत्तर फाल्गुनी06:2912:04-13:28कुम्भ
28 गुरुवारकृष्ण चतुर्दशीहस्त06:2913:28-14:52कुम्भ
29 शुक्रवारअमावस्याचित्रा06:3010:41-12:04मीन
30 शनिवारशुक्ल प्रतिपदास्वाती06:3109:18-10:41मीन
31 रविवारशुक्ल द्वितीयाविशाखा06:3216:14-17:37मेष

वृद्धि और क्षय

तिथि का स्तम्भ कहाँ अपने को दुहराता है, और कहाँ छलाँग लगाता है

तिथि दिन नहीं है। वह उतना समय है जितने में चन्द्र सूर्य से अपनी दूरी 12° और खोल ले, और चूँकि दोनों दीर्घवृत्त पर चलते हैं, कक्षा के किसी हिस्से में इसमें एक दिन से कम लगता है और किसी में कुछ अधिक। ऊपर का स्तम्भ सूर्योदय के समय की तिथि छापता है, इसलिए एक लम्बी तिथि लगातार दो सूर्योदय पकड़ सकती है और दो तारीखों पर दिख सकती है — वृद्धि तिथि, जिसे अधिक तिथि भी कहा जाता है। और एक छोटी तिथि एक सूर्योदय के बाद आरम्भ होकर अगले से पहले समाप्त हो सकती है, तब महीने की कोई तारीख उसे उठाती ही नहीं: क्षय तिथि। दोनों में से कोई भी किसी एक दिन के पृष्ठ पर नहीं दिखता, क्योंकि दोनों एक दिन का गुण नहीं, दो सूर्योदय की जोड़ी का गुण हैं।

सूर्योदय के समय दिखने वाली तिथि महीने की 30 रातों में कुल 30 स्थान आगे बढ़ती है, और इनमें 28 रातों में ठीक एक स्थान। 1 बार एक ही तिथि दो सूर्योदय तक टिकी रहती है — शुक्ल अष्टमी, 7 और 8 अक्तूबर। 1 बार स्तम्भ एक से अधिक स्थान की छलाँग लगाता है, अर्थात् बीच में पड़ने वाली तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं मिलती — कृष्ण दशमी, 24 और 25 अक्तूबर के बीच।

दोनों बराबर नहीं आते, और उसका कारण एक भाग है। एक चान्द्र मास औसतन 29.53 दिन का है और उसमें 30 तिथियाँ बैठती हैं, इसलिए मध्यम तिथि 23 घण्टे 37 मिनट की पड़ती है — एक दिन से कम। जिस स्तम्भ के मान औसतन एक दिन से छोटे हों, वह दुहराने से अधिक बार छोड़ेगा, और इस तालिका के 24 महीनों में वही हुआ है: 32 क्षय तिथि के सामने 22 वृद्धि। इनमें से हर महीने में कम से कम एक क्षय तिथि है। इस तालिका में ऐसे महीने केवल ये हैं जिनमें एक भी वृद्धि तिथि नहीं — अप्रैल 2026, सितम्बर 2026 और फ़रवरी 2027 — और अक्तूबर 2027 उनमें नहीं है।

जिस तिथि को कोई सूर्योदय नहीं पकड़ता, उस पर पड़ने वाला व्रत या पर्व किस कैलेंडर तारीख को माना जाएगा — यह प्रश्न उस परम्परा का है जिसका पालन किया जा रहा है, और यह पृष्ठ उसका उत्तर नहीं देता। जो वह करता है वह इतना है: उस प्रश्न को जन्म देने वाला अंकगणित छाप देता है, उन तारीखों के साथ जिन पर वह इस महीने घटा। किसी विशेष पंचांग का निर्णय जानना हो तो अपने घर की परम्परा या किसी पंडित जी से पूछना ही ठीक रहता है।

नक्षत्र का स्तम्भ दूसरी ओर झुकता है

नक्षत्र का स्तम्भ इसी कारण से लड़खड़ाता है और उसके ठीक उलटी ओर गिरता है। एक नक्षत्र निरयन राशिचक्र का 13°20′ है — पूरे वृत्त का सत्ताईसवाँ भाग, न कि किसी खुलती-बन्द होती दूरी का तीसवाँ — और चन्द्र उसे औसतन 24 घण्टे 17 मिनट में पार करता है, क्योंकि 27.32 दिन के नक्षत्र मास को 27 से बाँटने पर एक दिन से कुछ अधिक मिलता है, जहाँ चान्द्र मास को 30 से बाँटने पर कुछ कम मिला था। इसलिए वही तुलना दूसरी दिशा में चलती है: इन्हीं 24 महीनों में 28 वृद्धि नक्षत्र के सामने 18 क्षय, जबकि तिथि का स्तम्भ 22 के सामने 32 पर चला। एक पंक्ति का अंकगणित, दो स्तम्भ उलटी दिशा में झुके हुए, और दोनों ऊपर छपे हैं जहाँ दावा जाँचा जा सकता है।

सूर्योदय के समय दिखने वाला नक्षत्र महीने की 30 रातों में कुल 29 स्थान आगे बढ़ता है, और इनमें 29 रातों में ठीक एक स्थान। 1 बार एक ही नक्षत्र दो सूर्योदय तक टिका रहता है — पूर्वाषाढ़ा, 7 और 8 अक्तूबर। और स्तम्भ किसी नक्षत्र पर से गुज़र नहीं जाता — महीने का हर दिन क्रम का अगला नक्षत्र लेता है, या पिछले को दुहराता है।

फ़रवरी 2026, मार्च 2026, सितम्बर 2026, अक्तूबर 2026, फ़रवरी 2027, मई 2027 और अक्तूबर 2027 में स्तम्भ एक भी नक्षत्र नहीं छोड़ता, जबकि तिथि का स्तम्भ हर महीने में कम से कम एक तिथि छोड़ता है। वही अंकगणित, उलटा चिह्न। दूसरी ओर मार्च 2026 में कोई नक्षत्र दो सूर्योदय तक नहीं टिकता, और वृद्धि नक्षत्र के लिए इस तालिका में यह उतना ही असामान्य है।

यहाँ भी वही सीमा है जो ऊपर तिथि के साथ थी। नक्षत्र का क्षय या वृद्धि इस बात का ब्यौरा है कि सूर्योदय कहाँ पड़ा, न कि इस बात का कि चन्द्र ने कुछ छोड़ दिया — वह अपने 27 भागों में से एक भी नहीं छोड़ता। छूटता वह सूर्योदय के प्रतिनिधित्व से है, और यही अन्तर पंचांग पढ़ते समय सबसे पहले खो जाता है।

राहु काल

राहु काल के स्तम्भ में दो ही चीज़ें चलती हैं

ऊपर के स्तम्भ को सीधे नीचे तक पढ़ें तो लगता है ऋतु इस अवधि को पूरे दिन में उछाल रही है: अक्तूबर 2027 में यह जल्दी से जल्दी 07:44 पर खुलती है और देर से देर 16:36 पर, अर्थात् 8 घण्टे 52 मिनट का फैलाव। इसमें ऋतु का हिस्सा लगभग कुछ भी नहीं है। राहु काल दिनमान के आठ बराबर भागों में से एक है, और कौन सा भाग — यह वार तय करता है: सोमवार को दूसरा भाग, रविवार को आठवाँ भाग। इसलिए उस फैलाव का अधिकांश एक ही स्तम्भ में बैठे सात वारों का बँटवारा है, चलता हुआ सूर्य नहीं।

हर पंक्ति में दो राशियाँ वास्तव में चलती हैं, और दोनों छपे हुए समयों से ही पढ़ी जा सकती हैं। पहली है अवधि की अपनी लम्बाई, जो वही आठवाँ भाग है: अक्तूबर 2027 में वह 1 घण्टा 23 मिनट से 1 घण्टा 29 मिनट तक रहती है। दूसरी है सूर्योदय से उसके आरम्भ तक की दूरी, जो उन्हीं आठवें भागों की पूरी संख्या होती है — सोमवार को 1 और रविवार को 7 — इसलिए ऋतु का एक ही परिवर्तन हर वार पर अलग-अलग बार गिना जाता है। अक्तूबर 2027 में सोमवार की 4 तारीखों पर यह दूरी 4 मिनट हिलती है, और रविवार की 5 तारीखों पर 40 मिनट

ये दोनों आँकड़े दोनों भाग-संख्याओं के अनुपात में नहीं हैं, और होने भी नहीं चाहिए: रविवार और सोमवार अलग तारीखों पर पड़ते हैं, इसलिए हर पंक्ति आठवें भाग की खिसकन को अपने ही चार-पाँच दिनों पर नापती है। गुणक तन्त्र है, नाप नहीं। ऊपर एक ही वार की किसी भी दो पंक्तियों में राहु काल के आरम्भ से सूर्योदय घटा दें, और जो अन्तर बचेगा वह आठवाँ भाग है — उस वार की संख्या के बराबर बार गिना हुआ।

यह केवल अक्तूबर 2027 की बात नहीं है। सोमवार की यह दूरी इस तालिका के सभी 24 महीनों में सातों वारों में सबसे कम हिलती है, और सबसे अधिक हिलने वाला सदा दिन का छठा, सातवाँ या आठवाँ भाग होता है। जो पृष्ठ पूरे देश के लिए एक ही राहु काल छापता है, उसने आठवें भाग की लम्बाई ही गलत ले ली है, क्योंकि वह लम्बाई स्थानीय दिनमान का अंश है; और जो पूरे महीने के लिए एक ही अवधि छापता है, उसका गुणक भी गलत है। यही कारण है कि यहाँ हर दिन की पंक्ति अलग छपी है।

यह पृष्ठ इस अवधि को किसी काम के लिए शुभ या त्याज्य नहीं कहता। जो ऊपर दिया है वह गणना है — अवधि कब खुलती है, कब बन्द होती है, और वह दिनमान का कौन सा भाग है। उस पर आधारित निर्णय परम्परा का विषय है, और मुहूर्त के लिए तिथि, नक्षत्र, करण और प्रश्न के समय का लग्न भी देखे जाते हैं, जो इस तालिका में नहीं हैं।

चन्द्राष्टम

अक्तूबर 2027 के चन्द्राष्टम दिन, राशि के अनुसार

ऊपर के वही 31 दिन, दूसरी तरह छाँटे हुए। किसी राशि का चन्द्राष्टम तब आरम्भ होता है जब चन्द्र उससे गिनी गई आठवीं राशि में प्रवेश करता है, और तब समाप्त होता है जब वह उसे छोड़ता है। चन्द्र एक राशि में औसतन 2.28 दिन रहता है, इसलिए पूरी अवधि दो सूर्योदय की होती है या तीन — एक की कभी नहीं और चार की कभी नहीं। अक्तूबर 2027 में दो सूर्योदय वाली 11 और तीन सूर्योदय वाली 4 अवधियाँ हैं

किन्तु कैलेंडर का महीना चन्द्र के बारह राशियों के एक चक्कर से लम्बा होता है, इसलिए नीचे का जाल बारह अवधियाँ नहीं रखता — वह 15 रखता है। महीना बीतने से पहले चन्द्र कुम्भ, मीन और मेष पर लौट आता है, इसलिए नीचे उन राशियों के साथ तारीखों के दो अलग गुच्छे दिखते हैं, एक नहीं। ऐसा इस तालिका के हर महीने में होता है — कम से कम 1 और अधिक से अधिक 3 राशियों के साथ — और यही कारण है कि नीचे की गिनती कभी बारह नहीं निकलती। जो पृष्ठ बारह राशियों के लिए बारह अवधियाँ छापता है, वह महीने की लम्बाई से चन्द्र की गति मिला रहा है।

जहाँ कोई अवधि महीने की पहली या अन्तिम तारीख को पार करती है, वहाँ अक्तूबर 2027 से बाहर पड़ने वाली तारीखें उसके साथ ही दी गई हैं। जिस तीन सूर्योदय की अवधि का एक सूर्योदय पिछले महीने में है, वह अवधि तीन सूर्योदय की ही है, और जो जाल केवल कैलेंडर के भीतर का हिस्सा दिखाता, वह ऊपर लिखे अपने ही वाक्य का खण्डन करता।

ये सूर्योदय हैं, राशि-परिवर्तन के क्षण नहीं। चन्द्र का प्रवेश और निर्गम प्रायः रात में होता है, इसलिए दो सूर्योदय की अवधि ठीक दो दिन नहीं, दो दिन से कुछ अधिक होती है — पंचांग की परम्परा यही है, और इस पृष्ठ पर उससे आगे की कोई परिशुद्धि नहीं दिखाई गई है। यह खण्ड स्थिति गिनता है, दिन का मूल्यांकन नहीं करता: कौन सा दिन किसके लिए कैसा रहेगा, यह जन्म कुंडली, दशा और गोचर तीनों को देखकर बताया जाता है।

मेष

4 और 5 अक्तूबर

31 अक्तूबर 3 सूर्योदय की अवधि, 31 अक्तूबर से 2 नवम्बर

वृषभ

6, 7 और 8 अक्तूबर

मिथुन

9 और 10 अक्तूबर

कर्क

11, 12 और 13 अक्तूबर

सिंह

14 और 15 अक्तूबर

कन्या

16 और 17 अक्तूबर

तुला

18, 19 और 20 अक्तूबर

वृश्चिक

21 और 22 अक्तूबर

धनु

23 और 24 अक्तूबर

मकर

25 और 26 अक्तूबर

कुम्भ

1 अक्तूबर 2 सूर्योदय की अवधि, 30 सितम्बर से 1 अक्तूबर

27 और 28 अक्तूबर

मीन

2 और 3 अक्तूबर

29 और 30 अक्तूबर